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US Vs China: बाइडन की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति दस्तावेज में चीन ही है सबसे बड़ी चिंता

Fri, 14 Oct 2022 07:51 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 14 Oct 2022 07:51 PM IST
सार

US Vs China: अमेरिकी थिंक टैंक एलायंस फॉर सिक्योरिंग डेमोक्रेसीज के सह-निदेशक जैक कूपर ने इस दस्तावेज का विश्लेषण करते हुए ध्यान दिलाया है कि इसमें 71 जगहों पर रूस का उल्लेख हुआ है। चीन का उल्लेख 55 स्थानों पर हुआ है। यूक्रेन की चर्चा 32 बार हुई है...

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newly released national security strategy of the Joe Biden administration that China is biggest concern
Joe Biden and Xi jinping - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

अमेरिका में जो बाइडन प्रशासन की नई जारी हुई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति से साफ है कि चीन ही अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता है। हालांकि बुधवार को जारी किए गए इस 48 पेज के दस्तावेज में रूस की भी बार-बार चर्चा आई है, लेकिन सबसे अधिक चिंता के साथ चीन का उल्लेख हुआ है। इसमें यह दो टूक कहा गया है- चीन अमेरिकी की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक चुनौती है।

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बाइडन प्रशासन ने सत्ता में आने के 21 महीनों के बाद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी की है। कूटनीति विशेषज्ञों का कहना है कि जो कुछ इस रणनीति में कहा गया है, उनमें से कई बातों पर बाइडन प्रशासन पहले से अमल कर रहा है। इनमें चीन पर खास ध्यान केंद्रित करना और उसकी बढ़ रही ताकत को रोकने की कोशिशें करना शामिल है।

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अमेरिकी थिंक टैंक एलायंस फॉर सिक्योरिंग डेमोक्रेसीज के सह-निदेशक जैक कूपर ने इस दस्तावेज का विश्लेषण करते हुए ध्यान दिलाया है कि इसमें 71 जगहों पर रूस का उल्लेख हुआ है। चीन का उल्लेख 55 स्थानों पर हुआ है। यूक्रेन की चर्चा 32 बार हुई है। इसके अलावा कोई देश ऐसा नहीं है, जिसकी चर्चा दो अंकों में गई हो। नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) का 17 बार और यूरोपियन यूनियन की चर्चा क्रमशः 17 और 14 बार हुई है।

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दस्तावेज से यह साफ हुआ है कि जो बाइडन की विदेश नीति में चीन का मुकाबला करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। टीवी चैनल सीएनएन के एक विश्लेषण में कहा गया है- बाइडंन ने अपनी जो विश्व दृष्टि सामने रखी है, उसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती चीन ही है।

रणनीति पत्र की शुरुआत में अपनी टिप्पणी में जो बाइडन ने लिखा है- ‘पूरी दुनिया में अमेरिकी नेतृत्व की जरूरत आज भी उतनी ही है, जितना पहले कभी थी। इस समय हम विश्व व्यवस्था के भावी आकार को तय करने की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से गुजर रहे हैं। हम अपने भविष्य को उन लोगों की मर्जी पर नहीं छोड़ेंगे, जो मुक्त, खुली, समृद्ध और सुरक्षित दुनिया की हमारी दृष्टि से सहमत नहीं हैं।’

रणनीति दस्तावेज में कहा गया है- ‘हमारी दृष्टि को सबसे ज्यादा चुनौती उन शक्तियों से मिल रही है, जो संशोधनवादी विदेशी के साथ तानाशाही शासन पर आधारित हैं।’ विश्लेषकों के मुताबिक ये सीधा इशारा चीन और रूस की तरफ है। लेकिन दस्तावेज में कहा गया है कि इन दोनों से पेश आ रही चुनौतियां अलग-अलग प्रकार की हैं।

इसमें कहा गया है- ‘रूस मुक्त और खुली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए तात्कालिक खतरा पेश कर रहा है। यूक्रेन में उसके क्रूर युद्ध से साफ हो गया है कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के बुनियादी नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है। लेकिन चीन ऐसा एकमात्र प्रतिस्पर्धी है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नया आकार देने का इरादा रखता है और साथ ही ऐसा करने के लिए जरूरी आर्थिक, कूटनीति, सैनिक और तकनीकी क्षमता को भी हासिल करता जा रहा है।’

ये दस्तावेज जारी करने के बाद बाइडन प्रशासन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाकार जेक सुलिवन ने पत्रकारों से कहा- ‘यह दशक प्रतिस्पर्धा, खास कर चीन के साथ प्रतिस्पर्धा की शर्तों को तय करने के लिए लिहाज से निर्णायक है। हमारे सामने आगे बने रहने की विशाल चुनौती है। अगर हम इस दशक में पराजित हो गए, तो फिर हम कभी मुकाबला नहीं कर पाएंगे।’

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