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Pakistan: पाकिस्तान की हाईकोर्ट से न्यूज चैनल को राहत, गृह मंत्रालय के नोटिस को सस्पेंड करने का आदेश
Sun, 14 Aug 2022 07:48 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 14 Aug 2022 07:48 PM IST
सार
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी शाहबाज गिल ने 'एआरवाई न्यूज' को एक इंटरव्यू दिया था जिसके बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुक्रवार को समाचार चैनल का प्रसारण परमिट रद्द कर दिया।
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शहबाज शरीफ
- फोटो : facebook/ShehbazSharif
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विस्तार
पाकिस्तान की एक शीर्ष अदालत ने लोकप्रिय टेलीविजन स्टेशन 'एआरवाई न्यूज' को अस्थायी राहत प्रदान की है। गृह मंत्रालय ने कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में इसके संचालन पर प्रतिबंध लगाने वाला नोटिस जारी किया था। अदालत ने इस नोटिस को 17 अगस्त तक के लिए निलंबित कर दिया है।
दरअसल पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी शाहबाज गिल ने 'एआरवाई न्यूज' को एक इंटरव्यू दिया। इसके बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुक्रवार को 'एआरवाई न्यूज' के प्रसारण परमिट को रद्द कर दिया।
गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह ने आरोप लगाया कि सोमवार को प्रसारित किया गया साक्षात्कार पाकिस्तान की ताकतवर सेना को बदनाम करने के लिए सुनियोजित कदम था।
उच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया
देश के एक प्रमुख अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सिंध उच्च न्यायालय ने शनिवार को गृह सचिव, पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पीईएमआरए) के अध्यक्ष और अन्य प्रतिवादियों को 17 अगस्त को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया।
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'एआरवाई न्यूज' प्रबंधन ने शनिवार को उच्च न्यायालय में एक मुकदमा दायर किया जिसमें 11 अगस्त को जारी गृह मंत्रालय के नोटिस को चुनौती दी गई थी।
वकील ने बताया कि उच्च न्यायालय ने 10 अगस्त को पीईएमआरए को 'एआरवाई न्यूज' के प्रसारण को बहाल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने 17 अगस्त तक चैनल के लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने से रोक दिया है। उन्होंने कहा उस आदेश का पालन नहीं किया गया और इसके बजाय मंत्रालय ने पीईएमआरए को नोटिस जारी किया।
गृहमंत्रालय के नोटिस में लगाया गया ये आरोप
'एआरवाई न्यूज' को पीईएमआरए से एक नोटिस जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि चैनल को आपत्तिजनक, घृणास्पद, देशद्रोही सामग्री प्रसारित करने के लिए बंद कर दिया गया है। नोटिस में कहा गया था कि चैनल दुर्भावनापूर्ण इरादे से सरकार और सशस्त्र बलों के बीच दरार पैदा करने वाली दुष्प्रचार पर आधारित सामग्री प्रसारित कर रहा था।
रिहा किए गए समाचार निदेशक अम्माद यूसुफ
चैनल के समाचार निदेशक अम्माद यूसुफ को भी साक्षात्कार के बाद हिरासत में ले लिया गया था लेकिन अंतराराष्ट्रीय मीडिया रक्षकों, अधिकार रक्षकों और विपक्षी नेताओं के विरोध के बाद गुरुवार को उन्हें रिहा कर दिया गया।
इस बीच, मीडिया निकायों ने 'एआरवाई न्यूज' पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के कदम की आलोचना की है और अधिकारियों से चैनल को बहाल करने की मांग की है।
पाकिस्तान ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने चिंता जताई
पाकिस्तान ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (पीबीए) ने 'एआरवाई न्यूज' के लिए एनओसी रद्द करने के बारे में चिंता व्यक्त की और एक बयान में अधिकारियों से उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने और चैनल को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका देने को कहा।
