पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति के बेटे हुमायूं मिर्जा का निधन, 93 साल की उम्र में अमेरिका में ली आखिरी सांस
हुमायूं मिर्जा इस्कंदर मिर्जा और उनकी पहली पत्नी रिफात बेगम के छह बच्चों में से दूसरे थे। हुमायूं मिर्जा ने दो पुस्तकें लिखीं हैं। वो 1988 में विश्व बैंक में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
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पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति इस्कंदर अली मिर्जा के बेटे हुमायूं मिर्जा का निधन हो गया। 93 वर्षीय हुमायूं मिर्जा ने 12 से 13 जून की रात को मैरीलैंड के बेथेस्डा स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। डॉन रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा के इकलौते बेटे का रविवार को वाशिंगटन में निधन हो गया। उनका जन्म 9 दिसंबर, 1928 को भारत के पुणे शहर में हुआ था। अमेरिका जाने से पहले हुमायूं मिर्जा ने देहरादून के दून स्कूल से शिक्षा हासिल की। उसके बाद हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से उन्होंने एमबीए की पढ़ाई पूरी की।
हुमायूं मिर्जा ने लिखी है दो किताबें
हुमायूं मिर्जा इस्कंदर मिर्जा और उनकी पहली पत्नी रिफात बेगम के छह बच्चों में से दूसरे थे। हुमायूं मिर्जा ने दो पुस्तकें लिखीं हैं। वो 1988 में विश्व बैंक में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। हुमायूं मिर्जा की आत्मकथा "फ्रॉम प्लासी टू पाकिस्तान, द फैमिली हिस्ट्री ऑफ इस्कंदर मिर्जा" और "सन ऑफ ए प्रेसिडेंट एंड वारिस टू ए थ्रोन है।
कौन थे इस्कंदर मिर्जा
पाकिस्तान के रक्षा सचिव, गवर्नर जनरल और राष्ट्रपति रहे इस्कंदर मिर्जा, बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के सेनापति मीर जाफर के पड़पोते थे। वही मीर जाफर जिन्होंने 1757 में प्लासी की लड़ाई में अपने नवाब को हराने और अंग्रेज़ों को जिताने के लिए गद्दारी का हथियार उपयोग किया था। जाफर के बारे में अल्लामा इकबाल ने कहा था:
'जफर अज बंगाल ओ सादिक अज दकन
नंग आदम, नंग दी, नंग वतन'
इन्हीं इस्कंदर मिर्जा के बेटे हुमायूं मिर्ज़ा ने एक किताब लिखी थी, 'फ्रॉम प्लासी टू पाकिस्तान' जिसमें उन्होंने हैरतअंगेज तौर पर कुछ और ही कहानी बयान की थी। किताब के लेखक ने सिराजुद्दौला को बदमिजाज और बेरहम ठहराते हुए लॉर्ड क्लाइव के हाथों हार का जिम्मेदार खुद उन्हें ही बताया था। ये अजीबोगरीब तर्क भी गढ़ने की कोशिश की गई कि सिराजुद्दौला को मीर जाफर ने सत्ता पर बिठाया था और उन्हीं के साथ नवाब ने धोखा किया था।