Nepal President: इस बार नेपाल में भी कोई जनजातीय नेता बन सकता है राष्ट्रपति?
Nepal President: खबरों के मुताबिक राजनीतिक दलों के बीच नए राष्ट्रपति के लिए कई नामों पर विचार हो रहा है। कुछ खबरों में बताया गया है कि कुछ नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस कल्याण श्रेष्ठ का नाम आगे बढ़ाया है। बताया जाता है कि जो नेता श्रेष्ठ को राष्ट्रपति बनाने की वकालत कर रहे हैं, उनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल भी हैं...
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नेपाल में निर्वाचन आयोग की तरफ से आम चुनाव के नतीजों की प्रामाणिक कॉपी राष्ट्रपति को सौंपे जाने के बाद नई सरकार बनाने की गतिविधियां तेज हो गई हैं। आयोग ने गुरुवार को चुनाव नतीजों की कॉपी राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी को सौंपी। इस बीच मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक विभिन्न दलों में नए राष्ट्रपति के नाम को लेकर भी सहमति बनाने की कोशिश तेज हो गई है। इसके अलावा उप राष्ट्रपति, संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर, और नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष पदों के लिए भी विचार-विमर्श जोर पकड़ गया है।
नेपाल को 2008 में गणराज्य घोषित किया गया था। तब अल्पसंख्यक मधेशी समुदाय से आए राम बरन यादव को राष्ट्रपति बनाया गया था। वे अक्तूबर 2015 तक इस पद पर रहे। उसके बाद विद्या देवी भंडारी राष्ट्रपति बनीं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मधेशी समुदाय और एक महिला को राष्ट्रपति बना नेपाल के राजनेताओं ने बेहतर मिसाल कायम की थी। अब उन्हें इस परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए।
काठमांडू यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ लॉ के पूर्व डीन विपिन अधिकारी ने कहा है कि अब समय है, जबकि किसी जनजाति समुदाय के नेता को यह पद दिया जाए। उन्होंने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘नस्लीय रूप से विभिन्नता भरे नेपाल में अल्पसंख्यक या पिछड़े समुदाय के नेता को राष्ट्रपति बनाने से प्रतीकात्मक रूप से राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।’
संविधान विशेषज्ञ राजू चापागैन ने कहा है कि समावेशन के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय रूप से स्वीकार्य किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा- ‘सिर्फ राजनीतिक लेन-देन के आधार पर राष्ट्रपति पद तय नहीं होना चाहिए। अगर अगला राष्ट्रपति भी अल्पसंख्यक समुदाय से आता है, तो उससे राष्ट्रीय एकता का संदेश जाएगा।’
इस सिलसिले में भारत में द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाए जाने के उदाहरण की भी चर्चा हो रही है। कुछ टीकाकारों ने कहा है कि जैसे भारत में पहले दलित समुदाय से आए रामनाथ कोविंद और फिर आदिवासी समुदाय से आईं द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाया गया, वैसा ही उदाहरण नेपाल में भी आगे बढ़ाया जाना चाहिए। खास कर उस स्थिति में अगर प्रधानमंत्री कोई बहुसंख्यक खास-आर्य समुदाय का नेता बनता है, तो ऐसा अवश्य किया जाना चाहिए।
खबरों के मुताबिक राजनीतिक दलों के बीच नए राष्ट्रपति के लिए कई नामों पर विचार हो रहा है। कुछ खबरों में बताया गया है कि कुछ नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस कल्याण श्रेष्ठ का नाम आगे बढ़ाया है। बताया जाता है कि जो नेता श्रेष्ठ को राष्ट्रपति बनाने की वकालत कर रहे हैं, उनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल भी हैं। हालांकि इस बारे में पत्रकारों के पूछने पर दहल के निकट सहयोगी रमेश मल्ला ने उन्हें ऐसी कोई सूचना होने से इनकार किया।
उधर एक दूसरे पूर्व चीफ जस्टिस खिल राज रेग्मी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से मुलाकात की थी। उसके बाद से यह चर्चा भी है कि रेग्मी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हो सकते हैं। लेकिन रेग्मी के एक निकट सहयोगी ने इस मुलाकात को एक सामान्य मुलाकात बताया है।