एनआरआई इन दस्तावेजों के सहारे भारत में ले सकते हैं अपने सपनों का घर
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घर खरीदना हर किसी का सपना होता है। अगर आप एनआरआई हैं तो आपके पास भारत में निवेश करने का बहतरीन विकल्प मौजूद है। रियल एस्टेट में निवेश करना सबसे पसंदीदा विकल्प होत सकता है। अगर एनआरआई भारत में घर खरीदना चाहते हैं तो कुछ दस्तावेजों की आवश्यकता से उनका यह सपना पूरा हो सकता है।
भारत में संपत्ति खरीदने या बेचने की रूचि रखने वाले एनआरआई निवेशकों को भारत में संपत्ति लेनदेन के बारे में समझना महत्वपूर्ण है, लेकिन सही दस्तावेज न होने के कारण आपको इसमें अनावश्यक देरी का भी सामना करना पड़ सकता है।
रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की शुरुआत इसलिए की गई कि रियल एस्टेट लेनदेन में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया जा सके। एनआरआई को भारत में संपत्ति खरीदने के लिए निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी।
पासपोर्ट
एनआरआई को भारत में संपत्ति खरीदने के लिए भारतीय पासपोर्ट बनवाने की आवश्यकता होगी। पासपोर्ट के आवेदन के लिए भारतीय दूतावास में या अपने देश के विदेशी वाणिज्य दूतावास में आवेदन कर सकते हैं। भारतीय संपत्ति बाजार में निवेश करने के लिए पासपोर्ट होना अनिवार्य है।
हालांकि, यदि आप भारतीय मूल (पीआईओ) या ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (ओसीआई) के व्यक्ति हैं, तो आपको संबंधित पीआईओ और ओसीआई कार्ड प्रस्तुत करने होंगे।
एड्रेस प्रूफ
एनआरआई को भारत में संपत्ति खरीदने या बेचने के लिए अपने एड्रेस प्रूफ या पर्याप्त दस्तावेज जमा कराने होंगे। दस्तावेजों कीअनिवार्य सूची में टेलीफोन बिल, राशन कार्ड, बिजली बिल, एलआईसी पॉलिसी व मोबाइल का बिल शामिल है।
अपने विदेशी आवास के प्रमाण पत्रों के अतिरिक्त कुछ जरूरी दस्तावेज जैसे, ड्राइविंग लाइसेंस, पहचान पत्र, वर्क परमिट, सोशल सुरक्षा कार्ड, क्रेडिट कार्ड, आखिरी छह महीनों के एनआरई या एनआरओ बैंक खातों के स्टेटमेंट दे सकते हैं।
पैन कार्ड
भारत में कर योग्य आय को ट्रैक करने के लिए पैन कार्ड बनाया गया है। आप ऑनलाइन आवेदन करके भारत में आसानी से पैन कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। एनआरआई व्यक्ति संपत्ति बेचता है तो बिक्री से उत्पन्न होने वाला पूंजीगत लाभ भी कर के अधीन होगा। हालांकि पैन की अनुपस्थिति में एनआरआई/पीआईओ/ओसीआई के फार्म 60 का प्रयोग कर सकतेे हैं।
पॉवर ऑफ अटॉर्नी
अधिकांश एनआरआई केवल दोस्तों, रिश्तेदारों व दलालों द्वारा सभी जमीनी कामकाज पूरा करने की योजना बनाते हैं। हालांकि संपत्तियों के मामले में लेनदेन के प्रत्येक चरण में एनआरआई का उपस्थित होना मुश्किल होता है।
उन स्थितियों में जहां लेनदेन में बहुत समय लगता है, एनआरआई भारत में एक कानूनी प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है और पॉवर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से लेनदेन को पूरा करने की अनुमति देता है।