Pakistan: घना होता जा रहा है पाकिस्तान पर टीटीपी के आतंक का साया
Pakistan: आलोचकों के मुताबिक शहबाज शरीफ सरकार अपनी सत्ता बचने की जद्दोजहद में इस तरह खोई हुई है कि आतंकवाद जैसे गंभीर मसले पर उसका ध्यान नहीं है। इस बीच टीटीपी से बातचीत से कोई समाधान निकलने की उम्मीद और कमजोर हो गई है...
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पाकिस्तान सरकार और आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बीच चल रही बातचीत में रुकावट आ गई है। एक तरफ अफगानिस्तान में अपने वरिष्ठ कमांडर अब्दुल वली उर्फ उमर खालिद खोरासानी के मारे जाने से टीटीपी नाराज हुआ है, वहीं पाकिस्तान के प्रांत खैबर पख्तूनवा में टीटीपी से बातचीत करने की सरकारी नीति के खिलाफ बड़ा जन विरोध खड़ा हो गया है। खोरासानी की मौत अफगानिस्तान में एक विस्फोट से हुई। इसके पीछे किसका हाथ है, इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन खबर है कि टीटीपी को शक पाकिस्तान सरकार की एजेंसियों पर है।
इस बीच खैबर पख्तूनवा में टीटीपी से वार्ता से खिलाफ लगातार जन प्रदर्शन हो रहे हैं। पाकिस्तान में टीटीपी की सबसे ज्यादा मौजूदगी इसी प्रांत में रही है। टीटीपी से वार्ता के हो रहे विरोध की बात पाकिस्तान सरकार ने भी स्वीकार की है। उसने यह भी माना है कि टीटीपी की गतिविधियों के कारण इस प्रांत में हाल में स्थिति बिगड़ी है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को नेशनल असेंबली में कहा- प्रांत में कानून व्यवस्था की हालत बिगड़ रही है। लेकिन साथ ही उन्होंने जोड़ा कि यह एक राष्ट्रीय मसला है, इसका संबंध सिर्फ खैबर पख्तूनवा से नहीं है।
आसिफ ने इसी सिलसिले में टीटीपी से जारी वार्ता की सफलता को लेकर शक जताया। उन्होंने कहा- ‘मेरी अल्लाह से दुआ है कि वह बातचीत को पटरी पर रखे। लेकिन खतरा रोज बढ़ रहा है।’ इस बीच आसिफ के इस बयान से विवाद खड़ा हो गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के दूसरे नेताओं ने तालिबान आतंकवादियों को खैबर पख्तूनवा आने का न्योता दिया था। पर्यवेक्षकों ने इसे आतंकवाद जैसे नाजुक मसले पर दलगत राजनीति करने की एक मिसाल माना है।
खैबर पख्तूनवा से चुने गए सांसदों ने ये मसला नेशनल असेंबली में उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वहां जारी जन प्रदर्शनों की अनदेखी कर रही है। निर्दलीय सांसद मोहसीन डावर ने बताया कि बीते 26 दिन से प्रांत में लोग सड़कों पर उतर कर शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। डावर ने बताया कि आतंकवाद ने खैबर पख्तूनवा में अपने पांव पूरी तरह फैला लिए हैं। टीटीपी के हमलों में कई लोग मारे गए हैं। एक पुलिसकर्मी और सेना के एक मेजर का वहां हाल में अपहरण भी हो चुका है। डावर ने चेतावनी दी कि जल्द ही यही हालत पूरे देश की हो जाएगी।
आलोचकों के मुताबिक शहबाज शरीफ सरकार अपनी सत्ता बचने की जद्दोजहद में इस तरह खोई हुई है कि आतंकवाद जैसे गंभीर मसले पर उसका ध्यान नहीं है। इस बीच टीटीपी से बातचीत से कोई समाधान निकलने की उम्मीद और कमजोर हो गई है। ऐसे में आशंका है कि टीटीपी पूरे देश में अपने हमले तेज कर देगा। जिस समय सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ रहा है और उसकी आंच सेना तक पहुंच रही है, आतंकवादियों को अपने पांव फैलाने का यह अनुकूल मौका महसूस हो रहा है।