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ऐतिहासिक प्रमाण जुटाने के लिए नेपाल सरकार बनाएगी अध्ययन समिति

Wed, 20 Nov 2019 09:51 PM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला 
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला  Published by: आसिम खान Updated Wed, 20 Nov 2019 09:51 PM IST
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Nepal will form study committee to gather historical evidence
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली (फाइल फोटो)

नेपाल सरकार ने कालापानी एवं अन्य सीमा क्षेत्र सम्बन्धी विवादों के समाधान को निगाह में रखकर एक उच्च स्तरीय अध्ययन समिति बनाने का निर्णय किया है। नेपाल में कई तरफ से उठ रही मांग के मद्देनजर ओली सरकार ने तय किया है कि इससे जुड़े ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर ही राजनियक स्तर पर बातचीत करके इस मसले का समाधान की मजबूत कोशिश की जाए।

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उच्च स्तरीय अध्ययन समिति में शामिल होने वाले विशेषज्ञों के नाम तय होने बाकी हैं। कैबिनेट की अगली बैठक में इन नामों और काम के दायरे के बारे में अंतिम निर्णय हो जाने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ओली अपनी कैबिनेट में फेरबदल कर रहे हैं और नई कैबिनेट में इस बारे में नए तेवर से विचार होना संभव है।
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नेपाल में कालापानी का विवाद उठने के बाद से सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर काफी गरमाहट है। राजनैतिक दलों से जुड़ी अनेक छात्र यूनियनों समेत नागर समाज के संगठनों की ओर से जोर-शोर से यह कहा जा रहा है कि सरकार कालापानी, लिपू लेख और लिम्पियाधुरा को नेपाली इलाकों के रूप में फिर से वापस पाने के लिए हर संभव कोशिश करे।
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इस दबाव का ही असर था कि नेपाली संसद की राज्य मामलों की स्थायी समिति ने पिछले हफ्ते सरकार को निर्देशित किया था कि कालापानी, लिपू लेख और लिम्पियाधुरा को शामिल करते हुए नेपाल का नया नक्शा जारी किया जाय।

पुराना चला आ रहा है विवाद

दोनों पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से अनेक सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर विवाद है। दोनों देशों ने सीमा क्षेत्र कार्यकारी दल का गठन भी इसी तरह के मसलों को सुलझाने के लिए 2014 में किया था। दोनों देशों के संयुक्त आयोग की 2014 में हुई उच्च स्तरीय बैठक में  माध्यम से दोनों देश इस दिशा में विशेष सक्रिय हुए थे। इस कार्यदल की पांचवी बैठक पिछली सितंबर में काठमांडो में हुई थी और तब यह तय हुआ था कि सीमावर्ती क्षेत्र के सर्वे के लिए सेटेलाइट चित्रों की मदद लेने की संभावना को भी तलाशा जाए।


23 जिलों के 71 स्थानों को लेकर है विवाद

भारत और नेपाल के बीच 71 स्थानों को लेकर विवाद है और ये जगहें 23 जिलों में आती हैं। पूर्व, पश्चिम और दक्षिण से भारत से घिरे नेपाल के लिए इन स्थानों के बारे में आपसी सहमति के साथ कुछ तय कर पाने का महत्व हाल की घटनाओं के बाद फिर से बढ़ गया है।

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