Nepal: नेपाल में पसरते ही जा रहे हैं चीन के पांव, आर्थिक मदद को लेकर हुआ नया करार
Nepal: अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल सरकार ने चीन के संस्कृति और पर्यटन उप मंत्री ली चुन से अनुरोध किया था कि वे अपनी नेपाल यात्रा 20 नवंबर को आम चुनाव के लिए मतदान होने के बाद करें। मगर अधिकारियों ने बताया कि चीनी पक्ष ने यह कहते हुए अनुरोध ठुकरा दिया कि ली की यात्रा राजनीतिक नहीं है...
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नेपाल में चीन की पैठ बढ़ने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को नेपाल ने 15 अरब (नेपाली) रुपये की विभिन्न परियोजनाओं के लिए एक करार चीन के साथ किया। इन परियोजनाओं का चयन नेपाल करेगा। करार पर चीन में नेपाल के राजदूत विष्णु पुकार श्रेष्ठ और चाइना इंटरनेशनल डेवलपमेंट को-ऑपरेशन एजेंसी (सीआईडीसीए) के अध्यक्ष लुओ झाओहुई ने बीजिंग में दस्तखत किए।
ये करार ठीक उस रोज हुआ, जब चीन के संस्कृति और पर्यटन उप मंत्री ली चुन ने काठमांडू की पांच दिन की यात्रा पूरी की। ली मंगलवार को यहां से हांगकांग रवाना हो गए। नेपाल सरकार के अधिकारियों ने कहा कि ली ‘निजी यात्रा’ पर काठमांडू आए थे। इसलिए इस बारे में जानकारी उनके यहां से जाने के बाद दी गई। अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल सरकार ने ली से अनुरोध किया था कि वे अपनी नेपाल यात्रा 20 नवंबर को आम चुनाव के लिए मतदान होने के बाद करें। मगर अधिकारियों ने बताया कि चीनी पक्ष ने यह कहते हुए अनुरोध ठुकरा दिया कि ली की यात्रा राजनीतिक नहीं है।
इस बीच जबकि नेपाल में आम चुनाव का माहौल गरम है, नेपाल सरकार चीन से 15 बिलियन डॉलर की विकास सहायता पाने के करार करने पर आगे बढ़ी है। सीआईडीसीए नेपाल की दूसरे देशों को विकास सहायता देने वाली एजेंसी है। नेपाल सरकार ने 13 उत्तरी जिलों में 15 छोटी परियोजनाओं के निर्माण के लिए इस एजेंसी को अपनी सूची सौंपी थी। अब हुए करार के तहत जो रकम मिलेगी, वह इन परियोजनाओं पर भी खर्च होगी।
नेपाल सरकार लगातार यह संदेश देने की कोशिश में है कि परियोजनाओं के चयन में चीन की कोई भूमिका नहीं है। विष्णु पुकार श्रेष्ठ ने काठमांडू पोस्ट को बीजिंग से फोन पर दिए इंटरव्यू में बताया- ‘करार आर्थिक और तकनीकी सहयोग के बारे में हुआ है। अब यह हम पर है कि परियोजनाओं का चयन करें और उन्हें लागू करें।’
बताया गया है कि चीन से मिली नई सहायता उस मदद के अतिरिक्त है, जो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2019 में अपनी नेपाल यात्रा के दौरान देने का एलान किया था। तब चीन ने 58 अरब (नेपाली) रुपये के बराबर की रकम विकास परियोजनाओं के लिए देने की घोषणा की थी। लेकिन कोरोना महामारी आ जाने के कारण इन परियोजनाओं पर चर्चा ठहर गई। दोनों देश अब तक तय नहीं कर पाए हैं कि ये रकम कहां खर्च की जाएगी।
इसी वर्ष चीन के विदेश मंत्री वांग यी नेपाल यात्रा पर आए थे। उसके बाद अगस्त में नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खड़का ने चीन की यात्रा की। खड़का की यात्रा के दौरान वांग ने 15 अरब रुपये की सहायता देने का वादा किया था। तब यह बताया गया था कि ये रकम इसी वर्ष यानी 2022 में विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च करने के लिए मिलेगी।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये तमाम घटनाएं नेपाल में चीन के बढ़ रहे प्रभाव का संकेत देती हैं। हालांकि मौजूदा शेर बहादुर देउबा सरकार की नीति अमेरिका और भारत समर्थक बताई जाती है, इसके बावजूद यह सरकार भी चीन के साथ रिश्ते मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।