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Pakistan: चीनी प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन का नया दौर, पाकिस्तान सरकार का नया सिरदर्द

Thu, 21 Jul 2022 03:18 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 21 Jul 2022 03:18 PM IST
सार

आंदोलन के नए दौर का एलान ‘ग्वादार को हक दो तहरीक’ (आंदोलन) ने किया है। तहरीक के नेता मौलाना हिदायत उर रहमान ने घोषणा की है कि गुरुवार से धरना शुरू हो जाएगा। बलूचिस्तान प्रांत के शहर क्वेटा में एक प्रेस कांफ्रेंस में रहमान ने कहा कि ये धरना अनिश्चितकाल तक चलेगा...

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Pakistan: fresh round of mass movement will start in CPEC project in Gwadar area of Pakistan
बलूचिस्तान - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान के ग्वादार इलाके में अब जन आंदोलन का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। स्थानीय जन संगठनों ने चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत बन रही परियोजनाओं के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का एलान किया है। इस खबर से पाकिस्तान सरकार की इस इलाके में चीनी परियोजनाओं को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने की मंशा को धक्का लग सकता है। आंदोलन और आतंकवादी हमलों के कारण इन परियोजनाओं पर काम की रफ्तार पहले ही धीमी हो चुकी है।

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इन परियोजनाओं के विरोधी संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार उनकी चिंताओं को दूर करने में नाकाम रही है। इस पूरे समुद्री क्षेत्र में मशीनी नौकाओं से गैर कानूनी रूप से मछली मारने का धंधा बेरोक चल रहा है। इससे स्थानीय मछुआरों की आजीविका पर खराब असर पड़ा है। परियोजनाओं के कारण इस इलाके का पानी और वातावरण भी खराब हुए हैं।

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आंदोलन के नए दौर का एलान ‘ग्वादार को हक दो तहरीक’ (आंदोलन) ने किया है। तहरीक के नेता मौलाना हिदायत उर रहमान ने घोषणा की है कि गुरुवार से धरना शुरू हो जाएगा। बलूचिस्तान प्रांत के शहर क्वेटा में एक प्रेस कांफ्रेंस में रहमान ने कहा कि ये धरना अनिश्चितकाल तक चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शहबाज शरीफ सरकार गहरे समुद्र में मछली मारने वाली मशीनी नौकाओं पर रोक लगाने में नाकाम रही है।

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ग्वादार को हक दो तहरीक ने पिछले साल भी धरने का कार्यक्रम आयोजित किया था। तब धरना महीने भर चला था। उसमें दस हजार लोगों ने हिस्सा लिया था। तब यह साफ हो गया था कि उस इलाके में चीनी परियोजनों को लेकर लोगों में कितनी नाराजगी है। रहमान ने मांग की है कि सरकार गहरे समुद्र में मछली मारने पर पूरी तरह रोक लगाए और सीमा के आरपार कारोबार की छूट दे, ताकि स्थानीय लोग अपनी रोजी-रोटी चला सकें। इसके अलावा भी उन्होंने उस इलाके से संबंधित कई स्थानीय मांगें सामने रखी हैं। रहमान ने चेतावनी दी कि अगर उनके संगठन की मांगों को नहीं माना गया, तो ग्वादार बंदरगाह के निर्माण कार्य को ठप कर दिया जाएगा।

 

 

जानकारों का कहना है कि अगर तहरीक का आंदोलन लंबा खिंचा, तो बंदरगाह पर गतिविधियां बाधित हो सकती हैं। इस बंदरगाह के निर्माण के लिए चीन ने अरबों डॉलर का निवेश किया है। शहबाज शरीफ सरकार ने यहां तेजी से काम बढ़ाने को अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है। सिर्फ जून में प्रधानमंत्री शरीफ ने दो दिन का ग्वादार का दौरा किया।

 

क्वेटा स्थित राजनीतिक विश्लेषक रशीद बलोच ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा कि धरने से बंदरगाह पर आवाजाही में रुकावट आएगी। उन्होंने कहा कि बंदरगाह पर काम रोकना एक ऐसी धमकी है, जिससे सरकार तहरीक की मांग मानने के लिए दबाव में आ सकती है। रूरल कम्युनिटी डेवलपमेंट काउंसिल नाम की संस्था के अध्यक्ष नसीर रहीम सोहराबी के मुताबिक धरने के कार्यक्रम से तहरीक उस इलाके में एक राजनीतिक संगठन के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। मई में हुए स्थानीय चुनाव में तहरीक को अच्छी कामयाबी मिली थी।

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