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Pakistan: भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सुप्रीम कोर्ट के जज ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को लिखा पत्र

Wed, 10 Jan 2024 06:04 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 10 Jan 2024 06:04 PM IST
सार

Pakistan: पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सैयद मजहर अली अकबर ने आज राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इससे एक दिन पहले उच्चतम न्यायालय की अनुशासन समिति ने न्यायाधीश अकबर के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

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Pak SC judge Sayyed Mazahar Ali Akbar facing allegation of corruption resigns
पाकिस्तान का सर्वोच्च न्यायालय। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने बुधवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया। एक दिन पहले ही शीर्ष अदालत की अनुशासन समिति ने कदाचार के लिए उनके खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। 

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राष्ट्रपति अल्वी को लिखा पत्र
न्यायमूर्ति सैयद मजहर अली अकबर ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को अपना इस्तीफा सौंपा। राष्ट्रपति को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ जिस तरह के आरोप लगाए गए और जिस तरह का व्यवहार किया गया, उससे उनके पास इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। 

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'न्यायाधीश के रूप में काम जारी रखना संभव नहीं'
उन्होंने कहा, 'पहले लाहौर उच्च न्यायालय और फिर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनना सम्मान की बात थी।लेकिन, अब जो हालात बने हैं, उनमें मेरे लिए पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपने काम को जारी रखना संभव नहीं है।' 

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एसजेसी ने कार्यवाही पर रोक लगाने से किया इनकार
उन्होंने कहा, 'उचित प्रक्रिया के विचार ने भी मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया। इसलिए, मैं आज पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद से इस्तीफा देता हूं।' इससे पहले मंगलवार को सर्वोच्च न्यायिक परिषद (एसजेसी) ने न्यायाधीश नकवी के कथित कदाचार को लेकर उनके खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाने के अनुरोध को खारिज कर दिया था।

'मेरे खिलाफ किया गया अपमानजनक व्यवहार'
दिसंबर में मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) काजी फैज ईसा और शीर्ष अदालत के सभी न्यायाधीशों को लिखे एक पत्र में न्यायमूर्ति नकवी ने कहा था कि एसजेसी द्वारा उनके साथ किया गया व्यवहार किसी अपमान से कम नहीं है। एसजेसी ने पिछले साल 27 अक्तूबर को पीठ में हेरफेर और वित्तीय कदाचार का आरोप लगाने वाली विभिन्न शिकायतों के बीच न्यायमूर्ति नकवी को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था। 

किसने दर्ज कराई थी शिकायत
पाकिस्तान बार काउंसिल, वकील मियां दाऊद और अन्य ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। एसजेसी ने न्यायाधीश को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। एसजेसी में न्यायमूर्ति तारिक मसूद, न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन, लाहौर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद अमीर भट्टी और बलूचिस्तान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नईम अख्तर शामिल हैं। एसजेसी शीर्ष न्यायपालिका के न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई करने वाला शीर्ष निकाय है।

इस मामले में न्यायाधिकरण को घोषित किया असंवैधानिक
लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति नकवी ने दिवंगत सैन्य शासक जनरल परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाने वाले विशेष न्यायाधिकरण को असंवैधानिक घोषित करार दिया था। दिलचस्प बात यह है कि उनका इस्तीफा तब आया, जब मुशर्रफ मामले में उनके फैसले को सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया। हालांकि, यह पता नहीं चल पाया है कि दोनों घटनाक्रम आपस में जुड़े हैं या नहीं।

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