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Pakistan: इस्लामाबाद बम धमाकों की जांच के लिए पाकिस्तान ने जेआईटी का किया गठन, सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध
Sun, 25 Dec 2022 02:33 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, इस्लामाबाद।
पीटीआई, इस्लामाबाद।
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 25 Dec 2022 02:33 AM IST
सार
इस्लामाबाद के मुख्य आयुक्त ने आदेश दिया है कि जेआईटी 30 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर अपनी जांच पूरी करेगी।
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इस्लामाबाद में कार में ब्लास्ट।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पाकिस्तान के अधिकारियों ने राजधानी इस्लामाबाद में आत्मघाती बम विस्फोट की जांच के लिए शनिवार को चार सदस्यीय संयुक्त जांच दल (जेआईटी) का गठन किया। साथ ही आतंकवादियों के ताजा खतरे से निपटने के लिए नीतिगत समीक्षा की। प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने शुक्रवार को हुए हमले की जिम्मेदारी ली है। इस हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी और छह अन्य घायल हो गए थे।
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जेआईटी 30 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर अपनी जांच पूरी करेगी
इस्लामाबाद के मुख्य आयुक्त मोहम्मद उस्मान यूनिस ने आतंकवाद विरोधी अधिनियम (एटीए) 1997 की धारा 19ए के तहत जेआईटी को मंजूरी दी। जेआईटी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), इस्लामाबाद स्थित काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी), इंटेलिजेंस ब्यूरो और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस द्वारा नामित प्रतिनिधि, और इस्लामाबाद पुलिस प्रमुख द्वारा नामित अन्य सदस्य शामिल हैं। मुख्य आयुक्त ने आदेश दिया है कि जेआईटी 30 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर अपनी जांच पूरी करेगी।
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अधिकारियों ने शनिवार को द एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि इस बीच, देश के नेता और सैन्य नेतृत्व टीटीपी आतंकवादी समूह के ज्वार को रोकने के लिए एक प्रमुख नीति की समीक्षा कर रहे हैं।आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस मामले में बंद कमरे में चर्चा हुई है और अगले कुछ हफ्तों में बड़े फैसले की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की एक बैठक बुलाई जा सकती है जिसमें टीटीपी से उभरते नए खतरे के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। टटीपी एक आतंकवादी संगठन है जो पूरे पाकिस्तान में शरिया कानून लाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है। टीटीपी द्वारा प्रायोजित हमलों में बढ़ोतरती ने अधिकारियों को पिछली व्यवस्था द्वारा अपनाई गई रणनीति पर फिर से विचार करने के लिए प्रेरित किया है।
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एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि खैबर-पख्तूनख्वा के कुछ क्षेत्रों में, विशेष रूप से तत्कालीन आदिवासी क्षेत्रों में स्थिति इस हद तक बिगड़ गई है कि एक बड़े सैन्य आक्रमण से इंकार नहीं किया जा सकता है। अधिकारी ने कहा कि टीटीपी के साथ अब बातचीत नहीं हो रही है और पहले की समझ के तहत उग्रवादियों की वापसी को रोकना होगा। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि टीटीपी के साथ बात करने की नीति उलटी पड़ गई है और आतंकी संगठन ने फिर से संगठित होने के लिए इस बातचीत का इस्तेमाल किया। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यह एक बड़ी गलती थी और इसे सुधारा जाना चाहिए।
इस्लामाबाद हाई अलर्ट पर, सार्वजनिक समारोहों पर लगाया गया प्रतिबंध
डॉन अखबार के मुताबिक, शुक्रवार को हुए आत्मघाती हमले के कुछ घंटे बाद इस्लामाबाद प्रशासन ने सभी तरह के जमावड़े, खासकर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से संबंधित गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया और शहर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया। उपायुक्त इरफान नवाज मेमन के कार्यालय से जारी एक अधिसूचना के अनुसार डॉन ने बताया कि हाल ही में कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जारी की गई सलाह/खतरे के अलर्ट और पुलिस पर हमले के आलोक में राजधानी के अधिकार क्षेत्र के भीतर खतरों को दूर करने के लिए इस्लामाबाद की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है, जो सार्वजनिक जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए शांति को बाधित कर सकते हैं। हालांकि, आने वाले दिनों में इस तरह की गतिविधियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने विशेष रूप से आगामी स्थानीय सरकार के चुनावों के मद्देनजर सभी प्रकार की नुक्कड़ सभाओं, सार्वजनिक समारोहों और सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। डॉन ने कहा कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और दो सप्ताह तक लागू रहेगा।