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Pakistan: शरीफ को झटका, राष्ट्रपति ने पुनर्विचार के लिए लौटाया CJP के अधिकारों की कटौती करने वाला विधेयक

Sat, 08 Apr 2023 04:00 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 08 Apr 2023 04:00 PM IST
सार

सर्वोच्च न्यायालय (अभ्यास और प्रक्रिया) विधेयक, 2023 को पिछले महीने संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित (अप्रूव्ड) किया गया था और मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। 

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Pak President Alvi returns to Parliament bill curtailing chief justices powers
शहबाज शरीफ, आरिफ अल्वी, इमरान खान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने उस विधेयक को संसद को वापस पुनर्विचार के लिए लौटा दिया है, जिसमें देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) की शक्तियों को कम करने की बात कही गई है। अल्वी ने कहा कि प्रस्तावित कानून विधायी निकाय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसे एक 'रंगीन' कानून के रूप में पेश किया जा सकता है। सीजेपी उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा चुनाव की नई तारीख 14 मई तय की थी और चुनाव की तारीख 10 अप्रैल से बढ़ाकर 8 अक्तूबर करने के चुनाव आयोग के फैसले को रद्द कर दिया था।

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इसके बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पार्टी के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने शीर्ष अदालत के फैसले की आलोचना की थी, जिसने शीर्ष अदालत के इस फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। सरकार पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) बंदियाल की स्वत: संज्ञान लेने की शक्तियों पर अंकुश लगाना चाहती है। 
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यह भी पढ़ें: पाकिस्तान की जलवायु परिवर्तन मंत्री बोलीं- सिंधु जल संधि की समीक्षा पर भारत का नोटिस 'अस्पष्ट'
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सर्वोच्च न्यायालय (अभ्यास और प्रक्रिया) विधेयक, 2023 को पिछले महीने संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित (अप्रूव्ड) किया गया था और मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 मार्च को मंजूरी दी थी। नेशनल असेंबली (संसद) ने कानून और न्याय पर स्थायी समिति द्वारा सुझाए गए कुछ संशोधनों के बाद इसे पारित किया। 30 मार्च को इसे सीनेट ने पारित कर दिया था।

विधेयक में कहा गया है कि शीर्ष अदालत के समक्ष हर कारण, मामले या अपील को मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों की एक समिति द्वारा गठित पीठ द्वारा सुना और निपटाया जाएगा। इसमें कहा गया है कि समिति के फैसले बहुमत से लिए जाएंगे। शीर्ष अदालत के मूल अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने पर विधेयक में कहा गया है कि अनुच्छेद 184 (3) के इस्तेमाल से संबंधित किसी भी मामले को पहले समिति के समक्ष रखा जाएगा।

अल्वी ने अपने विस्तृत जवाब में कहा कि उन्होंने इसकी वैधता के बारे में जांच को पूरा करने के लिए पुनर्विचार के अनुरोध के साथ संविधान के तहत विधेयक को वापस करना उचित समझा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1980 से इन नियमों का पालन किया जा रहा है और इसके साथ कोई भी छेड़छाड़ अदालत के आंतरिक कामकाज, इसकी स्वायत्तता और स्वतंत्रता में हस्तक्षेप के समान हो सकती है। 
अल्वी ने आगाह किया कि इन नियमों को संशोधित करने या छेड़छाड़ करने के किसी भी प्रयास को अदालत के आंतरिक कामकाज में हस्तक्षेप के रूप में देखा जा सकता है, जो इसकी स्वायत्तता और स्वतंत्रता से समझौता कर सकता है।

अल्वी ने आगे कहा कि शीर्ष अदालत एक स्वतंत्र संस्था है, जैसा कि संस्थापकों ने कल्पना की थी कि पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित होगी। उन्होंने जोर देकर कहा, इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अनुच्छेद 191 को शामिल किया गया था और शीर्ष अदालत को संसद के कानून बनाने के अधिकार से बाहर रखा गया था। उन्होंने कहा कि कानून बनाने की संसद की क्षमता संविधान से ही उपजी है।


राष्ट्रपति के इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए जलवायु परिवर्तन मंत्री सीनेटर शेरी रहमान ने अपने ट्वीट में कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय विधेयक को समीक्षा के लिए (संसद को) लौटाकर राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने साबित कर दिया है कि वह अब भी देश के राष्ट्रपति नहीं बल्कि पीटीआई के महासचिव हैं। उन्होंने कहा कि अल्वी ने संसद के हर फैसले को पीटीआई के नजरिए से देखा।' उन्होंने कहा, 'वह अपनी पार्टी की नीति का पालन कर रहे हैं, राष्ट्रपति के रूप में अपनी संवैधानिक भूमिका नहीं।' उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति कह रहे हैं कि यह विधेयक संसद के अधिकार क्षेत्र से बाहर है? वह साढ़े तीन साल तक राष्ट्रपति भवन को कारखाने की तरह चलाते रहे, उन्हें संसद की शक्तियों का अंदाजा कैसे हो सकता है? राष्ट्रपति, संसद को कानून न सिखाएं।'

इस बीच, सीजेपी के खिलाफ सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल (एसजेसी) के समक्ष कदाचार के लिए एक शिकायत दर्ज की गई, जिसमें पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा चुनावों पर स्वत: संज्ञान कार्यवाही के लिए एक पीठ के गठन की जांच की मांग की गई। पीएमएल-एन की मुख्य आयोजक मरियम नवाज शरीफ ने भी मांग की कि सीजेपी बंदियाल को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि उनका झुकाव अपनी प्रतिद्वंद्वी पार्टी पीटीआई की ओर है। मरियम ने ट्वीट में आरोप लगाया कि मुख्य न्यायाधीश ने खान और पीटीआई का पक्ष लेने के लिए कानून और संविधान का खुला उल्लंघन किया है।

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