Pakistan Politics: चुनाव आयोग ने इमरान खान और फवाद चौधरी के खिलाफ जारी किया जमानती वारंट, अवमानना का मामला
ईसीपी द्वारा जारी फैसले में कहा गया, पीटीआई के नेता मामले की कार्यवाही में उपस्थित नहीं हुए। नतीजतन, मामले की परिस्थितियों में हमारे पास प्रतिवादी के खिलाफ 50,000 रुपये (पचास हजार) की राशि में गिरफ्तारी का जमानती वारंट जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
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तोशाखाना मामले में बुरी तरह फंसे पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के प्रमुख इमरान खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस बीच, बुधवार को चुनाव (ईसीपी) ने उनके और उनकी पार्टी के नेता फवाद चौधरी के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। ईसीपी के मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा के खिलाफ अवमाननापूर्ण टिप्पणी से जुड़े एक मामले में यह आदेश जारी किया गया है।
खबरों के मुताबिक, ईसीपी सदस्य निसार अहमद दुर्रानी, शाह मोहम्मद जतोई, बाबर हसन भरवाना और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) इकराम उल्लाह खान की चार सदस्यीय पीठ ने यह आदेश जारी किया। ईसीपी द्वारा जारी फैसले में कहा गया, नेता मामले की कार्यवाही में उपस्थित नहीं हुए। नतीजतन, मामले की परिस्थितियों में हमारे पास प्रतिवादी के खिलाफ 50,000 रुपये (पचास हजार) की राशि में गिरफ्तारी का जमानती वारंट जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
फैसले में ईसीपी ने कहा कि जमानती वारंट की तामील इस्लामाबाद के पुलिस महानिरीक्षक के माध्यम से की जाएगी। फैसले में कहा गया, इस्लामाबाद के पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय को तत्काल कार्रवाई करने और मामले को 14 मार्च को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है। जिओ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और पीटीआई के वरिष्ठ नेता फवाद चौधरी के लिए अलग से जारी अपने आदेशों में ईसीपी ने कहा कि प्रतिवादियों को कई बार व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था। लेकिन प्रतिवादी अदालत के समक्ष पेश होने में विफल रहे।
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चुनाव आयोग ने कहा कि पीटीआई प्रमुख ने जानबूझकर किसी न किसी बहाने से सुनवाई स्थगित करने की मांग की और वह पीठ के समक्ष पेश होने के लिए अनिच्छुक थे। आयोग ने जोर देकर कहा कि यह कानून का मजाक है।प्रतिवादी का ऐसा आचरण सहनीय नहीं हो सकता है, क्योंकि इस आयोग के समक्ष उनका पेश न होना जानबूझकर प्रतीत होता है।
खबर के अनुसार, पिछले हफ्ते पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और दो अन्य आरोपियों के ईसीपी और मुख्य चुनाव आयोग सिकंदर सुल्तान राजा की अवमानना से संबंधित मामले में आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए। इस वजह से पीठ ने कुछ ही मिनटों में सुनवाई स्थगित कर दी थी।
ईसीपी के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए फवाद चौधरी ने कहा कि यह आदेश लाहौर उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करता है। लाहौर उच्च न्यायालय ने छह जनवरी को इस मामले में खान, फवाद और पार्टी महासचिव असद उमर के खिलाफ ईसीपी के गिरफ्तारी वारंट को निलंबित कर दिया था। फवाद चौधरी ने ट्वीट किया, चुनाव आयोग का आदेश लाहौर हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। चुनाव आयोग को कोर्ट की अवमानना के लिए उच्च न्यायालय में तलब किया जाएगा।
खबर के मुताबिक, पिछले साल ईसीपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के लिए पीटीआई नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी। पाकिस्तान के शीर्ष चुनाव निकाय ने उन्हें कई नोटिस भी दिए, जिसमें उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा गया। हालांकि पीटीआई नेता ईसीपी के समक्ष पेश नहीं हुए और बाद में उन्होंने विभिन्न उच्च न्यायालयों में इसकी शक्तियों को चुनौती दी।
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