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लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री हरीरी की हत्या में हिजबुल्ला नेता के शामिल होने के सबूत नहीं
Tue, 18 Aug 2020 08:53 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, लेडशेंडम (नीदरलैंड)
पीटीआई, लेडशेंडम (नीदरलैंड)
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 18 Aug 2020 08:53 PM IST
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रफीक हरीरी (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
नीदरलैंड में संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक न्यायाधिकरण ने कहा है कि साल 2005 में एक आत्मघाती ट्रक बम हमले में लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफीक हरीरी की हत्या में आतंकी संगठन हिजबुल्ला के नेतृत्वकर्ताओं या सीरिया के संलिप्त रहने का कोई सबूत नहीं है। न्यायाधिकरण ने यह बात मंगलवार को कही।
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लेबनान के लिए विशेष न्यायाधिकरण के पीठासीन न्यायाधीश डेविड रे ने कहा कि अपनी मौत से कुछ महीने पहले हरीरी लेबनान में सीरिया के और सीरिया में हिजबुल्ला के प्रभाव को घटाने के समर्थक थे। बता दें कि हरीरी की 14 फरवरी 2005 को हत्या कर दी गई थी। उस वक्त वह लेबनान के सबसे प्रमुख सुन्नी नेता थे।
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डेविड ने कहा कि बम हमले में संलिप्त रहने के आरोपियों और हिजबुल्ला के चार सदस्यों के खिलाफ मुकदमे में साक्ष्यों का अध्ययन करने वाले न्यायाधीशों का यह मानना है कि सीरिया और हिजबुल्ला का हरीरी व कुछ राजनीतिक सहयोगियों का खात्मा करने का मंसूबा रहा होगा।
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हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में कोई सबूत नहीं है कि हिजबुल्ला नेतृत्व की हरीरी की हत्या में संलिप्तता रही थी और इसमें सीरियाइयों की भी सीधी संलिप्तता का कोई सबूत नहीं है। न्यायाधीश ने इस मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए यह बात कही।
न्यायाधिकरण हिजबुल्ला या सीरिया पर कोई फैसला नहीं दे सकता क्योंकि वह सिर्फ आरोपी व्यक्तियों पर ऐसा कर सकता है, न कि संगठनों या देश पर। बेरूत में चार अगस्त को हुए विस्फोट में 180 लोगों की मौत और 6,000 से अधिक लोगों के घायल होने के मद्देनजर इस मामले में फैसला दो हफ्ते के लिए टाल दिया गया था।
इस मुकदमे की सुनवाई इस हमले में हिजबुल्ला के चार सदस्यों की कथित भूमिका के इर्द गिर्द केंद्रित रही। इस ट्रक बम हमले में 21 अन्य लोग भी मारे गए थे और 226 लोग घायल हुए थे।