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Hindi News ›   World ›   Nirav Modi extradition trial begins at the Westminster Magistrate Court in London

Nirav Modi Extradition Case: नीरव मोदी के वकील ने की मीडिया को कार्यवाही से दूर रखने की मांग, जज ने ठुकराया अनुरोध

Mon, 07 Sep 2020 07:26 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 07 Sep 2020 07:26 PM IST
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Nirav Modi extradition trial begins at the Westminster Magistrate Court in London
नीरव मोदी - फोटो : एएनआई (फाइल)

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण के लिए दायर मुकदमे के दूसरे चरण की सुनवाई लंदन की वेंटमिंस्टर अदालत में सोमवार को शुरू हो गई। सुनवाई का यह चरण पांच दिन तक चलेगा। दक्षिण लंदन में स्थित वांड्सवर्थ जेल में कैद मोदी वीडियो लिंक के माध्यम से पेश हुआ। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय का दल भी अदालत में मौजूद रहा।

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मामले की सुनवाई शुरू होते ही नीरव मोदी के वकील ने जज से प्रेस (मीडिया) के सदस्यों को कार्यवाही से दूर रखने का अनुरोध किया। न्यायाधीश ने प्रेस के सदस्यों से पूछा कि क्या वे इस पर सहमत हैं। प्रेस के सदस्यों से राय लेने के बाद न्यायाधीश ने नीरव मोदी के वकील के इस अनुरोध को खारिज कर दिया। 
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नीरव मोदी (49) पर पंजाब नेशनल बैंक से करीब 14 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। मार्च में गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में है। मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के मामले में भी भारत में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज है। ब्रिटेन की क्राउन अभियोजन सेवा (सीपीएस) के जरिए भारत ने उसके प्रत्यर्पण के लिए मुकदमा दायर किया हुआ है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के प्रतिनिधि अदालत में मौजूद थे। ब्रिटेन की शाही अभियोजन सेवा (सीपीएस) जिला न्यायाधीश सैम्युल गूजी के समक्ष मुकदमे की पैरवी कर रही है। भारत सरकार द्वारा अतिरिक्त पुख्ता सबूत जमा कराने के बाद दलीलों को पूरा करने के लिए यह सुनवाई महत्वपूर्ण है।

इसके बाद अदालत अतिरिक्त प्रत्यर्पण आवेदन को देखेगी, जो इस साल के शुरू में भारतीय अधिकारियों ने किए हैं और ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने उसे प्रमाणित किया है। इसमें मोदी के खिलाफ सबूतों को नष्ट करने, गवाहों को धमकाने या जान से मारने की धमकी के आरोप जोड़े गए हैं।


मामले की अतिरिक्त सुनवाई तीन नवंबर को होनी है, जिसमें न्यायाधीश सबूतों को स्वीकार करने पर व्यवस्था देंगे जो उनके समक्ष रखे जाएंगे और एक दिसंबर को दोनो पक्ष अंतिम अभिवेदन देंगे। इसका मतलब है कि भारतीय अदालतों में मोदी जवाबदेह है या नहीं, इसका फैसला दिसंबर में अंतिम सुनवाई के बाद ही आएगा।

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