फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Nepal Prime Minister KP Sharma Oli given embarrassing statement against Dahal and Madhav kumar Nepal

बिगड़ती ही जा रही है ओली की जुबान, दहल और माधव नेपाल के खिलाफ दिया शर्मनाक बयान

Mon, 11 Jan 2021 03:55 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 11 Jan 2021 03:55 PM IST
सार

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ओली राजनीतिक संवाद के स्तर को इतना नीचे ले गए हैं, जितना पहले कभी नहीं देखा गया। इसे उन्होंने गंदा और स्तरहीन बना दिया है...

विज्ञापन
Nepal Prime Minister KP Sharma Oli given embarrassing statement against Dahal and Madhav kumar Nepal
KP sharma OLI and Pushp Kamal Dahal - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अब अपने विरोधियों के खिलाफ खुल कर अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगे हैं। अब वे उन बुद्धिजीवियों और विधि विशेषज्ञों को भी निशाना बना रहे हैं, जिन्होंने हाल में संसद के निचले सदन को भंग कराने के उनके फैसले की आलोचना की। लेकिन उनके निशाने पर खास तौर पर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुट के नेता पुष्प कमल दहल और माधव कुमार नेपाल हैं।   

विज्ञापन


इस महीने के शुरू में ओली ने दहल और नेपाल के बारे में कहा कि अगर दोनों शहीद हो जाते तो मैं शोक व्यक्त करता। लेकिन वो शहीद नहीं हुए हैं इसलिए उनके बारे में बात करने की अब कोई जरूरत नहीं। ओली ने पिछली 20 दिसंबर को सदन भंग कराने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी, जिसे तुरंत मान लिया गया। उसके बाद सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी विभाजित हो गई। दहल और नेपाल ने अलग होकर पार्टी का अपना गुट बना लिया। उसके बाद ओली ने माधव नेपाल को “एक साधारण कार्यकर्ता” बताया था। फिर ओली ने कहा था कि अगर माधव नेपाल बिना कुर्सी के नहीं रह सकते, तो वे उन्हें तीसरे दर्जे की कुर्सी देने के लिए तैयार हैं।
विज्ञापन


पिछली दो जनवरी को ओली ने दहल और नेपाल को जंग खाया 'नट एंड बोल्ट' करार दिया। उन्होंने कहा कि जब से जंग खाए नट और बोल्ट को हटा दिया गया है, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी नाम की कार तेजी से चलने लगी है। एक अन्य मौके पर ओली ने दहल और नेपाल को सड़ा हुआ फल बता दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ओली राजनीतिक संवाद के स्तर को इतना नीचे ले गए हैं, जितना पहले कभी नहीं देखा गया। इसे उन्होंने गंदा और स्तरहीन बना दिया है। त्रिभुवन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और यहां सिविल सोसायटी के जाने-माने नाम केदार भक्त मेथेमा ने यहां के अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ओली के कार्यों और शब्दों को लेकर मैं चिंतित हूं। लेकिन मुझे ज्यादा चिंता इस बात की है कि देश में एक नई पीढ़ी है, जो देश का नेतृत्व करना चाहती है। उनमें से कई लोग ओली का अनुकरण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नेताओँ का जुड़ना और अलग होना राजनीतिक का हिस्सा है। पार्टियों में विभाजन होते रहे हैं। लेकिन ओली जितना निचले स्तर पर आज तक कोई नहीं गया।

वैसे पुष्प कमल दहल की माओवादी पार्टी से ओली का बैर पुराना है। माओवादी पार्टी से 2006 में हुए शांति समझौते के तहत अंडर ग्राउंड राजनीतिक छोड़कर खुले में आई थी। ओली तब भी उसके आलोचक थे। लेकिन 2018 में उन्होंने बिना अपनी पार्टी राय-मशविरा किए दहल की पार्टी से हाथ मिला लिया। इसलिए राजनीतिक जानकार ये सवाल पूछ रहे हैं कि जब उन्होंने अपनी इच्छा से दहल से हाथ मिलाया, तो अब उनके खिलाफ इतना जहर क्यों उगल रहे हैं।


रविवार को ओली उन तमाम लोगों पर जमकर बरसे, जो सदन भंग कराने के उनके फैसले की आलोचना करते रहे हैं। इस सिलसिले में चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों की आलोचना करते हुए ओली ने कहा कि इन जजों के तेवर से लगता है जैसे वे अभी भी अदालत में अपने पदों पर मौजूद हों। उन्होंने कहा- अगर ऐसे लोग कोर्ट में होते तो आज कैसा फैसला देते, मेरे मन में यह सवाल घूम रहा है। गौरतलब है कि इन चारों पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने सदन भंग करने के फैसले को असंवैधानिक बताया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed