Pakistan: इमरान के गले में अब कानूनी फंदा, रैली से ठीक पहले शरीफ सरकार ने चला दांव
शरीफ सरकार ने कहा है कि इमरान खान के नेतृत्व वाली पूर्व पाकिस्तान तहरीक-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के कुप्रबंधन के कारण देश ऊर्जा संकट में फंसा। इसके अलावा इमरान खान लगातार ‘तटस्थ’ लोगों से हस्तक्षेप करने की अपील करते रहे हैं, जो संविधान की धारा-6 का उल्लंघन है...
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इमरान खान के सरकार विरोधी नए अभियान से ठीक पहले पाकिस्तान सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री के गले में कानूनी फंदा डालने की चाल चली है। इमरान खान शनिवार को इस्लामाबाद के परेड ग्राउंड में विशाल सरकार विरोधी रैली करेंगे। इस बार उन्होंने देश में तेजी से बढ़ी महंगाई और जरूरी चीजों के अभाव को अपना मुख्य मुद्दा बनाया है। इसी बीच शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार ने इमरान खान पर ‘संविधान के उल्लंघन’ और ‘कुप्रबंधन’ का आरोप लगाते हुए इसकी जांच के लिए एक आयोग के गठन की घोषणा कर दी है।
ऊर्जा संकट के पीछे इमरान
शरीफ सरकार ने कहा है कि इमरान खान के नेतृत्व वाली पूर्व पाकिस्तान तहरीक-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के कुप्रबंधन के कारण देश ऊर्जा संकट में फंसा। इसके अलावा इमरान खान लगातार ‘तटस्थ’ लोगों से हस्तक्षेप करने की अपील करते रहे हैं, जो संविधान की धारा-6 का उल्लंघन है। इमरान खान सेना नेतृत्व को ‘न्यूट्रल्स’ यानी तटस्थ कह कर संबोधित करते रहे हैं। इमरान खान के खिलाफ जांच आयोग के गठन का एलान सूचना और प्रसारण मंत्री मरियम औरंगजेब ने एक प्रेस कांफ्रेंस में किया। उस समय उनके साथ पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के वरिष्ठ नेता शाहिद खकन अब्बासी और एहसान इकबाल भी मौजूद थे।
औरंगजेब ने आरोप लगाया कि बीते मार्च में तत्कालीन पीटीआई सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव को नेशनल असेंबली में रद्द करवाने के लिए इमरान खान ने संविधान विरोधी तरीकों का सहारा लिया। उनके दबाव में ही तत्कालीन डिप्टी स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव को मतदान से पहले ही खारिज कर दिया था। प्रस्तावित आयोग उस प्रकरण की भी जांच करेगा। पीएमएल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अब्बासी ने कहा- ‘आयोग गठन का मकसद पीटीआई सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करना है।’
इस बीच शनिवार को होने वाली पीटीआई की रैली को देखते हुए यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने रैली के आयोजन के लिए पीटीआई के सामने 39 शर्तें रखीं। पीटीआई के उन सबको स्वीकार कर लेने के बाद उसे परेड ग्राउंड में रैली करने की इजाजत दी गई है। इन शर्तों में यह भी शामिल है कि अगर रैली के दौरान कोई गड़बड़ी हुई या प्रशासन की तरफ से रखी गई किसी शर्त का उल्लंघन हुआ, तो उसके लिए पीटीआई का नेतृत्व जिम्मेदार होगा।
पीटीआई का दावा, जन समर्थन से डरी सरकार
हालांकि स्थानीय प्रशासन ने रैली की इजाजत दे दी है, लेकिन गुरुवार रात तक पीटीआई को सेना हेडक्वार्टर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया था। परेड ग्राउंड में रैली के लिए सेना मुख्यालय से एनओसी प्राप्त करना जरूरी होता है। प्रशासन ने जैसी सख्त शर्तें लगाई हैं, हाल में उसकी मिसाल नहीं रही है। इनमे यह शामिल है कि रैली के कारण किसी अन्य नागरिक के मूल अधिकार में बाधा नहीं डाली जाएगी। साथ ही रैली को रात 12 बजे के पहले खत्म कर लिया जाएगा। प्रशासन ने रैली स्थल के चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला किया है। साथ ही वहां सुरक्षा बलों की जबर्दस्त तैनाती की जाएगी। पीटीआई का दावा है कि उसे मिल रहे विशाल जन समर्थन से सरकार डर गई है। इसीलिए उसने रैली को नियंत्रित करने के असाधारण कदम उठाए हैं।