Pakistan: सेना की कलई खोलने का जोखिम मोल लिया इमरान ने, बाजवा पर लगाए गंभीर आरोप
Pakistan: अखबार डॉन को दिए इंटरव्यू में इमरान खान ने कहा कि 2018 का चुनाव उन्होंने माफिया की जवाबदेही तय करने, प्रभावशाली लोगों को कानून के दायरे में लाने, और भ्रष्टाचार खत्म करने के वादे पर लड़ा था, लेकिन इसी मुद्दे पर सेना से संबंध बिगड़ गए...
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान इन दिनों सेना के साथ अपने बिगड़े संबंधों पर गंभीर मंथन कर रहे हैं। इस बात की चर्चा करने से भी वे अब नहीं हिचक रहे हैं। यह बात एक अखबार को दिए उनके इंटरव्यू से जाहिर हुई है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही सेना के साथ उनके संबंधों मे कड़वाहट आ गई। इसकी वजह सरकार के कामकाज में सेना प्रमुख का बेजा दखल था।
खान ने कहा कि सेना के बारे में वे सोचते थे, वह सच नहीं निकला। उन्होंने कहा- ‘मुझे इस बात का हमेशा अहसास था कि सेना इतनी शक्तिशाली और संगठित है कि जब कभी मैं देश में कानून का राज स्थापित करने की कोशिश करूंगा, सेना उसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।’ लेकिन खान ने कहा कि असल में एस्टेब्लिशमेंट (सेना और खुफिया तंत्र के नेतृत्व) का अलग ही रुख सामने आया।
अखबार डॉन को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान ने कहा कि 2018 का चुनाव उन्होंने माफिया की जवाबदेही तय करने, प्रभावशाली लोगों को कानून के दायरे में लाने, और भ्रष्टाचार खत्म करने के वादे पर लड़ा था। तीन साल के अपने शासनकाल के दौरान यही उनका मिशन रहा। लेकिन इसी मुद्दे पर सेना से संबंध बिगड़ गए। उन्होंने कहा कि खास लोगों की जवाबदेही तय करने के लिए बनाए गए नेशनल एकाउंटिबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) उनके नियंत्रण में नहीं था।
खान ने कहा- ‘एनएबी पर सेना का नियंत्रण था। इसमें मैं कुछ नहीं कर पाया। वे कहते थे कि हां, मामले हैं और हम इसे देख रहे हैं। लेकिन कुछ नहीं होता था। मैंने पाया कि एस्टेब्लिशमेंट का एनएबी पर नियंत्रण था और जैसा वो चाहता था, ये एजेंसी वैसी ही काम करती थी।’
द डॉन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इमरान खान के निवास पर तकरीबन तीन दर्ज पुलिसकर्मी तैनात हैं। लेकिन घर के अंदर वे लगभग अकेले हैं। वो दिन गुजर चुके हैं, जब वहां नामी और रसूखदार लोगों का जमावड़ा लगा रहता था।
इमरान खान ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपी लोगों को सज़ा दिलाने में लगातार मिल रही नाकामी पहली वजह बनी, जिससे सेना से उनके संबंधों में बिगाड़ आना शुरू हुआ। दूसरा विवाद पंजाब के मुख्यमंत्री की नियुक्ति को लेकर खड़ा हुआ। उन्होंने कहा- ‘सेना प्रमुख चाहते थे कि मैं अलीम खान को मुख्यमंत्री बनाऊं। मैं इसके लिए तैयार नहीं हुआ, क्योंकि उनके खिलाफ एनएबी में मुकदमा चल रहा था। अलीम खान ने करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जा जमा कर उसे बेचा था।’
पूर्व प्रधानमंत्री ने सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा का नाम लेकर कहा कि उन्होंने अलीम खान को मुख्यमंत्री बनाने को कहा था। उनकी बात ना मानने से संबंध बिगड़ने लगे। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये गंभीर आरोप हैं। पाकिस्तान में ऐसा पहली बार हुआ है, जबकि किसी पूर्व सत्ताधारी नेता ने एस्टेब्लिशमेंट की इस तरह कलई खोली हो। ऐसा करके इमरान खान ने एस्टेब्लिशमेंट को कठघरे में खड़ा कर दिया है। लेकिन साथ ही उन्होंने बड़ा जोखिम मोल लिया है। इसकी भारी कीमत उन्हें चुकानी पड़ सकती है।