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Putin on Pakistan: दो दशक बाद सामने आई पुतिन-बुश की गुप्त बातचीत, PAK के परमाणु हथियारों को लेकर दी थी चेतावनी
Thu, 25 Dec 2025 11:10 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Thu, 25 Dec 2025 11:10 PM IST
सार
Vladimir Putin On Pakistan: रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने 2001 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से बातचीत में पाकिस्तान को बिना लोकतंत्र वाला देश बताया था। अब सार्वजनिक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि दोनों नेता पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम और सैन्य शासन को वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानते थे।
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पुतिन।
- फोटो : PTI
विस्तार
दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच हुई बातचीत के पुराने दस्तावेज जब सार्वजनिक होते हैं, तो कई छिपी सच्चाइयां सामने आती हैं। ऐसा ही एक खुलासा अब सामने आया है, जिसमें रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने पाकिस्तान को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। यह बातचीत अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बुश के साथ हुई थी, जिसके ट्रांसक्रिप्ट अब सार्वजनिक किए गए हैं।
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ये दस्तावेज 'नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव' के जरिए सामने आए हैं, जिनमें 2001 से 2008 के बीच पुतिन और बुश के बीच बैठकों और फोन कॉल्स का ब्योरा है। बातचीत में पुतिन ने साफ कहा था कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जहां लोकतंत्र नहीं है और सत्ता सेना के हाथ में है, लेकिन इसके बावजूद उसके पास परमाणु हथियार हैं। उन्होंने इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया।
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2001 की पहली मुलाकात में जताई चिंता
16 जून 2001 को स्लोवेनिया में पुतिन और बुश की पहली आमने-सामने मुलाकात हुई थी। इसी दौरान पुतिन ने कहा था कि पाकिस्तान केवल एक सैन्य शासन है, जिसे परमाणु हथियार मिल गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी देश पाकिस्तान की आलोचना नहीं करते, जबकि उसे लोकतांत्रिक मानकों पर परखना चाहिए।
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भारत की पुरानी आशंकाओं से मेल
पुतिन की यह टिप्पणी भारत के उस रुख से मेल खाती है, जो वह दशकों से पाकिस्तान को लेकर रखता आया है। भारत लगातार पाकिस्तान के परमाणु प्रसार रिकॉर्ड और आतंकी संगठनों से उसके रिश्तों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चिंता जताता रहा है। पुतिन की बातों ने इन आशंकाओं को वैश्विक स्तर पर और मजबूती दी।
बुश का नजरिया और आपसी भरोसा
इन वार्ताओं में बुश ने रूस को पश्चिमी दुनिया का हिस्सा बताया था और कहा था कि रूस कोई दुश्मन नहीं है। बाद में बुश का यह बयान भी काफी चर्चित हुआ था कि उन्होंने पुतिन की आंखों में झांककर उनकी आत्मा को समझा और उन्हें भरोसेमंद पाया। इससे उस दौर में अमेरिका-रूस रिश्तों की दिशा का भी अंदाजा मिलता है।
परमाणु अप्रसार पर गहरी चिंता
दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट होता है कि अमेरिका और रूस दोनों पाकिस्तान को परमाणु अप्रसार के लिहाज से एक बड़ी चुनौती मानते थे। तत्कालीन सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के नेतृत्व में पाकिस्तान को अस्थिर और जोखिम भरा माना गया। यह चिंता आज भी कई देशों के लिए प्रासंगिक बनी हुई है।
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