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सीमा विवाद : भारतीय सेना प्रमुख के बयान को नेपाल के रक्षा मंत्री ने बताया देश का अपमान

Mon, 25 May 2020 04:45 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 25 May 2020 04:45 PM IST
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Nepal Defence Minister said statement of Indian Army Chief General Naravane over border dispute is insult to history of Nepal
नेपाल के रक्षा मंत्री ईश्वर पोखरेल और भारतीय सेना प्रमुख जनरल नरवणे - फोटो : फाइल

भारत द्वारा लिपुलेख-धारचूला मार्ग तैयार किए जाने पर नेपाल की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद दोनों देशों के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है। हाल ही में भारतीय सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने कहा था कि नेपाल किसी और के कहने पर इसका विरोध कर रहा है। वहीं, अब सेना प्रमुख के इस बयान की नेपाल के रक्षा मंत्री ईश्वर पोखरेल ने आलोचना की है। 

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पोखरेल ने सोमवार को कहा कि लिपुलेख मुद्दे पर भारतीय सेना प्रमुख का बयान नेपाल के इतिहास का अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारतीय सेना प्रमुख की ओर से राजनीतिक बयान दिया जाना पेशेवर है? बता दें कि भारत ने आठ मई को लिपुलेख-धारचूला मार्ग का उद्घाटन किया था। नेपाल ने इस पर आपत्ति जताई थी।

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'राजनीतिक मामलों में सेना का दखल क्यों?'

दि राइजिंग नेपाल को दिए साक्षात्कार में पोखरेल ने कहा, भारतीय सेना प्रमुख का बयान अपमानजनक है। उनके बयान में नेपाल के इतिहास, सामाजिक विशेषता और स्वंत्रता की अनदेखी की गई है। उन्होंने  नेपाली गोरखा जवानों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई है जो भारत की रक्षा के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा देते हैं। उन्होंने कहा, हमारे यहां ऐसा नहीं होता, नेपाल की सेना राजनीतिक मामलों में दखल नहीं देती है। 

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'दिमाग से नहीं, तथ्यों के आधार पर होगी वार्ता'

उन्होंने कहा, एक करीबी दोस्त और पड़ोसी होने के नाते भारत को सकारात्मक प्रतिक्रिया देनी चाहिए। इसके लिए आपस में बातचीत होगी तो हम इस मुद्दे पर स्पष्ट शब्दों में अपना पक्ष रखेंगे। दोनों देशों के बीच बातचीत दिमाग से नहीं बल्कि तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी हाल ही में कहा था कि पड़ोसी देशों के बीच सेना का बोलना उचित नहीं है।

सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने दिया था यह बयान

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने परोक्ष रूप से चीनी भूमिका का संकेत देते हुए बीते दिनों कहा था कि यह मानने के कारण हैं कि उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे तक भारत के सड़क बिछाने पर नेपाल किसी और के कहने पर आपत्ति जता रहा है। एक रक्षा थिंक-टैंक के साथ बातचीत में नरवणे ने यह भी कहा कि चीनी सेना के साथ हाल की तनातनी पर भारतीय सेना सिलसिलेवार तरीके से निपट रही है।

जनरल नरवणे ने कहा था कि पड़ोसी देश की प्रतिक्रिया हैरान करने वाली थी। सेना प्रमुख ने कहा था, 'काली नदी के पूरब की तरफ का हिस्सा उनका है। हमने जो सड़क बनाई है वह नदी के पश्चिम की तरफ है। इसमें कोई विवाद नहीं था। मुझे नहीं पता कि वे किसी चीज के लिये विरोध कर रहे हैं। पूर्व में कभी कोई समस्या नहीं हुई है। यह मानने के कई कारण हैं कि उन्होंने किसी दूसरे के कहने पर यह मामला उठाया है।' 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था उद्घाटन

बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते दिनों उत्तराखंड में 17 हजार फीट की ऊंचाई पर चीन की सीमा से लगी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी इस सड़क का उद्घाटन किया था। नेपाल ने शनिवार को सड़क के उद्घाटन पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि 'एकतरफा कार्रवाई' सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच बनी सहमति के खिलाफ है।

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