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पाकिस्तान: पीएम इमरान लगा रहे अमेरिका पर आरोप, लेकिन सेना प्रमुख बाजवा का निशाना रूस पर, नई कयासबाजी शुरू

Sat, 02 Apr 2022 06:56 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Amit Mandal Updated Sat, 02 Apr 2022 06:56 PM IST
सार

पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर बाजवा ने शनिवार को कहा कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को तुरंत रोका जाना चाहिए। इससे पहले पीएम इमरान लगातार कहते रहे हैं कि रूस दौरे के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। 

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Pakistan: PM Imran Khan is accusing America, but Army Chief Qamar Bajwa targets Russia
Pak Army chief Qamar Bajwa - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

रूस-यूक्रेन युद्ध का असर पूरी दुनिया पर नजर आ रहा है। यह घटना कई देशों की स्थिति को प्रभावित किया है। कहीं आर्थिक स्थिति चरमरा रही है तो कहीं घरेलू राजनीति पर असर पड़ रहा है। इस मामले में पाकिस्तान की हालात विचित्र होती जा रही है। सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा ने प्रधानमंत्री इमरान खान के रुख के उलट बयानबाजी कर दी है। बाजवा ने यूक्रेन पर रूस के हमले को तुरंत रोकने की मांग करके पीएम इमरान को दबाव में ला दिया है। एक तरफ जहां इमरान अमेरिका पर आरोप लगा रहे हैं, वहीं सेना प्रमुख बाइडन प्रशासन के सुर में सुर मिला रहे हैं।  

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जनरल बाजवा बोले, रूस की आक्रामकता को माफ नहीं किया जा सकता
पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर बाजवा ने शनिवार को कहा कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने इसे एक बड़ी त्रासदी करार दिया। इस्लामाबाद सुरक्षा वार्ता में बोलते हुए जनरल बाजवा ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर पाकिस्तान की गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि रूस की वैध सुरक्षा चिंताओं के बावजूद एक छोटे देश के खिलाफ उसकी आक्रामकता को माफ नहीं किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने लगातार युद्धविराम और शत्रुता को समाप्त करने का आह्वान किया है। हम संघर्ष का स्थायी समाधान खोजने के लिए सभी पक्षों के बीच तत्काल बातचीत का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि हजारों लोग मारे गए, लाखों शरणार्थी बन गए और यूक्रेन का आधा हिस्सा नष्ट हो गया है। 
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इस युद्ध से छोटे देशों को बंधी उम्मीदें 
साथ ही पाक सेना प्रमुख ने कहा कि इस युद्ध ने छोटे देशों को उम्मीद बंधाई है कि वे अभी भी हथियारों का आधुनिकीकरण करके बड़े देश के आक्रमण के खिलाफ अपने क्षेत्र की रक्षा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से यूक्रेन के साथ पाकिस्तान के उत्कृष्ट रक्षा और आर्थिक संबंध रहे हैं। लेकिन रूस के साथ संबंध कई कारणों से लंबे समय तक ठंडे थे। हालांकि, इस संबंध में कुछ सकारात्मक घटनाक्रम हाल ही में हुए हैं।  

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पाकिस्तान वायु सेना के विमानों के जरिए यूक्रेन को मानवीय सहायता भेजी थी और आगे भी करता रहेगा। उन्होंने आगाह किया कि संघर्ष की निरंतरता या इसके जारी रहने से किसी भी पक्ष का भला नहीं होगा। जनरल बाजवा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो खेमे हैं - एक जो विरोध की वकालत करते हैं और दूसरे जो सहयोग की वकालत करते हैं। सुरक्षा की भविष्य की दृष्टि तय की जाएगी कि कौन सा शिविर मजबूत हुआ है। मेरा मानना है कि आज दुनिया उन लोगों द्वारा बनाई गई है जो विभाजन, युद्ध-भ्रम और प्रभुत्व के बजाय सहयोग, सम्मान और समानता में विश्वास करते हैं। 

बाजवा का रुख पीएम इमरान खान के बिल्कुल उलट
बहरहाल, जनरल बाजवा का रुख संकट में पीएम इमरान खान के बिल्कुल उलट है। इमरान बहुत जोर-शोर से इस बात को उठा रहे हैं कि उनके हालिया रूस दौरे को लेकर एक बड़ा देश (अमेरिका) नाराज है। उन्होंने विपक्ष पर भी इस मुद्दे पर खुद को घेरने आरोप लगाए हैं। इमरान कह रहे हैं कि वह चर्चा करने के बाद ही रूस गए थे और अब उन पर रूस दौरे को लेकर हमला बोला जा रहा है। देश के नाम संबोधन में भी इमरान ने अमेरिका को खूब खरी-खोटी सुनाई थी। बाइडन प्रशासन पर उनकी नाराजगी साफ नजर आई थी। इमरान रूस-यूक्रेन युद्ध पर दुनिया पर छाए संकट के बादलों के बीच भारतीय विदेश नीति की भी खुलकर तारीफ कर चुके हैं। 


इसके उलट रूस-यूक्रेन युद्ध पर सेना प्रमुख बाजवा का बयान पीएम इमरान से पूरी तरह अलग है। इमरान जहां रूस के पक्ष में चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं बाजवा ने खुले तौर पर यूक्रेन के पक्ष में बयान दे दिया है। एक तरह से वह बाइडन प्रशासन की लकीर पर ही चल पड़े हैं। उधर, इमरान के रूस जाने के फैसले से अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश उससे नाराज हैं। पाकिस्तान पर भारी दबाव है। इस बीच बाजवा के बयान ने नई कयासबाजी को जन्म दे दिया है। पहले से ही संकट में घिरे इमरान के लिए बाजवा का रुख नई परेशानी खड़ी कर सकता है। इसके साथ एक बार फिर वही पुरानी कड़वा सच सामने आ रहा है कि पाकिस्तान में सेना ही अहम है और उसका रुख ही अंत में मायने रखता है। 

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