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पश्चिम एशिया संकट: क्या दोहरा गेम खेल रहा पाकिस्तान? ईरान युद्ध में PAK की मध्यस्थता पर अमेरिका को भी शक

Tue, 12 May 2026 10:14 AM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: अमन तिवारी Updated Tue, 12 May 2026 10:14 AM IST
सार

पश्चिम एशिया संकट के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर अमेरिकी प्रशासन का शक गहरा गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जबकि वॉशिंगटन में इस बात पर चिंता है कि पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संदेशों को अलग-अलग तरीकों से पेश कर रहा है। 

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अमेरिका-ईरान झंडा - फोटो : एएनआई

विस्तार

पश्चिम एशिया के संघर्ष में पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन उसकी इस भूमिका पर अब अमेरिकी प्रशासन को गहरा शक होने लगा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान दोहरी चाल चल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसे पाकिस्तान ने उन तक पहुंचाया था। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दौर की मेजबानी भी पाकिस्तान ने ही की थी।
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अमेरिका को पाक की मध्यस्थता पर शक
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के करीबी लोग ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर चिंतित हैं। अमेरिकी प्रशासन को लगता है कि पाकिस्तान शांति प्रक्रिया को लेकर ट्रंप की नाराजगी को ईरान तक सही ढंग से नहीं पहुंचा रहा है। अधिकारियों का यह भी मानना है कि पाकिस्तान ईरान के पक्ष को हकीकत से ज्यादा सकारात्मक बनाकर अमेरिका के सामने पेश कर रहा है।
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पाकिस्तान का डबल गेम
इस बीच, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट ने पाकिस्तान के इस डबल गेम का एक और सबूत दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने चुपके से ईरानी सैन्य विमानों को अपने हवाई अड्डों पर रुकने की इजाजत दी। ऐसा शायद इन विमानों को अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए किया गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल की शुरुआत में जब ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम की घोषणा की थी, उसके कुछ ही दिनों बाद ईरान ने पाकिस्तान के 'नूर खान एयर बेस' पर कई विमान भेजे थे। इनमें ईरानी वायुसेना का एक खुफिया विमान 'आरसी-130' भी शामिल था।
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ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के हालिया बयानों ने भी इस अविश्वास को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास कई विकल्प हैं। वे सम्मान के साथ बातचीत कर सकते हैं या फिर युद्ध का रास्ता चुन सकते हैं। पेजेश्कियान ने सैन्य शक्ति के दम पर कूटनीति करने की बात कही है।

क्या है ट्रंप की प्रतिक्रिया?
वहीं, ट्रंप ने ईरान के रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को कचरा बताया और कहा कि उन्होंने इसे पूरा पढ़ा तक नहीं। ट्रंप के अनुसार, ईरान इस समय सबसे कमजोर स्थिति में है और मौजूदा युद्धविराम अब खत्म होने की कगार पर है। ईरान को मिलिट्री तौर पर हराए जाने के अपने दावों को दोहराते हुए, ट्रंप ने कहा कि सीजफायर के समय में ईरान ने जो भी थोड़ा बहुत बनाया था, अमेरिका उसे एक दिन में ही तबाह कर देगा। इस सबके बीच, अब ट्रंप चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने बीजिंग जा रहे हैं। माना जा रहा है कि अब पश्चिम एशिया में शांति के लिए चीन एक मुख्य भूमिका निभा सकता है।

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