Asian Monetary Fund: अब शुरू हो गई है एशिया मुद्रा कोष बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा
विशेषज्ञों के मुताबिक आईएमएफ का विकल्प तैयार करना एक कठिन चुनौती है। इस्राइल के वेंचर कैपिटल प्लैटफॉर्म आवरक्राउड के हांगकांग स्थित एशिया डायरेक्टर माइकल इग्नेसियस हो ने कहा है कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अलग-अलग मुद्राओं को जगह दे रहे हैं...
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तर्ज पर एशिया मॉनेटरी फंड (एएमएफ) बनाने के मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के प्रस्ताव को एक दूरगामी महत्त्व की पहल माना गया है। समझा जाता है कि अगर यह संस्था वजूद में आई तो उससे विभिन्न देशों की अमेरिकी मुद्रा डॉलर पर निर्भरता घटेगी। इब्राहिम ने एएमएफ के गठन का प्रस्ताव पिछले महीने के आखिर में अपनी चीन यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने रखा था। उसके बाद से अब तक अनेक देश इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। इंडोनेशिया के आर्थिक मामलों के मंत्री एरलांग्गा हार्तातो अखबार जकार्ता पोस्ट से कहा- यह एक अच्छा विचार है। लेकिन इसको व्यावहारिक रूप तभी दिया जा सकेगा, अगर विभिन्न देश इसे लेकर लेकर वचनबद्धता दिखाएं।
विशेषज्ञों के मुताबिक आईएमएफ का विकल्प तैयार करना एक कठिन चुनौती है। इस्राइल के वेंचर कैपिटल प्लैटफॉर्म आवरक्राउड के हांगकांग स्थित एशिया डायरेक्टर माइकल इग्नेसियस हो ने कहा है कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अलग-अलग मुद्राओं को जगह दे रहे हैं। लेकिन जहां तक नए सिरे मौद्रिक नीति को संतुलित करने का सवाल है, तो यह काम आसान नहीं है। इसमें जो लागत आएगी, उसका बोझ उठाने के लिए बहुत कम देश तैयार होंगे।
इब्राहिम ने अपना प्रस्ताव उस समय रखा, जब कई देश अंतरराष्ट्रीय कारोबार में डॉलर छोड़ कर चीनी मुद्रा युवान को अपना रहे हैं। एएमएफ के गठन को इस परिघटना से संबंधित माना गया है। लेकिन हांगकांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एडविन लाइ के मुताबिक युवान को डॉलर की जगह लेने में लंबा समय लगेगा। इसमें दस से 20 साल तक का वक्त लग सकता है। बीजिंग स्थित सेंटर फॉर चाइना एंड ग्लोबलाइजेशन में सीनियर फेलॉ हे वेइवेन ने ध्यान दिलाया है कि अभी अंतरराष्ट्रीय कारोबार में होने वाले कुल भुगतान का सिर्फ 1.9 फीसदी हिस्सा युवान में होता है। जबकि 40 फीसदी भुगतान डॉलर में हो रहा है। विभिन्न देशों के विदेशी मुद्रा भंडार में युवान का हिस्सा सिर्फ तीन फीसदी है, जबकि डॉलर का 58 फीसदी। इसलिए नई अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक व्यवस्था के तुरंत साकार होने की संभावना कम है।
हे वेइवेन ने कहा- ‘युवान को अभी लंबी यात्रा तय करनी होगी। लेकिन प्रस्तावित एएमएफ के गठन से युवान की अंतरराष्ट्रीय पैठ बढ़ाने में मदद मिल सकती है। नई संस्था का सहयोग अरब मॉनेटरी फंड से कायम हो सकता है। अरब मॉनेटरी फंड को भी इसी तर्ज पर बनाया गया है।’
अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपे एक विश्लेषण के मुताबिक एएमएफ के गठन से एशियाई देशों की सौदेबाजी की ताकत बढ़ेगी। आम शिकायत है कि आईएमएफ में एशियाई देशों को उनकी अर्थव्यवस्था के आकार के मुताबिक नुमाइंदगी नहीं मिली हुई है। वहां चीन और जापान सहित तमाम एशियाई देशों के सिर्फ 21.8 फीसदी वोट हैं, जबकि अकेले अमेरिका को 16.5 फीसदी वोट की ताकत हासिल है। चूंकि आईएमएफ के ढांचे में सुधार की एशिया की मांग आगे नहीं बढ़ सकी है, इसलिए मलेशिया जैसे देश ने एशिया का अपना मुद्रा कोष बनाने का प्रस्ताव पुनर्जीवित कर दिया है। गौरतलब है कि ऐसा प्रस्ताव सबसे 1997 में एशियाई वित्तीय संकट के समय सामने आया था।