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Pakistan-Afghanistan Tension: इस्लामाबाद-काबुल के बीच सुलह की कोशिश, छह नवंबर को फिर होगी उच्च-स्तरीय बैठक

Fri, 31 Oct 2025 02:36 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 31 Oct 2025 02:36 AM IST
सार

पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने तुर्की के इस्तांबुल में हुई शांति वार्ता के बाद युद्धविराम बनाए रखने पर सहमति जताई है। दोनों देश 6 नवंबर को फिर मिलेंगे ताकि संघर्ष विराम के लागू होने की रूपरेखा तय की जा सके।

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Pakistan and Afghanistan agree to uphold ceasefire after Istanbul peace talks mediated by Turkey and Qatar
अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष विराम - फोटो : एएनआई

विस्तार

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। इस्तांबुल में हुई शांति वार्ता के बाद दोनों देशों ने युद्धविराम बनाए रखने पर सहमति जताई है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस समझौते की घोषणा की और कहा कि बातचीत में कतर और तुर्की ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

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विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देश 6 नवंबर को फिर से इस्तांबुल में उच्च-स्तरीय बैठक करेंगे, जहां युद्धविराम लागू करने की रूपरेखा पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बयान में कहा गया सभी पक्ष एक निगरानी और सत्यापन तंत्र पर सहमत हुए हैं, जिससे शांति बनाए रखने और उल्लंघन करने वाले पक्ष पर दंड लगाने की व्यवस्था की जाएगी।
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सीमा पर तनाव और वार्ता की पृष्ठभूमि
हाल के दिनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया था। दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई गोलीबारी में दर्जनों सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद तुर्की और कतर ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए एक बार फिर टेबल पर लाने का प्रयास किया।
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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने बताया कि कतर और तुर्की के आग्रह पर पाकिस्तान ने शांति प्रक्रिया को एक और मौका देने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मुख्य मांग है कि अफगानिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए न होने दे।

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दोनों देशों के बीच विवाद की जड़
इस महीने की शुरुआत में काबुल में हुए विस्फोटों के बाद अफगान तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर हवाई हमलों का आरोप लगाया था। अफगान पक्ष का कहना था कि पाकिस्तान ने उसके पूर्वी बाजार पर भी बमबारी की, जिसमें कई नागरिक मारे गए। इसके जवाब में, अफगान बलों ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की और दावा किया कि 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। हालांकि पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज किया और कहा कि उसके 23 सैनिक मारे गए और अभियान आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया था।

कतर और तुर्की की मध्यस्थता से लौटी उम्मीदें
तनाव बढ़ने के बाद 19 अक्टूबर को कतर में हुई आपात वार्ता के दौरान युद्धविराम की घोषणा की गई थी। इसके बाद इस्तांबुल में चार दिन तक चली वार्ता मंगलवार को बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हुई थी, लेकिन अब दोनों देशों ने फिर से बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है।


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पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पेशावर में कहा कि पाकिस्तान अपने सभी पड़ोसियों के साथ शांति चाहता है, लेकिन अफगान धरती से होने वाले आतंकवाद को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में संयम बरता है और संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कूटनीतिक और आर्थिक प्रयास किए हैं, लेकिन अफगान तालिबान ने इसके बजाय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को समर्थन दिया है।

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गुरुवार को बताया कि बलोचिस्तान में दो अभियानों में 18 आतंकियों को मार गिराया गया, जबकि बाजौर शहर में चार पाकिस्तानी तालिबान लड़ाके मारे गए, जिनमें एक हाई-वैल्यू टारगेट भी शामिल था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस्तांबुल वार्ता से स्थायी युद्धविराम का ढांचा तैयार हो जाता है, तो यह दक्षिण एशिया में स्थिरता की दिशा में एक बड़ी सफलता साबित होगी।

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