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ऑपरेशन बिलो द बेल्ट: लेबनान के पेजर में धमाकों के लिए बनाई गई खास रणनीति; किस्का-3 ने हिजबुल्ला पर बरपाया कहर

Wed, 18 Sep 2024 12:19 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 18 Sep 2024 12:19 PM IST
सार

दुनिया के अलग-अलग देश में काम कर चुके रक्षा मामलों मामलों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि जिस तकनीकी का इस्तेमाल इस विस्फोट में किया गया है वह नई नहीं है। प्लास्टिक एक्सप्लोसिव के नाम से इस्तेमाल की जाने वाली इस तकनीकी का पहले भी अलग-अलग तरीकों से विस्फोट करने के लिए इस्तेमाल होता रहा है।

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Operation Below the Belt: Lebanon pagers were prepared for explosions Kiska 3 wreaked havoc on Hezbollah
Pager Blast - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

लेबनान में हुए तेज धमाको को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। दुनिया भर की बड़ी खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक पेजर में हुए धमाकों के लिए ऑपरेशन 'बिलो द बेल्ट' नाम दिया गया था। यही नहीं पेजर के माध्यम से हिजबुल्ला पर हमला करने वाली एजेंसी ने बाकायदा ताइवान की बैटरियों को एक बड़े शिपमेंट के दौरान बदल दिया था। जो बैटरी इस दौरान बदली गई वह एक विशेष लैब में तैयार की गई थी। इसके लिए पांच महीने पहले ही धमाका करने वाली एजेंसी में लेबनान की ओर से निकाले गए एक टेंडर के बाद इस तरीके की रणनीति बनाई थी। फिलहाल दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ और खुफिया एजेंसियों के लिए अब इस तरीके से हुआ हमले को एक बड़ी चुनौती मान रहे हैं।

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जानकारी के मुताबिक, इस्राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने की पांच महीने पहले रणनीति बनाई थी। खुफिया एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, पांच महीने पहले लेबनान की ओर से ताइवान की अपोलो गोल्ड कंपनी के पेजर में बैटरी बदलने का टेंडर निकाला गया था। इस टेंडर को लेबनान ने बी एंड एच फोटो के नाम से निकाला था। लेबनान में हिजबुल्ला के आतंकी पेजर का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए इस्राइल ने इस टेंडर के आधार पर आगे की रणनीति बनाने का बड़ा प्लान तैयार किया। दुनिया भर की तमाम खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के आधार पर पता चला है कि जिस बैटरी का टेंडर ताइवान की कंपनी को हिजबुल्ला के आतंकियों के लिए बनाकर भेजना था। ठीक उसी स्पेसिफिकेशन की बैटरियों को इस्राइल की खुफिया एजेंसियों ने एक लैब में तैयार किया।
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इंटरनेशनल खुफिया एजेंसीज के पास जो सूचनाएं आई है उसमें पता चला है कि इस्राइल खुफिया एजेंसी ने लैब में तैयार की गई बैटरी में 'किस्का 3' नाम का एक विस्फोटक पदार्थ लगाया। जिसको अलग-अलग तारों के माध्यम से हिजबुल्ला के पेजर में लगाई जाने वाली बैटरी में पैबस्त कर दिया गया। उसके बाद इंतजार यह किया गया कि कब यह शिपमेंट ताइवान से चलकर लेबनान की ओर पहुंचने वाला है। जानकारी के मुताबिक, जैसे ही हिजबुल्ला के आतंकियों के पेजर में लगाए जाने वाला बैटरी वाला शिपमेंट हवाई रास्ते से जाने के लिए निकला तो इस्राइल की खुफिया एजेंसियों ने उसको रोक लिया। रोकने के दौरान खुफिया एजेंसी ने खुद को विदेश से आने वाले सामान को चेक करने वाली एजेंसी के तौर पर पेश किया और बाद में इन बैटरियों के शिपमेंट को सीज कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ताइवान से आ रही 5000 बैटरियों की जगह पर अपनी लैब में तैयार की गई बैटरी से बदल दिया गया।

खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस पूरे ऑपरेशन को इस्राइल की खुफिया एजेंसी ने 'बिलो दी बेल्ट' नाम दिया था। दरअसल, इस ऑपरेशन का नाम 'बिलो द बेल्ट' दिए जाने के पीछे भी एक बड़ा मकसद था। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पेजर ज्यादातर लोगों की जेब में रहता है। ऐसे में मकसद यही था कि विस्फोट के समय यह पेजर कमर के नीचे जेब में ही ब्लास्ट करेगा। जिससे शरीर के निचले हिस्से के अंग सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हो सके। यही वजह है कि इस धमाके में ज्यादातर लोगों के निचले हिस्से समेत चेहरे और आंखों पर चोट लगी। खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का मानना है कि हमला करने वाली एजेंसी ने बिलो द बेल्ट नाम भी इसी वजह से दिया था कि उनके कमर के निचले अंगों को ज्यादा से ज्यादा क्षतिग्रस्त किया जा सके।

खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ इस्राइल की एजेंसी ने हिजबुल्लाह के पेजर की बैटरियां ही नहीं बदली] बल्कि उसकी फ्रीक्वेंसी को भी हैक कर लिया था। यही वजह थी कि 450 मेगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी वाले ताइवान के पेजर में जब मंगलवार को धमाके हुए तो एक साथ पहले एक मैसेज की बीप सुनाई पड़ी। इस बीप के साथ जैसे ही हिज्बुल्ला से ताल्लुक रखने वालों ने पेजर जब से निकाल के आंखों के सामने किया तभी धमाका हो गया। दरअसल, धमाका करने वाली खुफिया एजेंसी को इस बात का पहले से अंदाजा था कि हिजबुल्ला के मैसेज एक साथ आने पर सब लोग अपने पेजर को निकलेंगे और बड़ा हमला हो जाएगा।


दुनिया के अलग-अलग देश में काम कर चुके रक्षा मामलों मामलों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि जिस तकनीकी का इस्तेमाल इस विस्फोट में किया गया है वह नई नहीं है। प्लास्टिक एक्सप्लोसिव के नाम से इस्तेमाल की जाने वाली इस तकनीकी का पहले भी अलग-अलग तरीकों से विस्फोट करने के लिए इस्तेमाल होता रहा है। वह कहते हैं कि इन बैटरियों में 'किस्का 3' विस्फोटक लगाया गया था। जो तेज हीट होने पर ब्लास्ट करता है। ऐसे में जिस भी एजेंसी ने इस तरीके से विस्फोट किया है उसने सबसे पहले एक सेंट्रलाइज्ड तकनीक के माध्यम से हिजबुल्ला के पेजर में पड़ी बैटरियों को हीट किया। जब यह सबसे ज्यादा गर्म हुई तो इन बैटरियों में लगा तकरीबन 3 ग्राम का विस्फोटक पदार्थ ब्लास्ट कर गया। जिसके चलते कई लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग अपंग हो गए।

दुनिया में पहली बार इस तरीके से दुश्मनों के ऊपर हमले के बाद सभी खुफिया एजेंसी सतर्क हो गई हैं। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से हाथों में रहने वाले गेजेट्स में धमाका कर बड़ा हमला किया गया। वह आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती भी बन सकता है। रक्षा मामलों के जानकार डॉ. एसपी विर्दी कहते हैं कि यह एक बड़ा थ्रेट है। जिस तरीके से पेजर के भीतर बैटरी को बदलकर धमाका किया गया। उससे तो आतंकियों को एक बड़ी टिप मिल गई है। ऐसे कोई भी कभी भी हाथों में मौजूद रहने वाले मोबाइल या अन्य गैजेट के साथ छेड़खानी करके बड़े से बड़ा हमला भी कर सकता है। हालांकि इस पूरे मामले के सामने आने के बाद दुनिया भर की तमाम खुफिया एजेंसियां और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई एजेंसियां और ज्यादा मुस्तैद हो गई हैं।

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