बयान में कहा गया, "पीबीए ने हमेशा संविधान के मानकों के भीतर जिम्मेदार पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन किया है। पाकिस्तान के माननीय सर्वोच्चन न्यायालय द्वारा समर्थित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आचार संहिता के किसी भी उल्लंघन से कानूनी प्रक्रिया का पालन करके निपटा जाना चाहिए।"
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के अध्यक्ष अफजल बट और महासचिव अरशद अंसारी ने एक संयुक्त बयान में कहा कि सरकार ने 12 अगस्त को शाम 7 बजे तक टीवी को बहाल करने के सिंध उच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी की है।
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दरअसल पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी शाहबाज गिल ने 'एआरवाई न्यूज' को एक इंटरव्यू दिया। इसके बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुक्रवार को 'एआरवाई न्यूज' के प्रसारण परमिट को रद्द कर दिया।
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गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह ने आरोप लगाया कि सोमवार को प्रसारित किया गया साक्षात्कार पाकिस्तान की ताकतवर सेना को बदनाम करने के लिए सुनियोजित कदम था।
उच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया
देश के एक प्रमुख अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सिंध उच्च न्यायालय ने शनिवार को गृह सचिव, पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पीईएमआरए) के अध्यक्ष और अन्य प्रतिवादियों को 17 अगस्त को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया।
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'एआरवाई न्यूज' प्रबंधन ने शनिवार को उच्च न्यायालय में एक मुकदमा दायर किया जिसमें 11 अगस्त को जारी गृह मंत्रालय के नोटिस को चुनौती दी गई थी।
वकील ने बताया कि उच्च न्यायालय ने 10 अगस्त को पीईएमआरए को 'एआरवाई न्यूज' के प्रसारण को बहाल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने 17 अगस्त तक चैनल के लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने से रोक दिया है। उन्होंने कहा उस आदेश का पालन नहीं किया गया और इसके बजाय मंत्रालय ने पीईएमआरए को नोटिस जारी किया।
गृहमंत्रालय के नोटिस में लगाया गया ये आरोप
'एआरवाई न्यूज' को पीईएमआरए से एक नोटिस जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि चैनल को आपत्तिजनक, घृणास्पद, देशद्रोही सामग्री प्रसारित करने के लिए बंद कर दिया गया है। नोटिस में कहा गया था कि चैनल दुर्भावनापूर्ण इरादे से सरकार और सशस्त्र बलों के बीच दरार पैदा करने वाली दुष्प्रचार पर आधारित सामग्री प्रसारित कर रहा था।
रिहा किए गए समाचार निदेशक अम्माद यूसुफ
चैनल के समाचार निदेशक अम्माद यूसुफ को भी साक्षात्कार के बाद हिरासत में ले लिया गया था लेकिन अंतराराष्ट्रीय मीडिया रक्षकों, अधिकार रक्षकों और विपक्षी नेताओं के विरोध के बाद गुरुवार को उन्हें रिहा कर दिया गया।
इस बीच, मीडिया निकायों ने 'एआरवाई न्यूज' पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के कदम की आलोचना की है और अधिकारियों से चैनल को बहाल करने की मांग की है।
पाकिस्तान ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने चिंता जताई
पाकिस्तान ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (पीबीए) ने 'एआरवाई न्यूज' के लिए एनओसी रद्द करने के बारे में चिंता व्यक्त की और एक बयान में अधिकारियों से उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने और चैनल को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका देने को कहा।
बयान में कहा गया, "पीबीए ने हमेशा संविधान के मानकों के भीतर जिम्मेदार पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन किया है। पाकिस्तान के माननीय सर्वोच्चन न्यायालय द्वारा समर्थित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आचार संहिता के किसी भी उल्लंघन से कानूनी प्रक्रिया का पालन करके निपटा जाना चाहिए।"
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के अध्यक्ष अफजल बट और महासचिव अरशद अंसारी ने एक संयुक्त बयान में कहा कि सरकार ने 12 अगस्त को शाम 7 बजे तक टीवी को बहाल करने के सिंध उच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी की है।