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नेपाल : राष्ट्रपति भंडारी के फैसले पर सुनवाई के लिए नई सांविधानिक पीठ गठित

Mon, 07 Jun 2021 04:23 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, काठमांडो
एजेंसी, काठमांडो Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 07 Jun 2021 04:23 AM IST
सार

  • नेपाल के मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा द्वारा पीठ का गठन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की वरिष्ठता और विशेषज्ञता के आधार पर किया गया है। 
  • 22 मई को प्रतिनिधि सभा भंग करने के खिलाफ सुनवाई को लंबित हैं 30 याचिकाएं

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Nepal: A new constitutional bench was constituted to hear the decision of President Vidya Devi Bhandari
nepal supreme court - फोटो : pti

विस्तार

नेपाल उच्चतम न्यायालय द्वारा रविवार को एक नई सांविधानिक पीठ का गठन किया गया है, जो 22 मई को प्रतिनिधि सभा भंग करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

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उच्चतम न्यायालय ने किया नई सांविधानिक पीठ का गठन 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सांविधानिक पीठ की संरचना को लेकर न्यायाधीशों के बीच मतभेदों के कारण अहम सुनवाई में हुई देरी के बाद उच्चतम न्यायालय की ओर से यह पहल की गई है। नेपाल के मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा द्वारा पीठ का गठन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की वरिष्ठता और विशेषज्ञता के आधार पर किया गया है। 
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22 मई को प्रतिनिधि सभा भंग करने के खिलाफ सुनवाई को लंबित हैं 30 याचिकाएं
द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नई सांविधानिक पीठ में न्यायमूर्ति दीपक कुमार कार्की, न्यायमूर्ति आनंद मोहन भट्टाराई, मीरा धुंगाना, ईश्वर प्रसार खातीवाड़ा और स्वयं मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं।
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नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने सरकार के अल्पमत में आने के साथ प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सिफारिश पर पांच महीनों में दूसरी बार 22 मई को 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा भंग कर 12 नवंबर और 19 नवंबर को मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा की थी। राष्ट्रपति भंडारी के इस फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में करीब 30 याचिकाएं दर्ज की गई हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया कि प्रधान न्यायाधीश राणा ने इससे पहले न्यायमूर्ति दीपक कुमार कार्की, आनंद मोहन भट्टाराई, तेज बहादुर केसी और न्यायमूर्ति बाम कुमार श्रेष्ठ को असांविधानिक विघटन के खिलाफ दर्ज 30 याचिकाओं पर सुनवाई के लिए चुना था।

न्यायमूर्ति बिश्वंभर प्रसाद श्रेष्ठ की बीमारी के बाद, उनके उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति भट्टाराई और खतीवाड़ा को सांविधानिक पीठ में शामिल किया गया था। लेकिन सांविधानिक पीठ के गठन में विवाद के चलते अहम सुनवाई प्रभावित हुई।

उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश के अलावा वर्तमान में हैं 13 वरिष्ठ न्यायाधीश

नेपाल उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश के अलावा वर्तमान में 13 वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। संविधान के अनुच्छेद 76 (5) के तहत नई सरकार बनाने का दावा पेश करने वाले नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा समेत भंग सदन के 146 सदस्यों ने भी उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर प्रतिनिधि सभा को फिर से बहाल करने की मांग की है।

वहीं, राष्ट्रपति भंडारी ने नई सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री ओली और विपक्षी गठबंधन के दो अलग-अलग दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दावे अपर्याप्त हैं। जबकि देउबा के एक वकील द्वारा नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी की एकता और पंजीकरण की समीक्षा के मामले में संवैधानिक पीठ के सदस्यों के रूप में चुने गए दो न्यायाधीशों पर उनके पिछले फैसले पर सवाल उठाए जाने के बाद विवाद छिड़ गया।

संवैधानिक पीठ के गठन पर विवाद बढ़ने के बाद न्यायाधीश तेज बहादुर केसी और बाम कुमार श्रेष्ठ ने पीठ नहीं छोड़ने का फैसला किया जबकि दो अन्य न्यायाधीशों ने पीठ से बाहर निकलने का विकल्प चुना। इसने मुख्य न्यायाधीश राणा को सदन भंग के खिलाफ दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पीठ का पुनर्गठन करने को मजबूर किया।

इस बीच, विपक्षी गठबंधन ने शनिवार को संयुक्त बयान जारी कर ओली सरकार द्वारा मंत्रिमंडल में फेरबदल करने की निंदा की। प्रधानमंत्री ओली ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल में फेरबदल किया। ओली के नए मंत्रिमंडल में तीन उप-प्रधानमंत्री, 12 कैबिनेट मंत्री और दो राज्य मंत्री हैं।

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