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मुसीबत में पाकिस्तान सेनाः देश में साख पर हमला, तो अफगान जमीन से सैनिकों पर
Mon, 18 Apr 2022 08:18 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 18 Apr 2022 08:18 PM IST
सार
बीते 14 अप्रैल को पाकिस्तान के उत्तर वजीरीस्तान जिले में सुरक्षा बलों पर हमला हुआ था। उसमें पाकिस्तान के सात सैनिक मारे गए थे। पर्यवेक्षकों का कहना है कि हालांकि तालिबान सरकार के साथ पहले से कड़वाहट बढ़ रही थी, लेकिन ताजा घटना के बाद दोनों देशों का रिश्ता बेहद टकराव भरा हो गया है।
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कमर जावेद बाजवा (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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विस्तार
जिस समय पाकिस्तान की सेना देश के अंदर ‘अफवाह और दुष्प्रचार’ से परेशान है, तभी अफगानिस्तान की सीमा पर उसके लिए एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। अफगानिस्तान स्थित अपने अड्डों से पाकिस्तान के खिलाफ हमले आयोजित कर रहे आतंकवादी समूहों से निपटना उसके लिए कठिन चुनौती साबित हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर पाकिस्तान सरकार और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।
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पिछले हफ्ते पाकिस्तान में हुए एक आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादी गुटों पर कार्रवाई की थी। उसके बाद तालिबान ने आरोप लगाया कि इस दौरान पाकिस्तान के सैनिक सीमा पार कर अफगानिस्तान के क्षेत्र में चले गए। तालिबान ने चेतावनी दी थी कि आगे से ऐसी कार्रवाइयों को वह बर्दाश्त नहीं करेगा। इस बयान का रविवार को पाकिस्तान ने जवाब दिया। उसने तालिबान से कहा कि वह पाक-अफगान सीमा से जुड़े इलाकों को सुरक्षित बनाए और आतंकवाद में शामिल गुटों पर कार्रवाई करे।
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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि अफगानिस्तान की संप्रभु सरकार को दोनों देशों में शांति और प्रगति के लिए ऐसे कदम उठाने चाहिए। पाकिस्तान के बयान का लहजा खासा सख्त था। इसमें सीमा पार से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की गई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आसिम इफ्तिखार ने कहा कि आतंकवादी पाकिस्तान के अंदर हमले करने के लिए निर्भय हो कर अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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बीते 14 अप्रैल को पाकिस्तान के उत्तर वजीरीस्तान जिले में सुरक्षा बलों पर हमला हुआ था। उसमें पाकिस्तान के सात सैनिक मारे गए थे। पर्यवेक्षकों का कहना है कि हालांकि तालिबान सरकार के साथ पहले से कड़वाहट बढ़ रही थी, लेकिन ताजा घटना के बाद दोनों देशों का रिश्ता बेहद टकराव भरा हो गया है।
पाकिस्तान के सामने ये चुनौती उस समय खड़ी हुई है, जब देश में नई सरकार बनी है। उधर, अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटाए गए इमरान खान के समर्थक लगातार सेना और न्यायपालिका पर निशाना साध रहे हैं। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (पीटीआई) के नेताओं का ऐसा तेवर शनिवार रात कराची में पार्टी की हुई विशाल जन सभा में भी जाहिर हुआ। इन आलोचनाओं से पाकिस्तान की सेना परेशान दिख रही है।
रविवार को सेना की तरफ से सेनाध्यक्ष जनरल कमर बाजवा का एक बयान जारी किया गया। इसमें जनरल बाजवा ने कहा कि सेना को लेकर लगाई जा रही अटकलों और फैलाई जा रही अफवाहों का तुरंत मुकाबला करने की जरूरत है। जनरल बाजवा ने चेतावनी दी है कि सेना के खिलाफ दुष्प्रचार से देश की साख के लिए खतरा पैदा हो रहा है। सेना के बयान में बताया गया कि जनरल बाजवा ने ये बातें शनिवार को लाहौर गैरिसन के अपने दौर के समय कही थीं।
उधर, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के बार एसोसिएशन ने इमरान खान से अपील की है कि वे न्यायपालिका को निशाना ना बनाएं। एक बयान में एसोसिएशन ने शनिवार को कहा था कि इमरान खान को पूर्व प्रधानमंत्री की तरह व्यवहार करना चाहिए, ना कि एक असंतुष्ट नेता की तरह। लेकिन इन बातों से लापरवाह पीटीआई ने कराची में बड़ी रैली की। वहां पार्टी नेताओं ने हाल के राजनीतिक उथल-पुथल में निभाई गई भूमिका को लेकर एक बार फिर सेना और न्यायपालिका की आलोचना की।