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Nepal Election: नेपाल की राजनीति में अवसरवाद चरम सीमा पर, चुनावी फायदे की सोच सबसे ऊपर

Sat, 15 Oct 2022 06:09 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 15 Oct 2022 06:09 PM IST
सार

Nepal Election: विपक्षी पार्टी से तालमेल करने के बावजूद जनता समाजवादी पार्टी के नेता जोर दे रहे थे कि सरकार में उनकी पार्टी अलग नहीं होगी। उनकी दलील थी कि यूएमएल से उन्होंने सिर्फ आम चुनाव के लिए सीटों का तालमेल किया है, उन्होंने सत्ताधारी गठबंधन को छोड़ा नहीं है...

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Nepal : PM Sher Bahadur Deuba decided to remove Janata Samajwadi Party ministers from cabinet
Nepal Election: शेर बहादुर देउबा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जनता समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं को शेर बहादुर देउबा सरकार से बर्खास्त किए जाने के साथ ही इस पार्टी का नेपाल की सत्ताधारी गठबंधन से पूरा अलगाव हो गया है। इस पार्टी ने अगले आम चुनाव के लिए विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) से सीटों का तालमेल कर लिया है। कई दिनों तक चली ऊहापोह के बाद आखिरकार प्रधानमंत्री देउबा ने पार्टी से जुड़े मंत्रियों को हटाने का निर्णय लिया।

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विपक्षी पार्टी से तालमेल करने के बावजूद जनता समाजवादी पार्टी के नेता जोर दे रहे थे कि सरकार में उनकी पार्टी अलग नहीं होगी। उनकी दलील थी कि यूएमएल से उन्होंने सिर्फ आम चुनाव के लिए सीटों का तालमेल किया है, उन्होंने सत्ताधारी गठबंधन को छोड़ा नहीं है। बताया जाता है कि मंत्रियों को हटाने के सवाल पर सत्ताधारी गठबंधन के अन्य दलों के अंदर भी मतभेद थे।

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ये बात तब जाहिर हुई, जब प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष देउबा ने गठबंधन सहयोगियों- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) और राष्ट्रीय जन मोर्चा के नेताओं से इस मुद्दे पर बातचीत की। इस दौरान कुछ नेताओं ने राय जताई कि चुनाव के बाद संभव है कि गठबंधन को जनता समाजवादी पार्टी के समर्थन की जरूरत पड़े। इसलिए उसे सरकार में बनाए रखा जा सकता है। लेकिन खबरों के मुताबिक देउबा उन मंत्रियों को हटाने के अपने इरादे पर कायम रहे।

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जनता समाजवादी पार्टी दलील दे रही थी कि प्रधानमंत्री को अब मंत्रियों को हटाने का अधिकार नहीं है। पार्टी के नेता और हटाए गए मंत्रियों में से एक राजेंद्र श्रेष्ठ ने कहा था- ‘कार्यवाहक सरकार की स्थिति में आने के बाद सरकार बड़े फैसले नहीं ले सकती। मंत्रियों को हटाना एक बड़ा फैसला है, इसलिए मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री ऐसा निर्णय लेंगे।’

प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने कहा है कि इस प्रश्न पर देउबा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश थपलिया की सलाह ली। थपलिया ने उन्हें बताया कि कार्यवाहक अवस्था में प्रधानमंत्री नए मंत्री नहीं बना सकते हैं, लेकिन वे मंत्रियों को हटा सकते हैं। इसके बाद देउबा ने चारों मंत्रियों को हटाने का फैसला गुरुवार को ले लिया।

पर्यवेक्षकों ने राय जताई है कि ये पूरा मामला नेपाली सियासत में बढ़ रहे अवसरवाद और अनैतिकता की एक बड़ी मिसाल है। इसमें अब यह अनुमान लगाना मुश्किल होता जा रहा है कि कौन-सी पार्टी कब किसके साथ जुड़ जाएगी। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि नागरिकता अधिनियम-2006 संशोधन कानून जैसे महत्त्वपूर्ण मसले पर घोर मतभेद के बावजूद जनता समाजवादी पार्टी ने यूएमएल के साथ हाथ मिला लिया है। दोनों पार्टियों के बीच हुआ सीटों का तालमेल अवसरवाद के अलावा कुछ नहीं है।

इस तरफ ध्यान खींचने पर जनता समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनीष कुमार सुमन ने कहा- ‘यूएमएल से हमारे वैचारिक मतभेद कायम हैं, लेकिन हमने चुनाव में अपनी स्थिति बेहतर करने के लिए उससे तालमेल किया है।’ उन्होंने कहा कि ये तालमेल सिर्फ चुनाव तक के लिए है।

नेपाल में अगले 20 नवंबर को संसद के निचले सदन- प्रतिनिधि सभा और सातों प्रांतों की असेंबलियों के चुनाव के लिए मतदान होगा। यूएमएल ने 17 संसदीय सीटों पर जनता समाजवादी पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है। इसके बदले ये पार्टी उसे 35 सीटों पर अपना समर्थन देगी।

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