इस्राइल में नेतन्याहू को लगा झटका, गेंट्ज को सरकार गठन का न्योता
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इस्राइल में राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन ने इस महीने अनिर्णीत रहे आम चुनावों के तहत रविवार को विपक्षी नेता बेनी गेंट्ज को नई सरकार गठित करने का पहला मौका देने का निर्णय लिया। इसे कार्यवाहक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले रिवलिन ने दोनों नेताओं को आपात बैठक के लिए बुलावा भेजकर पिछले एक साल से चल रहे राजनीतिक गतिरोध को सुलझाने का प्रयास किया।
राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार देर शाम बेनी गेंट्ज को पहला मौका दिए जाने की घोषणा की। यह घोषणा राष्ट्रपति की तरफ से इस्राइल की अगली सरकार का नेतृत्वकर्ता तय करने के लिए सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ किए गए सलाह मशविरे के बाद की गई। देश में कोरोना वायरस के प्रसार के खतरे को देखते हुए राजनीतिक दलों पर गतिरोध तोड़ने का दबाव बना हुआ था ताकि पंगु बनी हुई राजनीतिक व्यवस्था को सक्रिय करते हुए इस खतरे से निपटा जा सके।
बता दें कि देश में राष्ट्रपति उस उम्मीदवार को नियुक्त करते हैं, जिसे वे संसदीय बहुमत हासिल कर सरकार गठित करने के लिए ज्यादा उपयुक्त मानते हैं। देश में पिछले एक साल में तीसरी बार गत 2 मार्च को हुए चुनाव परिणामों के बाद राष्ट्रपति के लिए यह काम बेहद कठिन हो गया था।
इन नेतन्याहू की लिकुद पार्टी इन चुनावों में सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है, लेकिन छोटी धार्मिक और राष्ट्रवादी पार्टियों के सहयोग के बावजूद वह 61 सीट का संसदीय बहुमत पाने से थोड़ा पीछे रह गई है। दूसरी तरफ, नेतन्याहू की विपक्षी पार्टियों के पास 62 सीटों का संयुक्त बहुमत है।
इन पार्टियों ने ही रविवार को राष्ट्रपति रिवलिन से बेनी गेंट्ज को नामित प्रधानमंत्री बनाए जाने की सिफारिश की थी, लेकिन विपक्षी दलों में भी कई मुद्दों पर आपस में फूट हो गई है। इसके चलते बेनी गेंट्ज के लिए सरकार चला पाने के आसार धूमिल ही हैं।
नेतन्याहू ने दिया था गेंड्ज को गठबंधन का न्योता
कोरोना वायरस से निपटने के लिए कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर नेतन्याहू ने बेनी गेंट्ज को एक आपातकालीन सरकार के गठन में शामिल होने का न्योता दिया था। बेनी गेंट्ज ने इस व्यवस्था के लिए दरवाजे खुले छोड़े हैं, लेकिन साथ ही इस प्रस्ताव को झूठा बताते हुए खारिज भी किया है।
नेतन्याहू को मिली कोर्ट से राहत
नेतन्याहू को भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में रविवार को उस समय अहम राहत मिली, जब येरूसलम कोर्ट ने कोरोना वायरस के खतरे के चलते उनके मुकदमे का ट्रायल दो महीने के लिए टाल दिया। अब 24 मई के बाद कार्रवाई चालू होगी।