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बेनकाब: जम्मू-कश्मीर में जिहाद के नाम पर आतंक फैला रहा पाकिस्तान, ईएफएसएएस सम्मेलन में विशेषज्ञों ने रखी राय

Sat, 05 Nov 2022 05:32 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, एम्सटर्डम।
एजेंसी, एम्सटर्डम। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 05 Nov 2022 05:32 AM IST
सार

‘जम्मू-कश्मीर और व्यापक क्षेत्र में आतंकवाद और कट्टरता’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में, विभिन्न विशेषज्ञों और कश्मीरी प्रवासियों ने हिस्सा लिया। पहले दिन मशाल रेडियो, रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी के प्रबंध संपादक दाउद खट्टक ने बताया कि कैसे पाकिस्तान परदे के पीछे से जिहाद के नाम पर जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथ और आतंकवाद के के लिए जिम्मेदार है।

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Pakistan continues to be responsible for terrorism in J-K, experts and Kashmiri diaspora in EFSAS conference
एम्स्टर्डम की व्रीजे यूनिवर्सिटी में यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज सम्मेलन। - फोटो : ANI

विस्तार

एम्स्टर्डम की व्रीजे यूनिवर्सिटी में यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (ईएफएसएएस) के सम्मेलन में विशेषज्ञों और कश्मीरी प्रवासियों ने कहा, पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और कट्टरपंथ के लिए जिम्मेदार है। वह जिहाद के नाम पर अपनी गतिविधियों से केंद्र शासित प्रदेश में कट्टरता और आतंकवाद को प्रेरित करता आ रहा है।

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‘जम्मू-कश्मीर और व्यापक क्षेत्र में आतंकवाद और कट्टरता’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में, विभिन्न विशेषज्ञों और कश्मीरी प्रवासियों ने हिस्सा लिया। पहले दिन मशाल रेडियो, रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी के प्रबंध संपादक दाउद खट्टक ने बताया कि कैसे पाकिस्तान परदे के पीछे से जिहाद के नाम पर जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथ और आतंकवाद के के लिए जिम्मेदार है। उसके कश्मीरी विद्रोहियों का समर्थन करने से इसे आसानी से समझा जा सकता है। खट्टक ने तर्क दिया, जहां जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी दखल आज भी जारी है, वहीं उसने अपने प्रतिनिधि कबायली इलाकों से पंजाब स्थानांतरित कर दिए हैं। 1990 के दशक में शुरू हुआ उग्रवादी माहौल मूल रूप से गैर-कश्मीरी जिहादियों, हरकत-उल-मुजाहिदीन, लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठनों से तैयार हुआ। इसमें अफगानिस्तान में लड़े हक्कानी भी शामिल है। 
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9/11 की घटना के बाद आतंकी समूहों ने कबायली इलाकों में बढ़ाई उपस्थिति
खट्टक ने कहा, 9/11 की घटना के बाद, कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी समूहों ने पश्तून कबायली इलाकों में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी, जिससे अंततः तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का उदय हुआ। जबकि आंतरिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबाव ने इस समय आतंकवादी समूहों के लिए पाकिस्तानी समर्थन के दायरे को सीमित कर दिया है, इसकी निरंतर सहायता उस संरक्षणवाद के माध्यम से दिखाई देती है जिसे उन्होंने आतंकवादी कमांडरों को दिया है। सम्मेलन के दूसरे दिन, पैनल में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के दोनों ओर के कश्मीरियों के मुद्दों पर चर्चा होगी।
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हाफिज सईद और अजहर जैसे आतंकी पाकिस्तान में घूम रहे
खट्टक ने कहा कि गिरफ्तार और आरोपित होने के बावजूद, हाफिज सईद अभी भी पाकिस्तान के भीतर घूम रहा है। इसी तरह मसूद अजहर भी देश में छिपा है। उन्होंने तर्क दिया कि अन्य क्षेत्रीय गतिशीलता जैसे सीपीईसी का निर्माण, चल रहे बलूच विद्रोह, संगठित अपराध समूहों की उपस्थिति और ईरान और मध्य एशियाई राज्यों के साथ संबंध पाकिस्तान में और बदलाव ला सकते हैं। फिर भी, जब आतंकवाद और कश्मीर के संबंध में पाकिस्तानी नीति की बात आती है।

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