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Pakistan: इमरान की पार्टी की प्रांतीय सरकार ने आईएमएफ से कर्ज के रास्ते में डाली अड़चन

Sat, 27 Aug 2022 04:02 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 27 Aug 2022 04:02 PM IST
सार

Pakistan: राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक खैबर पख्तूनवा के इस रुख के पीछे सियासी पहलू भी हैं। आईएमएफ ने जो शर्तें थोपी हैं, उनके तहत शहबाज शरीफ सरकार ने पेट्रोलियम और बिजली के दाम में भारी बढ़ोतरी की है...

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Pakistan: Provincial government of Imran Khan's party put hurdles in the way of loan from IMF
Pakistan: इमरान खान रैली - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान में बढ़ रहे राजनीतिक टकराव के कारण यहां आर्थिक संकट के और गंभीर रूप लेने की आशंका पैदा हो गई है। खैबर पख्तूनवा प्रांत की सरकार ने इस साल अपने बजट को लाभ में लाने का लक्ष्य मानने से इनकार कर दिया है।

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान को कर्ज की अगली किस्त देने के लिए शर्त लगाई है कि देश के सभी प्रांतों को अपने बजट को इसी वित्त वर्ष में घाटे से निकाल कर सरप्लस (बचत) में लाना होगा। प्रांतीय सरप्लस की परिभाषा इस रूप में की गई है कि प्रांतों को संघीय सरकार से जो धन मिलता है, उसमें वे बचत दिखाएं। यानी उसे पूरा खर्च ना करें।

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बीते जुलाई में शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली संघीय सरकार ने आईएमएफ के साथ जिस सहमति पत्र पर दस्तखत किए, उसमें यह शर्त शामिल थी कि प्रांतीय सरकारें मिल कर 750 अरब (पाकिस्तानी) रुपये की बचत कर वह रकम केंद्र को लौटाएंगी। खैबर पख्तूनवा प्रांत की सरकार ने भी इस दस्तावेज को स्वीकार कर लिया था। इस प्रांत में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व में गठबंधन सरकार है।

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अब खैबर पख्तूनवा ने संघीय सरकार को चिट्ठी लिख कर बताया है कि वहां की सरकार इस वर्ष अपने बजट को सरप्लस में लाने में असमर्थ है। उन्होंने आरोप लगाया है कि संघीय सरकार ने प्रांत की मुख्य चिंताओं को दूर नहीं किया, जबकि ऐसा होने की शर्त पर ही प्रांतीय सरकार आईएमएफ की शर्त मानने को तैयार हुई थी। इन चिंताओं में संघ प्रशासित कबीलाई इलाकों के लिए धन उपलब्ध कराना और कबीलाई इलाकों के लिए विशेष फंड का ट्रांसफर करना शामिल था।

विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि खैबर पख्तूनवा सरकार ने यह चिट्ठी आईएमएफ बोर्ड की बैठक से सिर्फ तीन दिन पहले संघीय सरकार को भेजी है। आईएमएफ बोर्ड की बैठक 29 अगस्त को होने वाली है, जिसमें पाकिस्तान के लिए 1.18 बिलियन डॉलर का कर्ज जारी करने पर फैसला होना है। खैबर पख्तूनवा सरकार ने यह भी कहा है कि अभी आई बारिश और बाढ़ की आपदा के कारण प्रांत को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। ऐसे में उसके लिए बचत करना और मुश्किल हो गया है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक खैबर पख्तूनवा के इस रुख के पीछे सियासी पहलू भी हैं। आईएमएफ ने जो शर्तें थोपी हैं, उनके तहत शहबाज शरीफ सरकार ने पेट्रोलियम और बिजली के दाम में भारी बढ़ोतरी की है। उसकी वजह से देश में आम महंगाई दर भी चढ़ी है। इससे लोगों में भारी असंतोष है। इसके बीच पीटीआई नहीं चाहती कि उसे भी आईएमएफ की शर्तों को लागू करवाने में सहभागी माना जाए।

आईएमएफ के साथ सहमति पत्र पर दस्तखत के बाद से पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत में 66 फीसदी और डीजल की कीमत में 92 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके अलावा आईएमएफ ने सब्सिडी में भारी कटौती की शर्त रखी है, जिसकी मार गरीब तबकों पर पड़ेगी। शरीफ सरकार की दलील है कि पाकिस्तान के सामने इन शर्तों को मानने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। जबकि खैबर पख्तूनवा सरकार के ताजा रुख से इन शर्तों पर अमल के रास्ते में बड़ी अड़चन खड़ी होती दिख रही है। इससे आईएमएफ का कर्ज प्रोग्राम खटाई में पड़ सकता है।



IMF सौदे को तोड़ने की कोशिश हो रही: शरीफ
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी पर आईएमएफ के साथ समझौते को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि खुद के फायदे के लिए राजनीति करना देश के साथ बहुत बड़ा अन्याय होगा। दरअसल, आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड ने सोमवार को यह तय करने के लिए बैठक बुलाई है कि क्या पाकिस्तान को 1.18 बिलियन अमरीकी डालर का ऋण देना चाहिए?

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