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तनाव: 1971 के बाद पहली बार बांग्लादेश पहुंचा पाक युद्धपोत, यूनुस ने स्वागत किया तो क्यों भड़क उठी देश की जनता?

Mon, 10 Nov 2025 05:31 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 10 Nov 2025 05:31 AM IST
सार

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने 1971 मुक्ति संग्राम के बाद पहली बार पहुंचे पाकिस्तानी युद्धपोत पीएनएस सैफ का स्वागत किया। यूनुस के इस कदम से देश में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारत-विरोधी यूनुस लाखों शहीदों के बलिदान का अपमान कर रहे हैं।

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Pakistan Navy chief arrives in Dhaka to bolster defence cooperation News In Hindi
बांग्लादेश पहुंचा पाकिस्तान युद्धपोत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने उस देश की सेना के लिए पलक-पावड़े बिछाने का काम किया है, जिसने मुक्ति संग्राम के दौरान लाखों बंगभाषियों को मौत के घाट उतार दिया था। हजारों मां-बहनों की अस्मिता को रौंद डाला था। 1971 के बाद पहली बार बांग्लादेश में पाकिस्तान की नौसेना के युद्धपोत का स्वागत किया गया है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि भारत विरोधी यूनुस अपनी इस हरकत के जरिये लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को जाया कर रहे हैं।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 1971 के बाद पहली बार पाकिस्तानी नौसेना का युद्धपोत पीएनएस सैफ (एफएफजी-253) शनिवार को बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह पहुंचा है। यूनुस सरकार ने पाकिस्तानी युद्धपोत का बांग्लादेश में स्वागत किया। सद्भावना यात्रा के तहत यह पाकिस्तानी युद्धपोत चार दिनों तक बांग्लादेश में रहेगा। इसे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। बांग्लादेश की नौसेना के मुताबिक, पीएनएस सैफ की कमान कैप्टन शुजात अब्बास राजा के पास है।
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चटगांव पहुंचने पर बांग्लादेशी नौसेना ने किया स्वागत
चटगांव पहुंचने से पहले बांग्लादेशी नौसेना के जहाज बीएनएस शाधीनोता ने समुद्र में ही पाकिस्तानी जहाज को औपचारिक सलामी दी और बंदरगाह तक एस्कॉर्ट किया। यात्रा के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के अधिकारी आपसी मुलाकात करेंगे और सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। पाकिस्तानी युद्धपोत की यह यात्रा 12 नवंबर को समाप्त होगी। एजेंसी
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यूनुस सरकार की पाकिस्तान से बढ़ी करीबी, भारत से तल्खी
लाखों बहादुर बंगभाषियों के बलिदान के बाद 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी मिली थी। मुक्ति संग्राम में भारत ने बांग्लादेश की मदद की थी। शेख हसीना सरकार ने 2010 में मुक्ति संग्राम के दौरान नरसंहार में शामिल पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ मुकदमा शुरू किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच तल्खी और बढ़ गई थी। 2024 में छात्र आंदोलन के दबाव में हसीना सरकार के अपदस्थ होने के बाद मोहम्मद युनूस को अंतरिम सरकार का प्रमुख चुना गया।

इसके बाद पाकिस्तान के प्रति बांग्लादेश की नीतियों में बदलाव आया है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद पाकिस्तान उन शुरुआती देशों में था, जिसने यूनुस की अंतरिम सरकार का स्वागत किया था। इसके बाद से ढाका व इस्लामाबाद के रिश्ते लगातार बेहतर हो रहे हैं, जबकि भारत व बांग्लादेश के संबंधों में तनाव बढ़ा है।

खराबी से जूझ रहा 15 साल पहले बेचा गया चीनी जहाज
चीन से 15 साल पहले खरीदे गए पीएनएस सैफ का बेस इस्लामाबाद है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल यह जहाज स्टेबलाइजर की परेशानी से जूझ रहा है। इसके कारण युद्धपोत अपने अभियान के दौरान संतुलन खो सकता है। चीन ने पाकिस्तान से इस श्रेणी के युद्धपोत के लिए छह हजार करोड़ से अधिक की धनराशि वसूली थी लेकिन अब पाकिस्तान को इसकी मरम्मत पर ही हर साल भारी भरकम रकम खर्च करनी पड़ रही है। इससे अगले युद्धपोत की संभावनाएं भी क्षीण हो गई हैं।

बांग्लादेश के थलसेना प्रमुख से मिले एडमिरल नवीन अशरफ
पाकिस्तान के नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीन अशरफ रविवार को बांग्लादेश पहुंचे, जहां उन्होंने बांग्लादेश के थलसेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान और अपने समकक्ष एडमिरल एम. नज़मुल हसन से मुलाकात की। यह दौरा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और सैन्य संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। बांग्लादेश के रक्षा मंत्रालय की मीडिया इकाई आईएसपीआर (आईएसपीआर) के अनुसार, बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, सैन्य क्षमताओं में वृद्धि और प्रशिक्षण, सेमिनार एवं पारस्परिक दौरों के जरिए सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

एडमिरल अशरफ का यह चार दिवसीय दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज पीएनएस सैफ (PNS SAIF) बांग्लादेश के प्रमुख बंदरगाह चटगांव पर एक चार दिवसीय सद्भावना यात्रा के लिए लंगर डाले हुए है।

रक्षा संबंध को समबूत करने की कोशिश
मामले में पाकिस्तान नौसेना ने बयान में कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को मजबूत करने और समुद्री सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ढाका पहुंचने पर बांग्लादेशी नौसेना प्रमुख ने अशरफ का स्वागत किया। इस दौरान बांग्लादेश नौसेना के एक दस्ते ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। एडमिरल अशरफ ने 1971 के मुक्ति संग्राम में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और ढाका कैंटोनमेंट स्थित ‘शिखा अनिर्बाण’ स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।

बैठक में दोनों नौसेना प्रमुखों के अलावा पाकिस्तानी नौसेना प्रतिनिधिमंडल, पाकिस्तान के उच्चायुक्त और बांग्लादेश नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। बता दें कि  एडमिरल अशरफ का यह दौरा दो सप्ताह बाद हुआ है जब पाकिस्तान के संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष जनरल साहिर शामशाद मिर्ज़ा ने बांग्लादेश का दौरा किया था और अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस सहित तीनों सेनाओं के प्रमुखों से मुलाकात की थी।

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