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पाकिस्तान: बड़े बदलाव की तैयारी में इमरान खान, पीएम के फैसले पर भड़के पाकिस्तानी

Sat, 29 May 2021 12:42 PM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sat, 29 May 2021 12:42 PM IST
सार

इमरान सरकार पहले चरण में प्राइमरी स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों को शामिल किया गया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की इस योजना के तहत कुरान का अनुवाद पढ़ना, नमाज और हदीस (पैगंबर मोहम्मद के उपदेश और काम) को सीखना अनिवार्य किए जाने की योजना है।

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Pakistan: Government attempts to Islamize mainstream curriculum, uniform education system  schools universities  PM Imran khan
इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

आर्थिक तंगी और कोरोना महामारी से जूझ रही पाकिस्तान की सरकार पूरे देश में एक समान शिक्षा प्रणाली लागू करने की तैयारी में है। इमरान सरकार के इस फैसले से स्कूलों और विश्वविद्यालयों के इस्लामीकरण की आशंका बढ़ गई है। इमरान सरकार पहले चरण में प्राइमरी स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों को शामिल करेंगी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की इस योजना के तहत कुरान का अनुवाद पढ़ना, नमाज और हदीस (पैगंबर मोहम्मद के उपदेश और काम) को सीखना अनिवार्य किए जाने की योजना है।

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इमरान सरकार के शिक्षा प्रणाली में इस बदलाव के तहत यह भी सुनिश्चित किया जाना है कि प्रत्येक स्कूल और कॉलेज को इन विषयों को पढ़ाने के लिए हाफिज (कुरान को कंठस्थ करने वाला व्यक्ति) और कारी (कुरान पढ़ने वाला) की नियुक्त करनी है। इमरान सरकार के इस फैसले पर आलोचकों का मानना है कि नई शिक्षा प्रणाली से पाकिस्तान में इस्लामिक मौलवियों का प्रभाव और सांप्रदायिकता बढ़ेगी, जिससे सामाजिक ताने-बाने को बहुत नुकसान होगा।
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कुरान के 30 चैप्टर पढ़ने जरूरी होंगे 
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद में अकादमिक क्षेत्र से जुड़े अब्दुल हमीद नैय्यर ने बताया कि नई शिक्षा प्रणाली के तहत उर्दू, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान का भारी इस्लामीकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि इस्लामिक अध्ययन के अलावा छात्रों को कुरान के 30 चैप्टर पढ़ने जरूरी होंगे। बाद में उन्हें यह पूरी किताब भी पढ़नी होगीं अब्दुल हमीद नैय्यर ने बताया कि आलोचनात्मक सोच आधुनिक ज्ञान का मूल सिद्धांत है, लेकिन सरकार पाठ्यक्रम के माध्यम से ऐसे विचारों को बढ़ावा दे रही है, जो इसके विपरीत हैं।

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इस्लामी ताकतों के आगे झुका पाकिस्तान

दरअसल में वर्ष 1947 में पाकिस्तान के निर्माण के बाद से सरकार और इस्लामी रूढ़िवादियों के बीच सांठगांठ हो रही है। वर्ष 1950 और 60 दशक में पाकिस्तान में इस्लामीकरण की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू हुई, लेकिन 1970 के दशक में जनरल जिया-उल-हक की तानाशाही के दौर में यह प्रक्रिया और तेज हो गई। वहीं 1980 के दशक में इसने रफ्तार पकड़ी।

बता दें कि जिया-उल-हक ने संविधान के ढांचे को बदलने के लिए एक जोरदार अभियान चलाया था। उन्होंने इस्लामिक कानून भी पेश किए, शैक्षिक पाठ्यक्रमों का इस्लामीकरण किया, देश भर में हजारों धार्मिक मदरसे खोले, इस्लामवादियों को न्यायपालिका, नौकरशाही और सेना में शामिल किया और सरकारी मामलों की देखरेख के लिए मौलवियों की अध्यक्षता में संस्थान बनाए। वर्ष 1988 में उनकी मृत्यु के बाद से लगभग सभी सरकारों ने इस्लामीकरण के माध्यम से धार्मिक ताकतों को खुश रखने की कोशिश की है।

आधुनिक शिक्षा का वादा कर..हाथ में थमाई जा रही कुरान

पाकिस्तान की मौजूदा इमरान खान सरकार पर भी इस्लामिक कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेकने के आरोप लग रहे हैं। स्कूलों का मदरसाकरण किया जा रहा है। वर्ष 2018 में इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने एक समान शिक्षा प्रणाली शुरू करने का वादा किया था। कई लोगों को उम्मीद थी कि नए पाठ्यक्रम में विज्ञान, कला, साहित्य और अन्य समकालीन विषयों पर जोर होगा।

इमरान खान की सरकार ने वर्ष 2019 में शिक्षा को लेकर अपनी एक योजना के बारे में बताया। इसमें इस्लामीकृत पाठ्यक्रम पर बहुत अधिक ध्यान दिया गया है। बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के कारण नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन में देरी हुई ,लेकिन अब इसे इस साल शुरू होने की उम्मीद है।

नई शिक्षा नीति पर भड़के पाकिस्तानी, कहा- लोग हो जाएंगे बेरोजगार

इमरान सरकार की ओर से लाई जा रही नई शिक्षा नीति को कई लोगों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। लाहौर के मानवाधिकार कार्यकर्ता पीटर जैकब ने बताया कि अनिवार्य विषयों में लगभग 30-40 फीसदी सामग्री धार्मिक प्रकृति की है। उन्होंने बताया कि कई लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है क्योंकि यह संविधान के खिलाफ है। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी। जैकब ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्य यह नहीं मानते कि ऐसा पाठ अनिवार्य विषयों में होना चाहिए।

लोग बोले- शिक्षा के नाम पर धार्मिक सामग्री रटाई जा रही
नया पाठ्यक्रम पाकिस्तान की शिक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है, जो पहले कभी नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि नए पाठ्यक्रम में ऐसे-ऐसे बदलाव किए गए हैं, जो जिया-उल-हक के शासनकाल में हुए बदलावों से कहीं ज्यादा खतरनाक साबित होने वाले हैं। सिलेब्स का बारीक विश्लेषण करने से पता चलता है कि मदरसों की तुलना में पब्लिक स्कूलों में कहीं अधिक धार्मिक सामग्री को पाठ्यक्रम में थोपा गया। धार्मिक सामग्री को रटने पर जोर दिया गया है।

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