Nepal: खड़का की चीन यात्रा के बाद बीआरआई की बात पर परदा क्यों डाला नेपाल सरकार ने?
Nepal: नेपाल के बयान में चीन के बेल्ट एंड रोड परियोजना का कोई जिक्र नहीं है। जबकि चीन के बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि नेपाल में चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत उच्च गुणवत्ता वाले निर्माणों के लिए इच्छुक है...
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नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खड़का अपनी तीन दिन की बहुचर्चित चीन यात्रा से लौट आए हैँ। चीन के शहर चियानदाओ में खड़का की चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हुई और इस दौरान कई सहमति-पत्रों पर दस्तखत हुए। लेकिन खड़का की यात्रा पर दोनों पक्षों ने अलग-अलग बयान जारी किया है। उनसे संकेत मिला है कि दोनों पक्षों में वैसी सहमति नहीं थी, जैसा संकेत पहले दिया गया। वैसे नेपाल में इस मामले में शेर बहादुर देउबा सरकार के रुख की कड़ी आलोचना हो रही है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक दोनों देशों के बयान में अंतर के कई बिंदु हैं। नेपाली बयान में बताया गया है कि चीन नेपाल को 15 बिलियन डॉलर की मदद देने को सहमत हुआ है। लेकिन चीन के बयान में इस बात का कोई उल्लेख नहीं है। उधर नेपाल के बयान में चीन के बेल्ट एंड रोड परियोजना का कोई जिक्र नहीं है। जबकि चीन के बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि नेपाल में चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत उच्च गुणवत्ता वाले निर्माणों के लिए इच्छुक है। चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया- ‘दोनों पक्ष यथाशीघ्र बेल्ड एंड रोड के तहत साझा निर्माण की योजना पर बातचीत करेंगे और उसे अमली जामा पहनाएंगे।’
गुरुवार शाम काठमांडू स्थित चीनी राजदूत हाउ यानची ने एक ट्विट किया, जिसमें स्पष्ट रूप से बीआरआई का जिक्र किया गया। ट्विट में कहा गया- ‘दोनों पक्षों में द्विपक्षीय सहयोग को लेकर व्यापक सहमति बनी, जिसमें एक दूसरे के आंतरिक मामलों में अ-हस्तक्षेप का स्वर्णिम नियम और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए बीआरआई के तहत निर्माण शामिल हैं।’
अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट में नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है- ‘ऐसा लगता है कि जब बीआरआई की बात आती है, तो नेपाल की वर्तमान सरकार भयाक्रांत हो जाती है।’ अधिकारी ने कहा- ‘डर के इस मनोविज्ञान का क्या कारण क्या है, हमें यह नहीं मालूम। हम राय-मशविरा के दौर में ही बीआरआई के तहत बनने वाली परियोजनाओं का जिक्र कर सकते थे। बीआरआई पर हमने दस्तखत राष्ट्रीय आम सहमति बनने के बाद किया था, इसलिए इसमें डरने की कोई बात नहीं है। अगर हम इस तरह छिपाने की कोशिश करेंगे, तो चीन में हमारे लिए क्या धारणा बनेगी।’
इसके पहले जब चीनी विदेश मंत्री वांग यी नेपाल यात्रा पर आए थे, तब भी जारी बयान में नेपाल सरकार बीआरआई के बारे में हुई चर्चा पर चुप रही थी। जबकि चीन के बयान में उसका साफ उल्लेख हुआ था। पूर्व विदेश मंत्री और प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के नेता प्रदीप ग्यावली ने आरोप लगाया है कि मौजूद शेर बहादुर देउबा सरकार ने आरंभ से ही बीआरआई के प्रति नकारात्मक रुख अपनाया हुआ है, जिससे नेपाल की साख खतरे में पड़ी है। ग्यावली ने कहा- ‘सरकार में शामिल कुछ लोग सोचते हैं कि बीआरआई का मतलब कर्ज है। प्रधानमंत्री भी इसी सोच से चलते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि परियोजनाओं का चयन हम करते हैं, फिर उस पर बातचीत होती है और अंत में फंडिंग का मुद्दा आता है।’