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Nepal: राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने नागरिकता संशोधन विधेयक को वापस संसद भेजा, बोली- और चर्चा की जरूरत

Sun, 14 Aug 2022 11:15 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 14 Aug 2022 11:15 PM IST
सार

पिछले महीने नेपाल की संसद ने नागरिकता कानून-2006 में बहुप्रतीक्षित संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी थी। यह बिल नेपाली नागरिकों के हजारों बच्चों को नागरिकता मिलने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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Nepal President Bidya Devi Bhandari returns Citizenship Amendment Bill
नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी - फोटो : ANI

विस्तार

नागरिकता कानून-2006 में बहुप्रतीक्षित संशोधन विधेयक को नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने रविवार को वापस संसद भेज दिया है। उन्होंने इस विधेयक पर चर्चा और जरूरी संशोधन के लिए इसे वापस भेजा है। गौरतलब है कि ये विधेयक पिछले तीन साल से लटका पड़ा है। संसद ने इस पिछले महीने इसे पारित कर राष्ट्रपति के पास भेजा था। जिसे अब उन्होंने वापस कर दिया है। राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी  इस पर और गंभीर चर्चा चाहती हैं। राष्ट्रपति कार्यालय ने इसके बारे में जानकारी दी। 

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गौरतलब है कि पिछले महीने नेपाल की संसद ने नागरिकता कानून-2006 में बहुप्रतीक्षित संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी थी। यह बिल नेपाली नागरिकों के हजारों बच्चों को नागरिकता मिलने का मार्ग प्रशस्त करेगा। काठमांडो पोस्ट अखबार के मुताबिक, इसके लागू होने के बाद 20 सितंबर 2015 से पूर्व जन्मे बच्चों को माता अथवा पिता के नेपाल में रहने पर वंश के आधार पर नागरिकता मिलेगी। 
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संविधान के मुताबिक 12 अप्रैल 1990 से पहले नेपाल में जन्म लेने वाले विदेशी मूल के लोगों को यहां जन्म लेने के आधार पर देश की नागरिकता मिली थी। लेकिन उनके बच्चों को नागरिकता देने संबंधी कोई कानून पहले मौजूद नहीं था।
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विधेयक में प्रावधान किया गया है कि नागरिकता प्रमाणपत्र में पिता और माता दोनों के विवरण दर्ज होंगे। अभी नागरिकता प्रमाणपत्र पर पिता, दादा या पति के विवरण ही दर्ज होते हैं। इसके अलावा नए विधेयक में उन अनाथ बच्चों को भी नागरिकता देने का प्रावधान है, जिनके माता-पिता की पहचान नहीं की जा सकी है।

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