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पाकिस्तान: शाहबाज शरीफ के लिए तो ‘बारूदी सुरंग’ बिछा गए हैं इमरान खान! आईएमएफ से कर्ज पाना भी हुआ मुश्किल

Fri, 15 Apr 2022 04:01 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 15 Apr 2022 04:01 PM IST
सार

विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की नई शाहबाज शरीफ सरकार ने अगर देश की वित्तीय और आर्थिक नीतियों में तुरंत बड़े बदलाव नहीं किए, तो आईएमएफ से और कर्ज मिलना मुश्किल दिखता है। जबकि आईएमएफ के अलावा कोई दूसरा स्रोत नहीं है, जो पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा समस्या को हल करने मे सहायक हो।

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Pakistan: Imran Khan has laid a landmine for Shahbaz SharifDifficult to get loan from IMF
शहबाज शरीफ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

क्या मौजूदा हाल में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज की बाकी किश्तें मिल पाएंगी? देश की गंभीर वित्तीय स्थिति को देखते हुए ये सवाल बेहद अहम हो गया है। पाकिस्तान को हर महीने जरूरी आयात करने के लिए छह बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है। फिलहाल उसके विदेशी मुद्रा भंडार में 11.32 बिलियन डॉलर ही हैं, यानी पाकिस्तान के पास दो महीने का आयात बिल चुकाने लायक विदेशी मुद्रा भी नहीं है।

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विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की नई शाहबाज शरीफ सरकार ने अगर देश की वित्तीय और आर्थिक नीतियों में तुरंत बड़े बदलाव नहीं किए, तो आईएमएफ से और कर्ज मिलना मुश्किल दिखता है। जबकि आईएमएफ के अलावा कोई दूसरा स्रोत नहीं है, जो पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा समस्या को हल करने मे सहायक हो। पाकिस्तान ने चीन और संयुक्त अरब अमीरात से 2.2 बिलियन डॉलर के कर्ज लिए हैं, लेकिन इससे फौरी राहत ही मिली है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक आईएमएफ से कर्ज पाने के लिए जरूरी है कि पाकिस्तान अपने यहां ऊर्जा सब्सिडी को खत्म करे और राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स में बढ़ोतरी करे। सिंगापुर स्थित एस राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में सीनियर फेलॉ जेम्स डॉर्सी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने पद से हटने से पहले जिस तरह के गंभीर आरोप अमेरिका पर लगाए, उससे पाकिस्तान के लिए आईएमएफ से कर्ज पाना और कठिन हो गया है। आईएमएफ के फैसलों में अमेरिका की बड़ी भूमिका रहती है। डोर्सी के मुताबिक ऐसे संकेत हैं कि इमरान खान के आरोप को पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर समर्थन मिल रहा है। इससे अमेरिका के कान खड़े हो गए हैं। हालांकि, अमेरिका यह भी समझता है कि पाकिस्तान में जो हो रहा है, वह उसकी घरेलू राजनीति का हिस्सा है। 
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दूसरे विशेषज्ञों का भी कहना है कि फिलहाल पाकिस्तान के सामने आर्थिक के साथ-साथ कड़ी कूटनीतिक चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। अमेरिका स्थित थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में दक्षिण एशिया केंद्र के निदेशक उजैर युनूस ने कहा है कि इमरान खान के षड्यंत्र के आरोप के गंभीर परिणाम होंगे। शाहबाज शरीफ के पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री जो बारूदी सुरंग बिछा गए हैं, उसकी महंगी कीमत वर्तमान प्रधानमंत्री को चुकानी होगी।

युनूस ने कहा कि अगर शरीफ सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर से सब्सिडी हटाई, तो देश में महंगाई तेजी से बढ़ेगी। लेकिन अगर उसने सब्सिडी नहीं हटाई, तो संभवतः आईएमएफ कर्ज की अगली किश्तें जारी नहीं करेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक शाहबाज शरीफ के सामने चुनौती यह भी है कि वे अमेरिका से कैसे इस रूप में संबंध सुधारें, जो चीन को नागवार ना गुजरे। डोर्सी ने कहा कि अमेरिका से संबंध सुधारने और चीन से रिश्तों को पहले की तरह बरकरार रखने के लिए अति बुद्धिमानी की जरूरत होगी।


विशेषज्ञों के मुताबिक प्रधानमंत्री शरीफ के बड़े भाई नवाज शरीफ जब प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने चीन के साथ उच्चस्तरीय आर्थिक संबंध कायम किया था। उसी दौर में चीन पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरीडोर के निर्माण पर काम शुरू हुआ। बाद में इमरान खान के दौर में ये परियोजना तेजी से आगे बढ़ी। लेकिन जहां शरीफ ने अमेरिका के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखा था, इमरान खान ने इस रिश्ते में कड़वाहट पैदा कर दी है। अब इसे दूर करने की चुनौती शाहबाज शरीफ के सामने है।

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