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Pakistan New Army Chief: अब पाकिस्तान में हर तरफ यही चर्चा, कौन बनेगा नया सेनाध्यक्ष?
सार
नए सेनाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सैन्य और नागरिक अधिकारियों के बीच मतभेद हैं। रक्षा मंत्री ने नियुक्ति प्रक्रिया सोमवार से शुरू होने की बात कही है, लेकिन गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने कहा कि दो दिन में नए सेनाध्यक्ष के नाम का एलान हो जाएगा।
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पाकिस्तानी सेना अध्यक्ष कमर जावेद बाजवा
- फोटो : Daily Times Pakistan
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विस्तार
पाकिस्तान में नए सेनाध्यक्ष की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने इन आशंकाओं का खंडन कर दिया है कि वे नियुक्ति के लिए शहबाज शरीफ सरकार की तरफ से भेजे गए नाम को मंजूरी देने से इनकार कर सकते हैं। अल्वी के साफ कहने के बाद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एलान किया कि नियुक्ति प्रक्रिया सोमवार से शुरू होगी।
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प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसीलिए हर सप्ताहांत में लाहौर जाने का अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। वे अब नियुक्ति तक राजधानी में ही बने रहेंगे।
इस बीच, अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक खबर में कहा गया है कि नए सेनाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सैन्य और नागरिक अधिकारियों के बीच मतभेद हैं। रक्षा मंत्री ने नियुक्ति प्रक्रिया सोमवार से शुरू होने की बात कही है, लेकिन गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने शुक्रवार को कहा कि दो दिन में नए सेनाध्यक्ष के नाम का एलान हो जाएगा। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक उसे कुछ उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया है कि ये एलान रविवार को हो सकता है। ऐसी खबरों को सेना और सरकार में मतभेदों का संकेत माना गया है।
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बहुत से जानकार पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था एक ‘हाइब्रिड सिस्टम’ कहते हैं। यानी ऐसा सिस्टम, जिसमें आम प्रशासन में निर्वाचित सरकार और सेना नेतृत्व की बराबर भूमिका रहती है। इसीलिए पाकिस्तान में सेनाध्यक्ष कौन बनता है, इस पर दुनिया की निगाह रहती है। आम तौर पर रक्षा और विदेश मामलों में सेनाध्यक्ष की प्रमुख भूमिका रहती है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहा कि इस मामले में सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है।
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पहले यह खबर आई थी कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके बड़े भाई नवाज शरीफ में इस बात पर सहमति बनी है कि रिटायर हो रहे सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा के बाद के सबसे सीनियर अधिकारी को नया अध्यक्ष बनाया जाए। इसके बावजूद यहां सियासी हलकों में नए सेनाध्यक्ष के लिए कम से कम पांच नामों की चर्चा चल रही है।
अगर सबसे वरिष्ठ अधिकारी को यह पद दिया गया, तो लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर नए सेनाध्यक्ष बनेंगे। मुनीर के बारे में यह चर्चित है कि उन्हें पूरा कुरआन जुबानी याद है। लेकिन उनकी नियुक्ति पर इसलिए संदेह जताया गया है कि पूर्व इमरान खान सरकार ने उन्हें खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख पद से बर्खास्त कर दिया था। वैसे अगर उन्हें सेनाध्यक्ष बनाना है, तो उनकी सेवा शर्तों में हेरफेर करनी होगी। इसकी वजह यह है कि उनकी रिटायरमेंट की तारीख जनरल बाजवा के रिटायर होने से दो दिन पहले ही है। मगर एक अनुमान यह है कि उनकी नियुक्ति से इमरान खान की परेशानी बढ़ेगी, इसलिए शरीफ सरकार यह दांव खेल सकती है।
मुनीर के बाद सबसे वरिष्ठ अधिकारी ले.ज. शमशाद मिर्जा हैं। उन्हें टैक्टिकल ऑपरेशन्स में माहिर माना जाता है। इसके अलावा वे संयुक्त राष्ट्र के कई शांति मिशन में तैनात रह चुके हैं और उन्हें विवादों से मुक्त अधिकारी माना जाता है। उनके बाद सबसे सीनियर ले.ज. अजहर अब्बास हैं। उन्होंने कुछ समय पहले भारत के साथ हुए सीजफायर पर अमल का नेतृत्व किया था। वे उसी रेजिमेंट से आते हैं, जिससे जनरल बाजवा आए थे। फिलहाल वे 41 इस्लामी देशों के आतंकवाद विरोधी सैन्य गठबंधन के कमांडर हैँ। लेकिन वे शिया मुस्लिम हैं और यह बात उनके खिलाफ जा सकती है।
चौथे और पांचवें नंबर जिन अफसरों की चर्चा है, वे ले.ज. नौमान महमूद और ले.जय फैज हमीद हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में ले.ज. महमूद आमेर का नाम भी उछाला गया है। लेकिन तीनों काफी जूनियर हैं। वैसे मीडिया रिपोर्टों में ध्यान दिलाया गया है कि अतीत में कई ऐसे अफसर पाकिस्तान में सेनाध्यक्ष बने हैं, जो वरिष्ठता के मामले में टॉप तीन में शामिल नहीं थे।