पाकिस्तान ने दी तालिबानियों को नसीहत: बोला- अपने लोगों का भरोसा जीतना और वादा पूरा करना जरूरी
इमरान खान ने तालिबान सरकार को सलाह दी कि वह अफगान लोगों के भीतर से ये खौफ निकालने की कोशिश करे कि अब वहां आतंकवादियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने ये भी एलान किया कि पाकिस्तान हमेशा एक स्थाई, स्थिर और संप्रभु अफगानिस्तान के साथ खड़ा रहेगा...
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पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ये बताने की कोशिश कर रहा है कि वह तालिबान सरकार पर लगातार दबाव बनाकर रखेगा कि वह अपने वादे पूरे करे और अफगानिस्तान के लोगों के भीतर भरोसा पैदा करे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान ये बताने की कोशिश की कि अफगानिस्तान में कोई भी मजबूत सरकार तभी चल सकती है जब वह जनता से किए गए अपने वादे पूरे करे और लोगों के साथ खड़ी हो। इमरान खान ने कहा कि अफगानिस्तान के सभी कबिलाई समूहों को सरकार में हिस्सेदारी देकर ही ये भरोसा जीता जा सकता है।
जिस तरह पाकिस्तान ने तालिबानियों को पूरी तरह अफगानिस्तान पर कब्जा करने में उसकी मदद की और लगातार तालिबानियों को अपने इशारे पर चलाने और सत्ता चलाने के नुस्खे बताने का काम कर रहा है, उससे ये साफ है कि आने वाले दिनों में तालिबान सरकार के लिए वह सबसे करीबी सलाहकार के तौर पर उभरने वाला है।
पाकिस्तान के अखबार डॉन की खबर के मुताबिक इमरान खान ने एससीओ बैठक में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ी हो और तालिबान सरकार भी लोगों से किए गए अपने वादे पूरे करे। बैठक में इमरान खान के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ और सूचना मंत्री फवाद चौधरी भी मौजूद रहे। माना जा रहा है कि इस बैठक के दौरान पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने खुलकर अपनी अफगान नीति बताने की कोशिश करने के साथ दुनिया को अफानिस्तान की मदद के लिए आगे आने का संदेश देना चाहता है। वह बार-बार ये कह रहा है कि पड़ोसी मुल्कों में चल रही अशांति से वह परेशान है और अफागनिस्तान में शांति चाहता है।
इमरान खान ने तालिबान सरकार को सलाह दी कि वह अफगान लोगों के भीतर से ये खौफ निकालने की कोशिश करे कि अब वहां आतंकवादियों के लिए कोई जगह नहीं है। सुनने में ये बात कुछ अटपटी सी लगती है कि तालिबान अपनी इमेज के खिलाफ ऐसा कर सकता है, लेकिन इमरान खान ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि तालिबान सरकार आतंकियों की सरकार नहीं है और अफगानिस्तान या पाकिस्तान आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह कभी नहीं बन सकता। ऐसा उन्होंने जोर देकर अपने भाषण में कहा।
उन्होंने ये भी एलान किया कि पाकिस्तान हमेशा एक स्थाई, स्थिर और संप्रभु अफगानिस्तान के साथ खड़ा रहेगा। अफगानिस्तान पर तालिबान के शासन को उन्होंने नई हकीकत का नाम दिया और इसे रहत की बात बताया कि ऐसा बिना किसी युद्ध या किसी का खून बहाए संभव हुआ है। इसे देखते हुए अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित में यही है कि अब अफगानिस्तान फिर से टकराव न हो और वहां की स्थितियां सामान्य हों।
इमरान खान ये बताने की कोशिश करते रहे कि अब तक अफगानिस्तान दूसरे मुल्कों की रहमोकरम पर चलता रहा इसीलिए बाहरी मदद हटते ही वह पूरी तरह ध्वस्त हो गया। लेकिन अब उसे आत्मनिर्भर बनना है और अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करनी है। एक ऐसे आत्मनिर्भर अफगानिस्तान बनाने के लिए पाकिस्तान हर मदद करेगा और अन्य देशों को भी इसके लिए आगे आना चाहिए। यह एक दुर्लभ मौका है जब अफगानिस्तान में चालीस साल से चल रहा आंतरिक युद्ध खत्म हुआ है।
जाहिर है पाकिस्तान का इस मजबूती के साथ तालिबान के साथ खड़ा होना उसकी दूरगामी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है और अफगानिस्तान के आम अवाम में पाकिस्तान को लेकर भरोसा पैदा करना भी उसका मकसद है। वह यह बताने की कोशिश कर रहा है कि अगर अफगानिस्तान को आगे बढ़ना है, शांति स्थापित करनी है तो बगैर पाकिस्तान के वह ऐसा नहीं कर सकता।