{"_id":"617fccbdfb267d530d5823a3","slug":"nobel-peace-prize-awardee-lake-walesa-could-be-inside-the-bars","type":"story","status":"publish","title_hn":"पोलैंड: नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित लेक वॉलेसा के जेल जाने की आई नौबत","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
पोलैंड: नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित लेक वॉलेसा के जेल जाने की आई नौबत
Mon, 01 Nov 2021 04:47 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉरसा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉरसा
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 01 Nov 2021 04:47 PM IST
सार
वॉलेसा पर 1990 के दशक के दौरान भी कम्युनिस्ट शासनकाल के दौरान पोलैंड की सुरक्षा एजेंसी के साथ मिल कर काम करने के आरोप लगे थे। लेकिन साल 2000 में उन्हें एक अदालत ने उस आरोप से बरी कर दिया था। लेकिन इस बार सामने आए दस्तावेजों के पक्का होने की पुष्टि विशेषज्ञों ने कर दी है...
विज्ञापन
लेक वॉलेसा
- फोटो : Agency (File Photo)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कभी कम्युनिस्ट व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन कर उभरे लेक वॉलेसा अब न्याय-बाधा के आरोप में जेल जा सकते हैं। पोलैंड में कम्युनिस्ट व्यवस्था खत्म होने के बाद वॉलेसा वहां के राष्ट्रपति बने थे। इससे पहले जब वे कम्युनिस्ट सिस्टम से संघर्ष का नेतृत्व कर रहे थे, तब 1983 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
विज्ञापन
अब सामने आया है कि वॉलेसा का संबंध कम्युनिस्ट शासन के दौरान पोलैंड की गुप्त पुलिस से था। लेकिन इस बारे में उन्होंने सच नहीं बताया। जब 2016 में ये आरोप पहली बार लगा था, तब वॉलेसा को पूछताछ के लिए बुलाया गया। पूछताछ के दौरान वॉलेसा को वे दस्तावेज दिखाए गए थे, जिनमें जिक्र था कि वॉलेसा गुप्त पुलिस के मुखबिर थे। लेकिन वॉलेसा ने कहा कि ये फर्जी दस्तावेज हैं। उनका कभी गुप्त पुलिस से संबंध नहीं रहा।
विज्ञापन
1980 में सॉलिडरिटी आंदोलन के नेता के रूप में वॉलेसा विश्व प्रसिद्ध हुए थे। तब पश्चिमी देशों ने उन्हें लोकतंत्र समर्थक नेता बता कर उनका समर्थन किया था। 2016 में वॉलेसा पर आरोप पोलैंड के इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल रिमेम्ब्रेंस (आईपीएन) ने लगाया। अब इस संस्था ने विशेषज्ञों की राय और अन्य दस्तावेजों के आधार पर कहा है कि 2016 में जो दस्तावेज वॉलेसा को दिखाए गए, वे सही थे। अब वॉलेसा पर गुप्त पुलिस की मुखबिरी करने के साथ-साथ इंसाफ में रुकावट डालने का आरोप भी लग गया है।
विज्ञापन
जिन दस्तावेजों में वॉलेसा के मुखबिर होने की बात कही गई है, वे 1970 के दशक के हैं। उन्हें कम्युनिस्ट शासन के आखिरी प्रधानमंत्री जनरल जेस्लाव किस्जेजाक की विधवा के घर से बरामद किया गया। उन तकरीबन 150 दस्तावेजों में मुखबिरों को हुए भुगतान का ब्योरा भी है। साथ ही ऐसी कई रिपोर्टें हैं, जिन्हें मुखबिरों ने गुप्त पुलिस को भेजा था। दस्तावेजों की जांच के दौरान विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि उनमें से दर्जनों दस्तावेज वॉलेसा ने व्यक्तिगत रूप से तैयार किए थे।
आईपीएन पोलैंड में एतिहासिक अपराधों को सामने लाने के मकसद से बनाई गई संस्था है। उसने अब वॉलेसा पर न्याय बाधा का इल्जाम लगाया है। पोलैंड के कानून के तहत इस आरोप में छह महीने से लेकर आठ साल तक की कैद हो सकती है। ताजा आरोप लगने के बाद वॉलेसा ने उन दस्तावेजों को एक बार फिर फर्जी बताया है। एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप ‘इतिहास में उनकी भूमिका घटाने की शर्मनाक’ कोशिश हैं।
वॉलेसा ने कहा है कि इतिहास में हुए अपराधों को तय करने का काम अभियोजन कार्यालय का नहीं है। यह काम इतिहासकारों का है। उन्होंने आरोप लगाया कि आईपीएन सत्ताधारी लॉ एंड जस्टिस पार्टी के इशारे पर काम कर रही है। वॉलेसा मौजूदा प्रधानमंत्री जारोस्वा कैक्जिंस्की के आलोचक रहे हैं।
वॉलेसा पर 1990 के दशक के दौरान भी कम्युनिस्ट शासनकाल के दौरान पोलैंड की सुरक्षा एजेंसी के साथ मिल कर काम करने के आरोप लगे थे। लेकिन साल 2000 में उन्हें एक अदालत ने उस आरोप से बरी कर दिया था। लेकिन इस बार सामने आए दस्तावेजों के पक्का होने की पुष्टि विशेषज्ञों ने कर दी है।