किस तरफ है काठमांडो?: देउबा के कार्यकाल में नेपाल पर घट रहा है चीन का असर?
र बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली नेपाल सरकार की नीतियां अमेरिका की तरफ झुक रही हैं। अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से 50 करोड़ डॉलर की मदद लेने के लिए हुए करार का संसदीय अनुमोदन कराने के लिए देउबा सरकार ने अपना पूरा जोर लगा दिया...
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नेपाल सरकार की विदेश नीति संबंधी प्राथमिकताएं यहां विश्लेषकों में गहरे कयास का मुद्दा बनी हुई हैं। इस सिलसिले में इस ओर भी ध्यान खींचा गया है कि दक्षिण एशिया का ये छोटा देश अचानक दुनिया की बड़ी ताकतों की खास दिलचस्पी बन गया है। इस घटनाक्रम में सबसे ताजा जानकारी यह सामने आई है कि नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा एक अप्रैल से भारत की यात्रा करेंगे।
दो दिन नेपाल में रहेंगे चीनी विदेश मंत्री
हाल में ये धारणा बनी कि शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली नेपाल सरकार की नीतियां अमेरिका की तरफ झुक रही हैं। अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से 50 करोड़ डॉलर की मदद लेने के लिए हुए करार का संसदीय अनुमोदन कराने के लिए देउबा सरकार ने अपना पूरा जोर लगा दिया। जबकि देउबा की नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दो कम्युनिस्ट पार्टियां इसका पुरजोर विरोध कर रही थीं। साथ ही अनेक जनसंगठन भी इसके खिलाफ सड़कों पर उतरे हुए थे।
इस घटना के तुरंत बाद यूक्रेन संकट के सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र में लाए गए प्रस्तावों पर नेपाल सरकार ने अमेरिकी रुख के मुताबिक मतदान किया। देउबा सरकार के इस झुकाव को लेकर चीन में गहरी चिंता पैदा हुई। उसी सिलसिले में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने नेपाल यात्रा का कार्यक्रम बनाया। उनके 25 से 27 मार्च तक नेपाल में रहने का कार्यक्रम है। अब इसके ठीक बाद देउबा ने भारत जाने का कार्यक्रम बनाया है।
भारत आएंगे देउबा
नेपाली मीडिया में छपे ब्योरे के मुताबिक देउबा एक अप्रैल को नई दिल्ली पहुंचेंगे। दो अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी और दूसरे राजनेताओं से मुलाकात होगी। तीन अप्रैल को वे काठमांडू लौट आएंगे। देउबा पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री बने थे। उसके बाद यह उनकी पहली औपचारिक विदेश यात्रा होगी। इसके पहले पिछले साल नवंबर में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में मोदी और देउबा के बीच बातचीत हुई थी। तब दोनों नेता वहां जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में भाग लेने वहां गए थे।
हालांकि गुरुवार तक देउबा की भारत यात्रा का औपचारिक एलान नहीं हुआ था, लेकिन अखबार काठमांडू पोस्ट के मुताबिक देउबा ने बुधवार को सरकारी अधिकारियों को इस बारे में सूचित कर दिया। उसके बाद से अधिकारी यात्रा के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। इस बीच यह अनुमान लगाया गया है कि काठमांडू में चीनी विदेश मंत्री के साथ जो बातचीत होगी, देउबा उस बारे में मोदी को जानकारी देंगे।
भारत से रिश्तों को सुधारने की प्राथमिकता
नेपाल सरकार के एक उच्च अधिकारी ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘देउबा की यह छोटी, लेकिन कामकाज के लिहाज से महत्त्वपूर्ण यात्रा होगी। कुछ समय से दोनों देशों के सर्वोच्च नेतृत्व के बीच सीधे संवाद और संपर्क की कमी रही है। इस यात्रा से ये कमी दूर होगी।’
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि करीब चार साल बाद यह किसी नेपाली प्रधानमंत्री की पहली भारत यात्रा होगी। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के शासनकाल में भारत और नेपाल के संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। लेकिन देउबा अब भारत से रिश्तों को सुधारने को प्राथमिकता दे रहे हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह भी चीन के लिए चिंता का विषय हो सकता है। चीन को शायद यह भी पसंद नहीं आएगा कि वांग यी की यात्रा के तुरंत बाद देउबा ने भारत जाने का कार्यक्रम बना लिया है।