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Pakistan: पाक कबायली परिषद-TTP के बीच गतिरोध बरकरार, टीटीपी ने अपनी मांगो को वापस लेने से किया इनकार
Mon, 01 Aug 2022 05:57 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 01 Aug 2022 05:57 PM IST
सार
गतिरोध के साथ वार्ता समाप्त होने से अशांत सीमावर्ती क्षेत्र में लगभग दो दशकों से चल रहे आतंकवाद को समाप्त करने के सरकार के प्रयासों में पाकिस्तान की स्थिति और भी जटिल हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वार्ता के दौरान टीटीपी ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के साथ पूर्ववर्ती संघीय प्रशासित जनजातीय क्षेत्रों के विलय को वापस लेने की अपनी मांग से पीछे हटने से इनकार कर दिया।
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पाकिस्तान के खैबर- पख्तूनख्वा प्रांत से कबायली नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान के साथ बातचीत करने के लिए अफगानिस्तान पहुंचा था। 17 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल और टीटीपी के बीच हुई वार्ता गतिरोध के साथ समाप्त हो गई है। गौरतलब है कि इस वार्ता का उद्देश्यसीमावर्ती क्षेत्र में करीब दो दशक से चल रहीं चरमपंथी गतिविधियों को खत्म करने का रास्ता तलाशना था।
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गतिरोध के साथ वार्ता समाप्त होने से अशांत सीमावर्ती क्षेत्र में लगभग दो दशकों से चल रहे आतंकवाद को समाप्त करने के सरकार के प्रयासों में पाकिस्तान की स्थिति और भी जटिल हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वार्ता के दौरान टीटीपी ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के साथ पूर्ववर्ती संघीय प्रशासित जनजातीय क्षेत्रों के विलय को वापस लेने की अपनी मांग से पीछे हटने से इनकार कर दिया। साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स ने यह भी कहा कि शांति समझौता होने की स्थिति में टीटीपी ने हथियार डालने से भी इनकार कर दिया है।
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गौरतलब है कि खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री के विशेष सहायक बैरिस्टर मोहम्मद अली सैफ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल शनिवार को काबुल पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का उद्देश्य धार्मिक मौलवियों की सद्भावना का उपयोग करके टीटीपी को अपनी मांगों को वापस लेने के लिए राजी करना था।
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पाकिस्तान ने पिछले साल अक्टूबर में अफगान तालिबान के अनुरोध पर इस ज्वलंत मुद्दे का राजनीतिक समाधान तलाशने के लिए टीटीपी के साथ बातचीत शुरू की थी। पाकिस्तान सरकार और टीटीपी पिछले महीने लगभग दो दशकों के उग्रवाद को समाप्त करने के लिए बातचीत जारी रखते हुए अनिश्चित काल के लिए संघर्ष विराम पर वार्ता के लिए सहमत हुए थे।