कोरोना से निपटने में फेल इमरान को सेना ने किया किनारे, खुद संभाला मोर्चा
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कोरोना वायरस के कहर से पूरी दुनिया जूझ रही है। पाकिस्तान भी इससे अछूता नहीं है। देश में अब तक 12 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 265 लोगों की मौत हो चुकी है। इस महामारी के बीच, पाकिस्तान की सेना ने एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री इमरान खान को किनारे कर दिया है। सेना प्रमुख कमर बाजवा ने खुद ही कोरोना से जंग की कमान संभाल ली है।
सेना ने 24 घंटे में ही बदला इमरान का फैसला
22 मार्च को देश को संबोधित करते हुए पाक प्रधानमंत्री ने देश में लॉकडाउन नहीं लागू करने के कारणों को बताया था। इमरान ने जोर दिया था कि लॉकडाउन से गरीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवारों को रोटी के लिए मोहताज होना पड़ेगा और लाखों लोग इससे अपनी नौकरियां खो देंगे।
पाक पीएम के इस एलान के 24 घंटे बाद ही पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने इमरान के बयानों का खंडन करते हुए 20 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले इस मुल्क में लॉकडाउन की घोषणा कर दी।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही देश में लॉकडाउन लागू किया गया। सेना ने पूरे पाकिस्तान में सैनिकों को तैनात किया और राष्ट्रीय कोर समिति के माध्यम से कोविड-19 से लड़ने के लिए काम करना शुरू किया। राष्ट्रीय कोर समिति एक निकाय है जिसे राष्ट्रीय और प्रांतीय सरकारों के बीच नीति का समन्वय करने के लिए स्थापित किया गया है।
सरकार ने कोरोना से लड़ाई में छोड़ी खाई, सेना भरने में लगी
पाकिस्तानी सेना के एक सेवानिवृत्त जनरल ने कहा कि कि सरकार ने कोरोना वायरस से लड़ने में एक बड़ी खाई छोड़ दी। अब सेना ने उस खाई को भरने की कोशिश कर रही है क्योंकि सेना के पास कोई विकल्प नहीं है।
कोरोना संकट ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि पाकिस्तान में आखिरी फैसला कौन लेता है। यह बात अब पूरी तरह साफ हो चुकी है कि इमरान को पाकिस्तान की सत्ता दिलाने में सेना का कितना बड़ा हाथ रहा है। इस कारण इमरान चाह कर भी सेना के इस फैसले को पलट नहीं सकते।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना वायरस को लेकर पाकिस्तानी सेना द्वारा उठाए जा रहे कदमों ने एक बार फिर सेना के जनरलों के सामने इमरान खान की नीतिगत विफलता को उजागर कर दिया है।
बताया जा रहा है कि क्रिकेटर से राजनेता बने 67 वर्षीय इमरान खान द्वारा कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचने में विफल होना। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट से भी पाकिस्तान को बाहर नहीं निकलवा पाना। ये कुछ मुद्दे हैं जिन्हें लेकर पाकिस्तानी सेना इमरान से बेहद नाराज है।
पीएम निर्णायक फैसले नहीं लेंगे तो फैसले कोई और करने लगेगा
पाकिस्तान की विपक्षी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) की एक सांसद नफीसा शाह ने कहा कि आपातकाल के इस समय में नेता को स्पष्ट फैसले लेने होते हैं और उन्हें लागू करवाना होता है। आपको ऐसा करने में घबराहट नहीं होनी चाहिए। यदि प्रधानमंत्री निर्णायक फैसले नहीं लेंगे तो फैसले कोई और करने लगेगा।
लॉकडाउन लागू होने के बाद भी, इमरान खान ने इसके कार्यान्वयन की आवश्यकता पर सवाल उठाना जारी रखा। वह लगातार वायरस से निपटने में देश की प्रतिक्रिया पर सवाल खड़े करते रहे। वो भी उस समय में, जब पड़ोसी भारत सहित दुनिया भर के कई देशों में ऐसे कठोर उपाय किए जा रहे हैं।
पाकिस्तानी अखबार द डॉन के अनुसार, देश में कोविड-19 के 12,657 मामले सामने आए हैं और 265 लोगों की मौत हुई हैं। पंजाब में सबसे ज्यादा मामले हैं, जहां 5,326 लोग इससे संक्रमित हैं। वहीं, इसके बाद सिंध में 4,232 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा कोरोना से संक्रमित होने के चलते, देश भर में डॉक्टरों और नर्सों द्वारा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।