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नेपाल के कामी रीता शेरपा ने 24वीं बार किया एवरेस्ट फतह, एक हफ्ते में दूसरी बार तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड

Tue, 21 May 2019 06:57 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 21 May 2019 06:57 PM IST
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Nepal kami rita sherpa climbed mount Everest 24th time, breaks own record second time in a week
कामी रीता शेरपा (फाइल फोटो)
नेपाल के 49 वर्षीय पर्वतारोही कामी रीता शेरपा ने एक हफ्ते में दूसरी बार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर अपना ही रिकॉर्ड तोड़कर फिर से इतिहास रच दिया है। शेरपा ने 24वीं बार एवरेस्ट पर फतह किया है। ऐसा करने वाले वे दुनिया के एकमात्र पर्वतारोही हैं। इससे पहले 15 मई को उन्होंने 23वीं बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। 
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कामी रीता शेरपा दुनिया के सबसे अनुभवी पर्वतारोही बन चुके हैं। उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को बार-बार तोड़ा है। रिकॉर्ड बना चुके कामी शेरपा 25 बार एवरेस्ट को फतह कर इतिहास बनाना चाहते हैं। 
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नेपाल ने इस साल पर्वतारोहियों के लिए 11,000 डॉलर (करीब 7.72 लाख रुपये) की लागत के रिकॉर्ड 378 परमिट जारी किए हैं। अगर मौसम के खराब होने से पर्वतारोहण के दिनों में कमी आती है, तो भीड़ बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है। 
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1994 में पहली बार फतह किया एवरेस्ट

गौरतलब है कि साल 1994 में कामी रीता शेरपा 25 साल की उम्र में पहली बार माउंट एवरेस्ट पर पहुंचे थे। इसके बाद से यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। इस चोटी पर चढ़ाई करने का सही समय मार्च से मई तक होता है। कामी ने नेपाल की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना शुरू किया था। इस चोटी पर पहुंचने का दूसरा रास्ता तिब्बत की तरफ से है। 

क्या है कामी रीता शेरपा की प्रेरणा

शेरपा की इस कामयाबी का एक मतलब ये भी है कि वह दुनिया के सबसे अनुभवी एवरेस्ट पर्वतारोही बन जाएंगे। वह कहते आए हैं कि वह इतिहास बनाने की कोशिश इसलिए करते हैं ताकि उनके देश और समुदाय को इसपर गर्व हो।

पिछले साल पांच पर्वतारोही मारे गए

पिछले साल माउंट एवरेस्ट के शिखर पर रिकॉर्ड 807 पर्वतारोही पहुंचे थे, जिसमें से 563 लोग दक्षिण से और 244 तिब्बत की तरफ से चोटी पर चढ़े थे। हालांकि, पिछले साल इस कोशिश में एक अनुभवी शेरपा गाइड सहित पांच पर्वतारोहियों की मौत भी हो गई थी।

शेरपाओं की मदद जरूरी

विदेशी पर्वतारोही चोटी पर चढ़ाई करने के लिए अनुभवी शेरपाओं की मदद लेते हैं। ये अनुभवी शेरपा पर्वतारोही दल के लिए ट्रैवल रूट तैयार करते हैं, रस्सियां जगह पर लगाते हैं और जरूरी औजार और सामान साथ लेकर चलते हैं।
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