Pakistan: सियासी उथल-पुथल के अंदेशे से परेशान शहबाज शरीफ ने चली नई चाल
Pakistan: शरीफ सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को संतुष्ट करने के लिए नए टैक्स लगाए हैं। आईएमएफ ने शर्त लगा रखी है कि जब तक पाकिस्तान सरकार अपनी राजकोषीय सेहत बहाल नहीं करेती, वह मंजूर हो चुके लगभग सात बिलियन डॉलर के ऋण की किस्तें देना शुरू नहीं करेगा...
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देश में राजनीतिक उथल-पुथल की बढ़ती आशंका के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन को एकजुट रखने की कोशिश में जुट गए हैं। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेता शरीफ ने इस सिलसिले में बुधवार को पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी से लंबी बातचीत की। उसके बाद भुट्टो-जरदारी ने कहा कि पीपीपी देश के सभी राजनीतिक दलों से संपर्क करेगी, ताकि राजनीतिक व्यवहार को लेकर आम सहमति तैयार की जा सके। उन्होंने कहा- ‘हमें ऐसी आम सहमति बनानी होगी, ताकि आपसी टकराव में हम लक्ष्मण रेखा ना लांघे, तभी देश इस एक साथ आ खड़े हुए कई संकटों का सामना कर सकेगा।’
लेकिन सत्ताधारी नेताओं की यह उम्मीद पूरी होने के संकेत नहीं हैं। शहबाज शरीफ सरकार ने बुधवार को जल्दबाजी में नेशनल असेंबली की बैठक बुलाई, जिसमें मिनी बजट पेश किया गया। इसके एक दिन पहले राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने इस बजट को अध्यादेश के जरिए लागू करने से इनकार कर दिया था। मिनी बजट के जरिए सरकार ने 170 अरब रुपये का राजस्व जुटाने का प्रावधान किया है। इसका पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने जोरदार विरोध किया है। उन्होंने एलान किया है कि उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) नेशनल असेंबली में मिनी बजट का विरोध करेगी।
अर्थ जगत के जानकारों ने भी नए कर प्रस्तावों की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि इससे महंगाई और बढ़ेगी, जबकि देश के लोग पहले से ही अभूतपूर्व महंगाई झेल रहे हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव से सत्ताधारी गठबंधन के अंदर भी हलचल है। इसी को देखते हुए शहबाज शरीफ ने सहयोगी दलों के नेताओं से बातचीत शुरू की है।
शरीफ सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को संतुष्ट करने के लिए नए टैक्स लगाए हैं। आईएमएफ ने शर्त लगा रखी है कि जब तक पाकिस्तान सरकार अपनी राजकोषीय सेहत बहाल नहीं करेती, वह मंजूर हो चुके लगभग सात बिलियन डॉलर के ऋण की किस्तें देना शुरू नहीं करेगा। मिनी बजट रखने जाने के बाद इमरान खान ने वीडियो लिंक के जरिए अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नए कर प्रस्तावों से महंगाई बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सेल्स टैक्स बढ़ाया गया है, जिससे ईंधन और महंगा होगा और साथ ही लगभग सभी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ेंगी।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक सत्ताधारी नेताओं को इस बात का अंदाजा है कि हाल में बिजली और पेट्रोलियम की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब नए टैक्स लगाने के प्रस्ताव से लोगों में गुस्सा फैलेगा, जिसका फायदा पीटीआई को मिल सकता है। इसलिए अब उन्होंने आर्थिक संकट के समाधान के मामले में आम सहमति बनाने की बात की है। बिलावल भुट्टो-जरदारी ने कहा कि पीपीपी एक समिति बनाएगी, जो सभी राजनीतिक दलों से संपर्क करेगी। समिति उन दलों के सामने एक आचार संहिता और साझा एजेंडा पेश करेगी। समिति सभी दलों से अनुरोध करेगी कि वे इस पर अपनी सहमति दें, ताकि देश मौजूदा संकट से निकल सके। लेकिन इमरान खान ने यह साफ संकेत दे दिया है कि उनका ऐसी किसी आम सहमति में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है।