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पाकिस्तान: IMF की शर्तें मान कर क्या फंस गए हैं इमरान? कहीं मार तो नहीं ली अपने पैर पर कुल्हाड़ी
Sun, 16 Jan 2022 03:19 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sun, 16 Jan 2022 03:19 PM IST
सार
इमरान सरकार ने दो बिल पारित कराए हैं। इन्हें बोलचाल में ‘मिनी बजट’ कहा जा रहा है। यह ‘मिनी बजट’ उसके लिए अभिशाप और विपक्ष के लिए वरदान साबित हो सकता है।
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इमरान खान (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पाकिस्तान की इमरान खान सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के सामने पूरी तरह घुटने टेक देने से विपक्षी दलों को उसे घेरने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। बीते गुरुवार को पाकिस्तान सरकार ने विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच विवादित पूरक वित्तीय विधेयक को संसद से पारित करा लिया था। सदन में चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सत्ता पक्ष को दो बार मत विभाजन कराने पर मजबूर किया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि संसद में अपने आक्रामक तेवर से विपक्ष जनता तक अपना पैगाम भेजने में सफल रहा है। अब उसकी तैयारी इस मसले को सड़क पर ले जाने की है।
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क्या थी IMF की शर्तें?
इमरान सरकार ने दो बिल पारित कराए हैं। इन्हें बोलचाल में ‘मिनी बजट’ कहा जा रहा है। पहला बिल 360 अरब डॉलर के वित्तीय उपायों से संबंधित है। इसके तहत कई क्षेत्रों में बिक्री कर बढ़ जाएंगे। जबकि इनकम टैक्स में रियायतें बढ़ा दी गई हैं। दूसरे बिल के तहत स्टेट बैंक ऑफ पकिस्तान को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। ये दोनों बिल पारित कराने की शर्त आईएमएफ ने लगाई थी। इमरान सरकार के इन शर्तों पर हामी भरने के बाद ही उसने पाकिस्तान के लिए कर्ज को मंजूरी दी थी। विपक्ष का आरोप है कि पूरक वित्तीय विधेयक के जरिए आम लोगों पर बोझ बढ़ाया गया है, जबकि इनकम टैक्स में छूट देकर धनी लोगों को राहत दी गई है। नए कर से जो चीजें महंगी हो जाएंगी, उनमें दूध, चना, लाल मिर्च, आयोडीन युक्त नमक, ब्रेड, बेकरी उत्पाद आदि शामिल हैँ।
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अब खुद की मौद्रिक नीति तय करेगा स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को दी गई स्वायत्तता के तहत अब मौद्रिक नीति तय करने का अधिकार पूरी तरह से उसे दे दिया गया है। पाकिस्तान सरकार इस मामले में बैंक को कोई निर्देश नहीं दे सकेगी। बैंक के गवर्नर को अपने कामकाज में पूरी तरह स्वतंत्र बना दिया गया है। गवर्नर का कार्यकाल तीन से बढ़ा कर पांच साल कर दिया गया है। उसकी तनख्वाह बैंक का गवर्निंग बोर्ड तय करेगा। पहले बैंक के डिप्टी गवर्नर की नियुक्ति का अधिकार वित्त मंत्री को था, जो उनसे छीन लिया गया है।
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खबरों के मुताबिक आईएमएफ ने छह अरब डॉलर का कर्ज देने के बदले पांच शर्तें लगाई थीं। कर्ज की पहली किस्त जारी करने के बाद उसने कहा था कि अब ‘मिनी बजट’ पारित होने के बाद ही एक अरब डॉलर की अगली किस्त दी जाएगी।
मिनी बजट लाएगा देश में महंगाई
प्रमुख विपक्षी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज ने कहा है कि इस मिनी बजट से देश में महंगाई की लहर आ जाएगी। रोजमर्रा की जिंदगी के लिए जरूरी चीजों के दाम में तेजी से इजाफा होगा। जबकि पहले से ही देश महंगाई की मार झेल रहा है। पार्टी ने कहा है कि सरकार ने जरूरी चीजों पर से 335 अरब रुपये की टैक्स राहत वापस ले ली है, जिसकी मार गरीब लोगों पर पड़ेगी। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर जन आंदोलन खड़ा करने की चेतावनी दी है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इमरान खान सरकार पहले ही जन असंतोष का सामना कर रही है। प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में हाल में भारी गिरावट आई है। इसके बीच ‘मिनी बजट’ उसके लिए अभिशाप और विपक्ष के लिए वरदान साबित हो सकता है।