नेपाल: सत्ता गई, पार्टी टूटी, लेकिन नहीं टूटा है ओली का हौसला
ओली के हाथ से प्रधानमंत्री की कुर्सी जाने के चार महीनों के बाद यूएमएल का ये अधिवेशन हो रहा है। इस पर पूरे देश की नजर है। इसकी वजह यह है कि यूएमएल अभी भी देश की सबसे मजबूत राजनीतिक पार्टी है। अगले चुनाव में यह एक अहम दावेदार रहेगी...
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नेपाल के प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल- यूनाइटेड मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) के चल रहे राष्ट्रीय अधिवेशन से ये साफ संकेत उभरा है कि पार्टी ने अगले आम चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। तीन दिन का ये अधिवेशन शुक्रवार को शुरू हुआ। रविवार को पार्टी के नए पदाधिकारियों के चुनाव के साथ यह पूरा होगा। इस अधिवेशन के दौरान पार्टी अपना राजनीतिक प्रस्ताव पारित करेगी। अधिवेशन की कार्यवाही बंद कमरों में चल रही है।
अब यह लगभग तय है कि पूर्व प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया जाएगा। लेकिन 15 बाकी महत्वपूर्ण पदों में से कुछ के लिए चुनाव में रस्साकशी होने की संभावना है। शुक्रवार को ओली ने यह साफ संकेत दिया कि सीपीएन-यूएमएल ने अगले चुनाव के लिए अपना अभियान शुरू कर दिया है। ओली ने कहा- ‘सभी स्तरों के लिए चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं। अब हम चुनाव की तैयारी में हैं- हमारी तैयारी यूएमएल के लिए नहीं, बल्कि देश के लिए है।’ ओली ने कहा कि यूएमएल संविधान को लागू करे और देश की संप्रभुता और लोकतंत्र की रक्षा कर सके, इसके लिए जरूरी है कि वह अगले चुनाव में पूरा बहुमत हासिल करे।
मिल कर लड़ा था 2017 का चुनाव
ओली के हाथ से प्रधानमंत्री की कुर्सी जाने के चार महीनों के बाद यूएमएल का ये अधिवेशन हो रहा है। इस पर पूरे देश की नजर है। इसकी वजह यह है कि यूएमएल अभी भी देश की सबसे मजबूत राजनीतिक पार्टी है। अगले चुनाव में यह एक अहम दावेदार रहेगी। 2017 के चुनाव में यूएमएल ने सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था। तब यूएमल सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। माओवादी पार्टी के साथ मिल कर उसने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। 2018 में इन दोनों ने आपस में विलय कर लिया।
लेकिन दोनों गुटों के नेताओं के बीच टकराव पैदा हो जाने के कारण ओली प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाला माओवादी गुट इस साल यूएमएल से अलग हो गया। अभी वह नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व में बनी सरकार में शामिल है। दहल गुट के यूएमएल से निकलने के कुछ समय बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल भी यूएमएल से अलग हो गए। उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली है।
फिर सरकार बनाने का दावा
पर्यवेक्षकों के मुताबिक अपने राष्ट्रीय अधिवेशन से ओली यह संदेश देने की कोशिश में हैं कि इस साल हुए विभाजनों से उनकी पार्टी कमजोर नहीं हुई है। देश में संसदीय चुनाव में लगभग साल भर का समय ही बाकी है। यूएमएल का दावा है कि उसके बाद फिर उसकी ही सरकार बनेगी। ओली ने शुक्रवार को दावा किया कि अधिक से अधिक लोग यूएमएल में शामिल हो रहे हैं। अब तक हजारों लोग पार्टी की सदस्यता ले चुके हैं।
यूएमएल ने अपने अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में दूसरे दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया था। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, जनता समाजवादी पार्टी के नेता उपेंद्र यादव, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के महंत ठाकुर और कई दूसरे दलों के नेता इस मौके पर उपस्थित हुए। लेकिन आमंत्रित होने के बावजूद पुष्प कमल दहल नहीं आए।