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Report: 2050 तक सात करोड़ से ज्यादा लोगों के कुपोषित होने का खतरा, IFPRI की वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट जारी

Mon, 19 Jun 2023 05:45 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 19 Jun 2023 05:45 PM IST
सार

Report: अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) द्वारा जारी 'वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट' में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से 2050 तक 72 मिलियन (7.2 करोड़) और लोगों के कुपोषित होने का खतरा है। 

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Need for systematic long term approaches to food crisis as climate change threat looms Report
खाद्य असुरक्षा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

खाद्य संकट से निपटने के लिए व्यवस्थित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण (विजन) विकसित करने की आवश्यकता है क्योंकि जलवायु परिवर्तन से 2050 तक 72 मिलियन (7.2 करोड़) और लोगों के कुपोषित होने का खतरा है। सोमवार को यहां जारी एक वैश्विक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

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आईएफपीआरआई ने किया सामाजिक सुरक्षा प्रणाली विकसित करने का आह्वान
अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) द्वारा जारी 'वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट' (जीएफपीआर) में सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को विकसित करने के लिए एक ऐसे सक्रिय दृष्टिकोण का आह्वान किया गया है जो अत्यधिक अनुकूलित, लचीला और समावेशी हो, और संकट आने पर जल्दी से जिसे विस्तारित किया जा सके। 

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खाद्य संकट के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य संकट प्रतिक्रिया के लिए अधिक व्यवस्थित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता है जो टिकाऊ हो और भविष्य में इसी तरह के और नए संकटों के अधिक लचीलापन बनाने में मदद करे। जीएफपीआर रिपोर्ट के लेखकों ने आगे कहा है कि इस दृष्टिकोण को तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए: संकट की भविष्यवाणी और तैयारी; संकट से पहले और दौरान लचीलापन का निर्माण; संकट प्रतिक्रिया को महिलाओं, मजबूर प्रवासियों और अन्य कमजोर समूहों के लिए सहायक और समावेशी बनाना।

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20 करोड़ से ज्यादा लोगों ने किया तीव्र खाद्य असुरक्षा का अनुभव
खाद्य सुरक्षा सूचना नेटवर्क (एफएसआईएन) द्वारा तैयार की गई 'खाद्य संकट पर वैश्विक रिपोर्ट (2022)' के मुताबिक, 45 देशों में 205 मिलियन (20.5 करोड़) लोगों ने संकट-स्तर की तीव्र खाद्य असुरक्षा का अनुभव किया या इन जटिल संकटों के कारणों बदतर स्थिति का सामना किया।रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020-2022 के दौरान खाद्य असुरक्षा में वृद्धि लंबे समय तक चली कोविड-19 महामारी, प्राकृतिक आपदाओं, नागरिक अशांति, राजनीतिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों और रूस-यूक्रेन युद्ध के वैश्विक नतीजों के कारण हुई है।

2022 में दक्षिण एशिया में दर्ज किया सौ साल में सर्वाधिक तापमान
आईएफपीआरआई के दक्षिण एशिया के निदेशक शाहिदुर राशिद ने कहा कि दक्षिण एशिया में चरम जलवायु एक प्रतिमान बन गया है और 2022 में लगभग सौ वर्षों में इस क्षेत्र में सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया। इसलिए, लचीला संकट प्रतिक्रिया प्रणाली बनाने में दक्षिण एशिया की सफलता का वैश्विक विकास एजेंडा और वैश्विक खाद्य प्रणालियों की स्थिरता पर भी प्रभाव पड़ता है। आईएफपीआरआई के महानिदेशक और ‘सीजीआईएआर सिस्टम ट्रांसफॉर्मेशन साइंस ग्रुप’ के प्रबंध निदेशक जोहान स्विनेन ने कहा, ‘‘ये सभी संकट एक के बाद एक साथ आ रहे हैं, और हम अपनी प्रणाली में अस्थिरता देख रहे हैं और ऐसी आपदाजनक घटनाओं में भारी वृद्धि भी।’’

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