Pakistan: स्वात इलाके में दहशतगर्दी बढ़ी, मलाला पर हुए हमले की याद ताजा
Pakistan: पाकिस्तान का स्वात इलाका कई दशक से आतंक पीड़ित रहा है। एक समय यहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादी संगठनों ने अपना गढ़ बना लिया था...
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पाकिस्तान में स्वात इलाके के चारबाग तहसील में हुई घटना से वहां असुरक्षा की गंभीर हो रही स्थिति की तरफ सबका ध्यान गया है। चारबाग तहसील में स्कूली बच्चों के एक वैन पर हुए हमले में ड्राइवर की मौत हो गई थी। ये मामला दूसरे कई मामलों की तरह बिना ज्यादा चर्चा के दब जाता, अगर ड्राइवर के परिजन धरने पर नहीं बैठ जाते। इन परिजनों के 40 घंटों तक चले धरने को खत्म कराने में मंगलवार को स्थानीय प्रशासन को कामयाबी मिली, लेकिन इसके साथ उस क्षेत्र में बढ़ रही हिंसा की तरफ सारे देश का ध्यान गया है।
पीड़ित लोग स्वात के डिप्टी कमिश्नर जुनैद खान के खुद मौके पर आने के बाद धरना खत्म करने पर राजी हुए। धरने पर मृत ड्राइवर के परिजनों के अलावा कुछ दूसरे स्थानीय निवासियों ने भी हिस्सा लिया था। उनमें से एक व्यक्ति ने मीडियाकर्मियों को बताया- डिप्टी कमिश्नर इस बात पर राजी हुए हुए कि ड्राइवर के वारिसों को आतंकवाद के पीड़ितों को मिलने वाला खास सहायता पैकेज दिया जाएगा। साथ ही वे इस पर सहमत हुए कि पूरे स्वात क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की जाएगी, ताकि भविष्य में आतंकवादी गतिविधियों को रोका जा सके।
पाकिस्तान का स्वात इलाका कई दशक से आतंक पीड़ित रहा है। एक समय यहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादी संगठनों ने अपना गढ़ बना लिया था। अब वे यहां उस समय की तरह मजबूत नहीं हैं। लेकिन हाल में घटी घटनाओं ने उनके फिर से सिर उठाने के संकेत दिए हैं।
स्कूली वैन पर हमला इसी सोमवार को हुआ था। उसमें ड्राइवर की मौत हो गई, जबकि दो छात्र जख्मी हुए। स्थानीय निवासियों ने इस हमले के लिए टीटीपी को जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन टीटीपी ने इस इल्जाम का खंडन किया है। इसके बावजूद तमाम पर्यवेक्षक इस और हाल में हुए ऐसे दूसरे हमलों के लिए टीटीपी को दोषी ठहरा रहे हैं। स्कूली बच्चों को निशाना बनाने का टीटीपी का पुराना रिकॉर्ड रहा है।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि मलाला युसुफजई पर स्वात इलाके में ही अक्तूबर 2012 में टीटीपी ने हमला किया था। इसके बाद मलाला को नोबेल शांति पुरस्कार मिला। चारबाग में पीड़ित परिवार के धरने पर बैठ जाने के बाद इस इलाके में कई दूसरे जगहों पर उनके समर्थन लोग सड़कों पर आ गए। उन्होंने ‘आतंकवाद का खात्मा करो’ के नारे लगाए। एक स्थानीय नेता मंजूर पश्तीन ने अखबार द डॉन से कहा- यह बड़ी अजीब बात है कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद टीटीपी ने स्वात में घुसपैठ कर ली है। इलाके में हत्याओं और फर्जी मुठभेड़ों का दौर लौट आया है।
इस घटना के विरोध में सभी प्राइवेट स्कूलों को मंगलवार को बंद रखा गया। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के आह्वान पर स्कूलों के कर्मचारियों और छात्रों ने बढ़ रही दहशतगर्दी के विरोध में प्रदर्शन में भाग लिया। एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव निसार अहमद ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा- ‘लोग बहुत गुस्से में हैं। इसीलिए 1200 स्कूल बंद रहे और उनके शिक्षकों और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।’