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Pakistan Under Siege: क्या 'मार्शल लॉ' पर खत्म होगा 'तालिबान' खान का ट्रेलर, मुल्क छोड़ गए प्रधानमंत्री शरीफ!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 10 May 2023 05:52 PM IST
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सार
Pakistan Under Siege: तालिबान का समर्थन करने के चलते 2008 में गुल को अमेरिका ने 'वैश्विक आतंकवादियों' की निगरानी सूची में रखा था। 'अल कायदा' और 'तालिबान' को लेकर पीटीआई की जो नीति रही है, उसकी स्क्रिप्ट गुल ने ही लिखी थी...
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Pakistan Under Siege: After the arrest of Imran Khan, the political situation of pakistan constantly changing
Pakistan Under Siege- Hamid Gul with Imran Khan - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान के पूर्व पीएम और 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद वहां की राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। जानकारों ने वहां पर मार्शल लॉ यानी सेना का शासन, होने की संभावना जताई है। सवाल उठ रहे हैं कि इमरान की गिरफ्तारी के वक्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर कहां थे। क्या वे देश से बाहर चले गए हैं?

पाकिस्तान की हलचल पर नजर रख रहे सैन्य मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, क्या 'मार्शल लॉ' पर खत्म होगा 'तालिबान खान' यानी इमरान खान की गिरफ्तारी का ट्रेलर। पाकिस्तान में कई जगहों पर सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। पीटीआई के कई वरिष्ठ नेताओं को नजरबंद किया जा रहा है। पाकिस्तान में 'सिलेक्टिेड और इलेक्टिेड' पीएम की होड़ अब खत्म हो सकती है। पड़ोसी मुल्क के 75 साल में से 38 साल तो 'मार्शल लॉ' में चले गए हैं।

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इमरान खान को 'तालिबान खान' कहा जाने लगा

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी को वरदान बताया था। तभी से इमरान खान को 'तालिबान खान' कहा जाने लगा। तालिबान के प्रति इमरान खान और उसकी पार्टी का खास लगाव रहा है। आईएसआई के पूर्व प्रमुख रहे लेफ्टिनेंट जनरल हामिद गुल को 'पीटीआई' का संस्थापक सदस्य बनाया गया था। आईएसआई प्रमुख के तौर पर गुल ने अफगानिस्तान और जम्मू-कश्मीर, दोनों जगहों पर कट्टरपंथी इस्लामी समूहों के संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। इमरान खान, शुरू से ही गुल के निकट संपर्क में रहे थे। अनिल गौर कहते हैं कि इमरान खान को एक कट्टरपंथी इस्लामवादी बनाने में गुल का बड़ा योगदान रहा है।

पीटीआई की स्क्रिप्ट गुल ने ही लिखी थी

तालिबान का समर्थन करने के चलते 2008 में गुल को अमेरिका ने 'वैश्विक आतंकवादियों' की निगरानी सूची में रखा था। 'अल कायदा' और 'तालिबान' को लेकर पीटीआई की जो नीति रही है, उसकी स्क्रिप्ट गुल ने ही लिखी थी। भले ही गुल इन आरोपों को खारिज करते रहे। ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद गुल ने कहा कि अमेरिकी सेना ने उसे अफगानिस्तान में मार डाला। पाकिस्तान को अपमानित करने के लिए शव को एबटाबाद ले जाया गया। जनरल गुल ने अफगानिस्तान के सोवियत कब्जे के दौरान सीआईए के साथ मिलकर काम किया। उसके खिलाफ तालिबान को खड़ा करने में मदद की। 1989 में सोवियत संघ की वापसी के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान को एक समृद्ध देश बनाने में मदद का वादा किया, लेकिन वह अपने वादे से मुकर गया। इसके बाद जनरल गुल ने घोषणा कर दी कि 'मुस्लिम दुनिया को अमेरिका के तथाकथित आतंकवाद पर युद्ध का सामना करने के लिए एकजुट होना चाहिए। वास्तव में यह मुसलमानों के खिलाफ युद्ध है।

इमरान ने गुल की नीति को भारत में इस्तेमाल किया

कैप्टन गौर बताते हैं, इमरान खान ने गुल की उक्त नीतियों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया। इमरान खान के प्रधानमंत्री रहते हुए पुलवामा में सीआरपीएफ बस पर आतंकी हमला कराया गया। गुल की तरह इमरान ने भी कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताया। कश्मीर को इस्लामवाद से जोड़ दिया गया। पंजाब में खालिस्तान को दोबारा से जिंदा करने में भी इमरान खान का हाथ बताया जाता है। ये अलग बात है कि उन्होंने सार्वजनिक मंच से कई बार भारत के मजबूत लोकतंत्र की सराहना की है। अब पाकिस्तान के अस्थिर होने की प्रबल संभावना है। इमरान खान के समर्थकों ने आर्मी के प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन सेना ने सख्त कार्रवाई नहीं की।

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इमरान को लेकर सेना में फूट

सेना के बीच भी इमरान को लेकर फूट बताई जा रही है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अहमद अंजुम और आर्मी चीफ असीम मुनीर के बीच तालमेल नहीं हो पा रहा है। ऐसी खबरें आ रही हैं कि मुनीर, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर पूरे देश में मार्शल लॉ लागू करने का दबाव डाल रहे हैं।

आर्मी चीफ असीम मुनीर और इमरान खान के बीच छत्तीस का आंकड़ा बताया जाता है। दूसरी तरफ आईएसआई के लेफ्टिनेंट जनरल रहे फैज हामिद को इमरान का समर्थक माना जाता है। जब इमरान खान पीएम थे, तब वे फैज हमीद को आर्मी चीफ बनाना चाहते थे। हालांकि वे सफल नहीं हुए।

बॉर्डर पर हिंदुस्तान को बढ़ानी होगी सतर्कता

पाकिस्तान में अब आईएसआई, सेना और पीएम शरीफ, तीनों के बीच पटरी नहीं बैठ रही है। अगर वहां मार्शल लॉ लागू होता है, तो सेना का पहला काम, पाकिस्तान में हिंसा पर काबू पाना होगा। बतौर अनिल गौर, इसके लिए लोगों का ध्यान भटकाया जा सकता है। ध्यान भटकाने का एक ही तरीका यानी बॉर्डर पर ऐसा कुछ कर दिया जाए, जिससे दोनों देशों की आर्मी के बीच तनाव हो। ऐसे में भारत को अपने बॉर्डर पर सर्विलांस बढ़ाना होगा। गौर के मुताबिक, रॉ और आईबी, जैसी एजेंसियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। भारत के लिए पाकिस्तान में मार्शल लॉ लागू होना ठीक नहीं है। सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने जब पाकिस्तान की सत्ता संभाली तो कारगिल वॉर हुई थी।

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