फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan News Imran khan government talks between TTP

पाकिस्तान: बनते-बनते क्यों बिगड़ गई इमरान सरकार की टीटीपी से बात?

Sun, 12 Dec 2021 03:01 PM IST
अजय सिंह वर्ल्ड डेस्क , अमर उजाला, इस्लामाबाद,
वर्ल्ड डेस्क , अमर उजाला, इस्लामाबाद, Published by: अजय सिंह Updated Sun, 12 Dec 2021 03:01 PM IST
सार

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने शनिवार को प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि युद्धविराम से हटने के बाद टीटीपी ने पाकिस्तान में हमले शुरू करने का फैसला किया है।

विज्ञापन
Pakistan News Imran khan government talks between TTP
इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शुक्रवार की सुबह पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी एक खास खबर में बताया कि पाकिस्तान सरकार और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बीच चल रही बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है। इस कारण दोनों पक्ष बीते नौ नवंबर से शुरू हुए एक महीने के युद्धविराम और आगे अनिश्चतकाल तक के लिए बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। लेकिन उसी शाम टीटीपी ने पाक सरकार पर तीखे आरोप लगाते हुए युद्धविराम खत्म करने का एलान कर दिया। इस खबर के बाद देश में इस बात पर कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर दोनों पक्षों के बीच चली बातचीत की सच्चाई क्या है और आखिर किस वजह से इसमें गतिरोध आया।

विज्ञापन


टीटीपी तालिबान की पाकिस्तान में सक्रिय शाखा है, जिसे बोलचाल में पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है। उसने अपने बयान में सरकार पर बातचीत की शर्तं का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। टीटीपी ने कहा कि सरकार ने कैदियों की रिहाई और वार्ता समिति के गठन के बारे में बनी सहमति का पालन नहीं किया।  
विज्ञापन


पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने शनिवार को प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि युद्धविराम से हटने के बाद टीटीपी ने पाकिस्तान में हमले शुरू करने का फैसला किया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि टीटीपी के प्रमुख मुफ्ती नूर वली महसूद ने अपने लड़ाकुओं को हमले फिर से शुरू कर देने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके पहले टीटीपी से पाकिस्तान सरकार वार्ता का दौर 2014 में चला था। लेकिन उससे कोई समाधान नहीं निकला। इस बार बातचीत की जमीन अफगानिस्तानी तालिबान के नेताओं की मध्यस्थता से बनी। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने बीते सितंबर में कहा था कि पाकिस्तान सरकार टीटीपी के उन कार्यकर्ताओं को क्षमादान दे सकती है, जो ‘आपराधिक गतिविधियों’ में शामिल ना रहे हों। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोग हथियार डाल कर पाकिस्तान के संविधान को मानते हुए नई जिंदगी शुरू कर सकते हैँ।

बताया जाता है कि पाकिस्तान सरकार अपने इसी फॉर्मूले पर आगे बढ़ रही थी। लेकिन पाकिस्तान सरकार ‘आपराधिक गतिविधियों’ या आतंकवादी गतिविधियों की जो परिभाषा लेकर चल रही थी, टीटीपी को वह मंजूर नहीं था। टीटीपी पूरे क्षमादान की मांग कर रहा था। वार्ता के दौरान पाकिस्तान सरकार ने 100 से ज्यादा लड़ाकुओं को रिहा किया। लेकिन उनमें कोई बड़ा दहशतगर्द नहीं था। संकेत हैं कि इसी बात से टीटीपी भड़क गया। उसका दावा है कि जिन नामों को छोड़ने पर सहमति बनी थी, उनमें से ज्यादातर को सरकार ने रिहा नहीं किया है।


विश्लेषकों के मुताबिक दोनों पक्षों में विवाद का एक बड़ा मुद्दा टीटीपी की यह मांग भी है कि देश में शरिया कानून लागू किया जाए। पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने इस मांग पर बातचीत करने से ही इनकार कर दिया। इन दोनों मसलों पर गुरुवार तक दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश चलती रही। लेकिन बंदियों की रिहाई और शरिया कानून लागू करने पर बातचीत के मुद्दे जहां के तहां बने रहे। इसी कारण आखिरकार बातचीत टूट गई। इससे पाकिस्तान में अचानक हिंसा का अंदेशा बेदह गहरा गया है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed